खम्मा रहें खम्मा: मुम्बई में गूंजा आशापुरा माताजी का जयघोष
श्री आशापुरा जैन नवयुवक सेवा समिति मुम्बई द्वारा ऐतिहासिक भक्ति संध्या का भव्य आयोजन, 1200+ भक्तों की सहभागिता से झूम उठा महानगर
✍️ रिपोर्ट: के विक्रम सुराणा / अभियान आज तक, मुम्बई
महाराष्ट्र की मायानगरी मुम्बई रविवार की शाम एक अद्भुत आध्यात्मिक अनुभव की साक्षी बनी, जब पूरे शहर में “खम्मा रहें खम्मा, मारी आशापुरा माताजी ने खम्मा रहें खम्मा” के जयकारे गूंज उठे।
यह भव्य आयोजन श्री आशापुरा जैन नवयुवक सेवा समिति, मुम्बई द्वारा ठाकुर द्वार लोहाना माहाजन वाड़ी, सी.पी. टैंक में अत्यंत हर्षोल्लास और श्रद्धा के साथ सम्पन्न हुआ।
यह केवल एक धार्मिक कार्यक्रम नहीं बल्कि भक्ति और समाज-एकता का ऐतिहासिक संगम था, जिसमें 1200 से अधिक भक्तों ने शामिल होकर माताजी के प्रति अपनी अटूट श्रद्धा व्यक्त की।
भक्ति में डूबा मुम्बई महानगर
शाम ढलते ही माहौल भक्तिमय हो उठा। भक्ति स्थल पर जैसे ही माताजी के भजन और आरती की स्वर लहरियाँ गूंजीं, पूरा परिसर “जय माता दी – आशापुरा माताजी की जय” के नारों से गूंज गया।
भक्तों के चेहरे पर अपार आनंद, भक्ति के प्रति समर्पण और नृत्य करते हुए कदमों से प्रकट हुआ प्रेम—यह दृश्य वास्तव में भावविभोर करने वाला था।
कार्यक्रम में आए हुए भक्तों ने कहा कि ऐसी भक्ति संध्या उन्होंने वर्षों बाद देखी है, जहाँ हर व्यक्ति माताजी के चरणों में लीन था।
समाज की एकजुटता का प्रतीक बना आयोजन
श्री आशापुरा जैन नवयुवक सेवा समिति, मुम्बई ने इस आयोजन के माध्यम से यह संदेश दिया कि समाज में एकता, श्रद्धा और संस्कृति के संरक्षण से ही भक्ति की सच्ची परंपरा जीवित रहती है।
कार्यक्रम की सफलता में समिति के सदस्यों का विशेष योगदान रहा —
सुरेश जी बोकड़िया, कपिल भाई गुड़ामालानी, तारचंद जी मोरसीम, नरपत भाई मोरसीम, राणमल बोकड़िया, हेमंत भाई संघवी, हिरालाल संघवी, दीपक बोकड़िया, मोती संघवी, अल्पेश भाई संघवी, प्रविण भाई संघवी, भूपेश भाई संघवी, नरपत भाई बोकड़िया, नरेश भाई गांधी, ओम प्रकाश गांधी, मिलन भाई भिमाणी, निलेश भाई बोकड़िया, गणपत भाई गांधी मुथा और जयंत भाई गांधी मुथा का विशेष प्रयास रहा।
विभिन्न नगरों से पहुँचे श्रद्धालु
इस ऐतिहासिक भक्ति संध्या में केवल मुम्बई ही नहीं, बल्कि गुड़ामालानी, बागोड़ा, मोरसीम, नेनावा, सांचोर, धुम्बडीया, रानीवाड़ा, सुराणा, भीनमाल, भाद्ररला सहित कई नगरों और गाँवों से भक्त बड़ी संख्या में पहुंचे।
भक्तों की यह उपस्थिति माताजी के प्रति उनकी अपार आस्था का प्रमाण बनी।
संगीत और भक्ति का अद्भुत संगम
भक्ति संध्या की विशेषता रही संगीतकार राहुल जी पामेचा का सुमधुर संगीत और सुप्रसिद्ध सिंगर रेखाजी नेनावा की भक्ति प्रस्तुति, जिन्होंने अपनी आवाज़ से कार्यक्रम में चार चाँद लगा दिए।
इसके साथ ही दिनेश जी चोपड़ा, दिनेश जी मोरसीम, जेनम भाई पिण्डवाड़ा, और कमलेश भाई गांधी जैसे कलाकारों ने भी अपनी प्रस्तुति से भक्तों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
हर भजन, हर ताल, हर धुन माताजी के प्रति भक्ति का गूढ़ संदेश देती रही।
कार्यक्रम के दौरान भक्तगण भावविभोर होकर झूमते, गुनगुनाते और तालियाँ बजाते रहे।
प्रमुख समाजसेवियों की उपस्थिति
इस ऐतिहासिक आयोजन में कई गणमान्य समाजसेवी और श्रद्धालु उपस्थित रहे जिनमें प्रमुख रूप से —
पवन जी संघवी, गोतम जी संघवी गुड़ामालानी, रमेश जी मोरसीम, दिलीप भाई भंसाली बागोड़ा, ललित भाई सोना ग्रुप, नरपत जी मोरसीम (माताजी के परम भक्त), श्री सुराणा आशापुरा माताजी पैदल संघ के प्रमुख के विक्रम सुराणा, कांतिलाल जी मोरसीम, सुरेश जी भाद्ररला, खिमजी भाद्ररला, जिगर भाई, साईल भाई धुम्बडीया, करणजी मेहता, यश भाई, शिवराज भाई सहित हजारों श्रद्धालु उपस्थित रहे।
इन सभी ने मिलकर न केवल आयोजन की शोभा बढ़ाई बल्कि समाज में भक्ति और संगठन शक्ति का सुंदर उदाहरण भी प्रस्तुत किया।
के विक्रम सुराणा का भक्ति संदेश
कार्यक्रम के दौरान श्री के विक्रम सुराणा, जो कि श्री सुराणा आशापुरा माताजी पैदल संघ के प्रमुख हैं, ने कहा —
“आशापुरा माताजी केवल हमारी आराध्य देवी नहीं, बल्कि हमारी आशा, शक्ति और एकता का प्रतीक हैं।
भक्ति संध्या का उद्देश्य है कि हम सब मिलकर माताजी के उपदेशों और संस्कारों को आने वाली पीढ़ियों तक पहुँचाएं।”
उनके इन प्रेरक शब्दों ने कार्यक्रम में उपस्थित हर व्यक्ति को आत्मिक रूप से स्पर्श किया।
मुम्बई में जैन समाज की आस्था का उत्सव
यह आयोजन केवल धार्मिक नहीं बल्कि सांस्कृतिक एकता और सेवा भावना का जीवंत प्रतीक बना।
श्री आशापुरा जैन नवयुवक सेवा समिति मुम्बई ने भक्ति के साथ-साथ समाजसेवा के प्रति अपने संकल्प को भी दोहराया।
भक्तों ने कहा कि इस प्रकार के आयोजन से न केवल धार्मिक ऊर्जा बढ़ती है बल्कि समाज में आपसी सहयोग और प्रेम की भावना भी सशक्त होती है।
निष्कर्ष: भक्ति का नया अध्याय
“खम्मा रहें खम्मा मारी आशापुरा माताजी” का स्वर मुम्बई के आकाश में देर तक गूंजता रहा।
भक्ति की इस ऐतिहासिक संध्या ने मुम्बई महानगर को एक नई आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया।
यह आयोजन न केवल जैन समाज की धार्मिक आस्था का प्रतीक था, बल्कि एक सामाजिक संदेश भी —
कि जब श्रद्धा, सेवा और एकता साथ हों, तो हर भक्ति एक ऐतिहासिक अध्याय बन जाती है।

