अनूपपुर खनिज दोहन विरोध को लेकर जिला कांग्रेस का बड़ा आंदोलन, रोजगार, पर्यावरण, विस्थापन और अवैध उत्खनन के खिलाफ कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा।
अनूपपुर खनिज दोहन विरोध: जनहित की आवाज़ बनी जिला कांग्रेस
अनूपपुर खनिज दोहन विरोध अब जिले का सबसे बड़ा जनमुद्दा बनता जा रहा है। जिला कांग्रेस कमेटी ने जल, जंगल, जमीन और खनिज संपदा के कथित अंधाधुंध दोहन के खिलाफ जिला स्तरीय बैठक आयोजित कर व्यापक आंदोलन की रणनीति बनाई तथा कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर स्थानीय हितों की रक्षा की मांग की।
यह मुद्दा केवल राजनीति का नहीं, बल्कि अस्तित्व, रोजगार, पर्यावरण और सामाजिक न्याय का सवाल बन चुका है।
जिला कांग्रेस बैठक और ज्ञापन सौंपते प्रतिनिधि
जिला स्तरीय बैठक में आंदोलन की रूपरेखा तय
जिला कांग्रेस कार्यालय अनूपपुर में आयोजित बैठक में तीन प्रमुख कार्यक्रम तय किए गए—
- 20 फरवरी: सभी ब्लॉकों में विरोध प्रदर्शन
- 21 फरवरी: वेंकटनगर में रेल रोको आंदोलन
- 24 फरवरी: भोपाल में विधानसभा घेराव
बैठक में नेताओं और कार्यकर्ताओं ने एक स्वर में कहा कि अनूपपुर खनिज दोहन विरोध अब जनांदोलन का रूप लेगा।
जल, जंगल, जमीन पर बाहरी कंपनियों का कब्ज़ा — स्थानीयों को लाभ नहीं
ज्ञापन में आरोप लगाया गया कि जिले की खनिज संपदा का उपयोग बड़ी कंपनियां कर रही हैं, लेकिन स्थानीय लोगों को—
- रोजगार नहीं
- पुनर्वास नहीं
- विकास नहीं
कोयला, रेत, पत्थर उत्खनन से कंपनियां मुनाफा कमा रही हैं, जबकि ग्रामीणों को धूल, प्रदूषण और टूटी सड़कें मिल रही हैं।
खनन गतिविधियों से प्रभावित क्षेत्र
रोजगार नहीं मिला, युवाओं का तेज़ पलायन
कांग्रेस ने आरोप लगाया कि जिले में उद्योग स्थापित होने के बावजूद—
- स्थानीय युवाओं को नौकरी नहीं
- बाहरी कर्मचारियों को प्राथमिकता
- मजदूरी में भेदभाव
युवाओं का रोज़गार के लिए अन्य जिलों और राज्यों की ओर पलायन जारी है।
यह स्थिति अनूपपुर खनिज दोहन विरोध का सबसे बड़ा कारण बनती जा रही है।
अवैध उत्खनन और नियमों की अनदेखी के आरोप
ज्ञापन में कहा गया—
- पर्यावरण नियमों की अनदेखी
- अवैध परिवहन
- मनमानी रेत खनन
- ग्रामीण सड़कों का भारी उपयोग
- प्रशासन की निष्क्रियता
माइनिंग विभाग पर मिलीभगत के गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
पर्यावरण संकट: धूल, राख और प्रदूषित हवा
पावर प्लांट से निकलने वाली राखड़ खुले क्षेत्रों में फेंके जाने से कई गांव प्रभावित बताए गए।
ग्रामीणों के अनुसार—
- हवा दूषित
- सांस की बीमारियां बढ़ीं
- खेतों की उत्पादकता प्रभावित
- सड़क दुर्घटनाएं बढ़ीं
पर्यावरणीय प्रभाव और ग्रामीण जीवन
किसानों और आदिवासियों के साथ अन्याय का आरोप
कांग्रेस नेताओं ने कहा—
- भूमि अधिग्रहण के बाद रोजगार नहीं
- मुआवजा अधूरा
- पुनर्वास नहीं
- गोचर और सार्वजनिक भूमि का औद्योगिक उपयोग
- ग्रामसभा की अनुमति के बिना निर्णय
इससे सामाजिक असंतोष बढ़ने की आशंका जताई गई है।
श्रमिकों के वेतन में भेदभाव का मुद्दा भी उठा
ज्ञापन में दावा किया गया कि स्थानीय श्रमिकों को बाहरी श्रमिकों से कम भुगतान किया जा रहा है।
- बाहरी ऑपरेटर: लगभग ₹1400 प्रतिदिन
- स्थानीय श्रमिक: लगभग ₹500 प्रतिदिन
इसे अनूपपुर खनिज दोहन विरोध का श्रमिक आयाम बताया गया।
खतरनाक ब्लास्टिंग और डेंजर ज़ोन में रह रहे लोग
राजनगर ओपन कास्ट माइंस में ब्लास्टिंग से—
- घरों में दरारें
- पत्थर उड़कर पहुंचना
- सुरक्षा खतरे
- पुनर्वास का अभाव
खनन सुरक्षा नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाया गया।
कांग्रेस की चेतावनी: समाधान नहीं तो उग्र आंदोलन
जिला कांग्रेस ने स्पष्ट कहा—
यदि समस्याओं का शीघ्र निराकरण नहीं हुआ तो:
- जिला मुख्यालय घेराव
- कंपनियों के कार्यालयों का घेराव
- धरना और जनआंदोलन
प्रशासन को ज्ञापन में चेतावनी दी गई कि स्थिति गंभीर जनसंघर्ष में बदल सकती है।
विकास बनाम अधिकार — सबसे बड़ा सवाल
अनूपपुर में विकास की तस्वीर बदलती दिख रही है, लेकिन स्थानीय लोगों का जीवन नहीं।
अनूपपुर खनिज दोहन विरोध अब केवल राजनीतिक मुद्दा नहीं, बल्कि यह प्रश्न है—
क्या प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग स्थानीय लोगों के जीवन सुधार के बिना विकास कहलाएगा?




