गणपति बप्पा की विदाई में आस्था के साथ जलस्रोतों की स्वच्छता का भी रखें ध्यान
सारंगपुर में पर्यावरण-अनुकूल विसर्जन की अपील; पूजन सामग्री अलग एकत्र करने और निर्धारित विसर्जन स्थलों का उपयोग करने पर जोर
सारंगपुर। घरों और सार्वजनिक पंडालों में भगवान श्रीगणेश की आरती, भजन और जयघोष के बीच गणेशोत्सव मनाया जा रहा है। अब प्रतिमाओं के विसर्जन की बेला निकट आने पर नगर के पर्यावरण प्रेमियों, धार्मिक प्रतिनिधियों और जनप्रतिनिधियों ने नागरिकों से जलस्रोतों की स्वच्छता का ध्यान रखने की अपील की है। उनका कहना है कि गणपति बप्पा की विदाई श्रद्धा और उत्साह के साथ हो, लेकिन पूजन सामग्री, प्लास्टिक और अन्य कचरा जल में न पहुंचे।
मिट्टी की प्रतिमाओं और प्राकृतिक रंगों को दें प्राथमिकता
वरिष्ठ पर्यावरण प्रेमी लक्ष्मी नारायण त्रिकार ने कहा कि गणेशोत्सव धार्मिक आस्था का महत्वपूर्ण पर्व है। इसके आयोजन के साथ पर्यावरणीय संतुलन का ध्यान रखना भी आवश्यक है। उनके अनुसार, प्रतिमाओं में प्रयुक्त सामग्री, रासायनिक रंग और विसर्जन के दौरान जल में जाने वाली अन्य वस्तुएं जलस्रोतों को प्रभावित कर सकती हैं।
उन्होंने नागरिकों से मिट्टी और प्राकृतिक रंगों से बनी प्रतिमाओं को प्राथमिकता देने का आग्रह किया। साथ ही कहा कि फूल-मालाओं और अन्य पूजन सामग्री को अलग एकत्र कर उसका उचित निस्तारण किया जाए। त्रिकार ने कहा कि जल जीवन का आधार है, इसलिए पर्व मनाते समय उसे स्वच्छ रखने की जिम्मेदारी भी निभानी चाहिए। बप्पा की विदाई के अवसर पर प्रकृति की सुरक्षा का संकल्प उत्सव को और सार्थक बनाएगा।
निर्धारित विसर्जन स्थल का करें उपयोग
श्रीखेड़ापति हनुमान मंदिर, सारंगपुर के पुजारी पं. पवन ब्रज जगदीश पारीक ने कहा कि भारतीय संस्कृति में प्रकृति को पूजनीय माना गया है। जल, वायु, भूमि और वृक्षों के प्रति संवेदना हमारी परंपरा का हिस्सा है। इसी भावना के साथ गणपति विसर्जन के दौरान पर्यावरण की रक्षा का ध्यान रखा जाना चाहिए।
उन्होंने नागरिकों से प्रशासन द्वारा निर्धारित विसर्जन स्थलों का उपयोग करने की अपील की। साथ ही कहा कि प्लास्टिक, थर्मोकोल और अन्य अनुपयोगी सामग्री को जलस्रोतों में प्रवाहित न करें। उनके अनुसार, श्रद्धा के साथ जल को स्वच्छ रखने का संकल्प लेना भी भगवान गणेश के प्रति भक्ति व्यक्त करने का एक तरीका है।
विसर्जन यात्रा में अनुशासन पर भी जोर
सकल हिन्दू उत्सव समिति, सारंगपुर के अध्यक्ष डॉ. ध्रुव भल्ला ने कहा कि गणेशोत्सव सामाजिक एकता, धार्मिक श्रद्धा और सांस्कृतिक परंपरा का पर्व है। विसर्जन यात्राओं में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं। ऐसे में समितियों और नागरिकों को उत्साह के साथ व्यवस्था और स्वच्छता का भी ध्यान रखना चाहिए।
उन्होंने गणेशोत्सव समितियों से निर्धारित मार्गों का पालन करने और प्रतिमाओं को तय विसर्जन स्थलों पर ही ले जाने की अपील की। उन्होंने कहा कि पूजन सामग्री निर्धारित स्थान पर जमा की जाए और प्लास्टिक या अन्य कचरा जलस्रोतों में न डाला जाए। इससे विसर्जन यात्रा के बाद भी नगर और उसके आसपास के जलस्रोत स्वच्छ रखने में मदद मिलेगी।
नगर पालिका की व्यवस्थाओं में सहयोग की अपील
नगर पालिका सारंगपुर के अध्यक्ष पं. पंकज पालीवाल ने बताया कि गणपति विसर्जन के लिए आवश्यक व्यवस्थाओं पर ध्यान दिया जा रहा है। उनके अनुसार, विसर्जन स्थल पर स्वच्छता, जरूरी सुविधाओं और व्यवस्था बनाए रखने के लिए संबंधित अमले को दिशा-निर्देश दिए जा रहे हैं।
उन्होंने नागरिकों से नगर पालिका की व्यवस्था के अनुसार विसर्जन करने और पूजन सामग्री का उचित निस्तारण करने को कहा। पालीवाल ने अपील की कि प्लास्टिक और अन्य कचरा जल में न डालें। नगर को स्वच्छ रखना केवल नगर पालिका का काम नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक की साझा जिम्मेदारी है।
गणेशोत्सव समितियों, श्रद्धालुओं और स्थानीय संस्थाओं के सहयोग से पर्यावरण-अनुकूल विसर्जन की इस अपील को व्यवहार में उतारा जा सकता है। निर्धारित स्थल का उपयोग, पूजन सामग्री को अलग रखना और विसर्जन यात्रा के बाद सफाई का ध्यान रखना ऐसे कदम हैं जिन्हें हर श्रद्धालु अपना सकता है। सारंगपुर में इस बार बप्पा की विदाई के साथ “स्वच्छ जल, स्वच्छ नगर, सुरक्षित भविष्य” का संकल्प लेने की अपील की गई है।
