आर्यिका माता पूर्णमंती अष्टापद बद्रीनाथ यात्रा को लेकर बद्रीनाथ ट्रस्ट एवं धर्म समाज प्रचारक राजेश जैन दद्दू द्वारा पावन निवेदन और मंगल भावना के साथ आशीर्वाद प्राप्त किया गया।
आर्यिका माता पूर्णमंती अष्टापद बद्रीनाथ – पावन भूमिका
आर्यिका माता पूर्णमंती अष्टापद बद्रीनाथ यात्रा को लेकर जैन समाज में विशेष आध्यात्मिक उत्साह का वातावरण है। यह केवल एक यात्रा नहीं, बल्कि जैन धर्म की तप, त्याग और साधना परंपरा का जीवंत प्रतीक है। इसी पावन उद्देश्य से पूज्य आर्यिका माता श्री पूर्णमंती जी को अष्टापद बद्रीनाथ तीर्थ यात्रा हेतु निवेदन किया गया।
दिल्ली में चातुर्मास और साधना का केंद्र
इस वर्ष परम वंदनीय आर्यिका माता पूर्णमंती जी का चातुर्मास दिल्ली के शाहदरा अशोक नगर में संपन्न हो रहा है। चातुर्मास काल में माता जी के प्रवचनों, ध्यान और संयम से जैन समाज को आध्यात्मिक ऊर्जा प्राप्त हो रही है। बड़ी संख्या में श्रद्धालु माता जी के दर्शन एवं आशीर्वाद हेतु पहुंच रहे हैं।
अष्टापद बद्रीनाथ यात्रा हेतु मंगल निवेदन
धर्म समाज प्रचारक राजेश जैन दद्दू (इंदौर) ने जानकारी देते हुए बताया कि बद्रीनाथ ट्रस्ट के अध्यक्ष श्री आदित्य कासलीवाल, महामंत्री कीर्ति पांड्या एवं ट्रस्टी विजय काला ने पूज्य आर्यिका माता जी को श्रीफल भेंट कर अष्टापद बद्रीनाथ तीर्थ में मंगलमय प्रवेश हेतु निवेदन किया।
यह क्षण जैन समाज के लिए अत्यंत गौरवपूर्ण रहा, जहाँ सभी ने यही मंगल भावना व्यक्त की कि आर्यिका माता जी के संघ का तीर्थराज अष्टापद बद्रीनाथ में शुभ एवं दिव्य प्रवेश हो।
बद्रीनाथ ट्रस्ट और जैन तीर्थ परंपरा
अष्टापद बद्रीनाथ जैन धर्म का एक अत्यंत प्राचीन एवं पवित्र तीर्थ स्थल है। बद्रीनाथ ट्रस्ट द्वारा जैन साधु-साध्वियों की यात्रा और तीर्थ व्यवस्था हेतु निरंतर प्रयास किए जाते रहे हैं। इस यात्रा से जैन तीर्थों के संरक्षण, प्रचार और आध्यात्मिक चेतना को नई दिशा मिलेगी।
जैन समाज के लिए आध्यात्मिक संदेश
आर्यिका माता पूर्णमंती अष्टापद बद्रीनाथ यात्रा से जैन समाज को यह संदेश मिलता है कि तीर्थ केवल स्थल नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि और साधना का माध्यम हैं। माता जी का आशीर्वाद समाज में अहिंसा, संयम और सद्भाव को और अधिक मजबूत करेगा।
निष्कर्ष
अंततः, आर्यिका माता पूर्णमंती अष्टापद बद्रीनाथ यात्रा का यह निवेदन जैन समाज के लिए ऐतिहासिक और प्रेरणादायक है। बद्रीनाथ ट्रस्ट, धर्म समाज प्रचारकों और श्रद्धालुओं की मंगल भावना से यह यात्रा निश्चित ही आध्यात्मिक चेतना का नया अध्याय लिखेगी।
पूरे जैन समाज की ओर से माता जी को वंदन एवं मंगलकामनाएँ।
