अनूपपुर के पुराने तहसील कार्यालय स्थित ईवीएम वेयरहाउस के भौतिक सत्यापन में 8 बैलेट यूनिट और 16 कंट्रोल यूनिट सहित 24 इकाइयां कम मिलीं। पुलिस ने अज्ञात के खिलाफ FIR दर्ज कर जांच शुरू की।
अनूपपुर में 24 ईवीएम मशीनें गायब, भौतिक सत्यापन में 8 बैलेट और 16 कंट्रोल यूनिट मिलीं कम
पुराने तहसील भवन से मशीनें स्थानांतरित करने के दौरान सामने आया मामला, अज्ञात के खिलाफ FIR दर्ज; पुलिस ने शुरू की जांच
संवाददाता – मदन मोहन मिश्रा
अनूपपुर। जिला मुख्यालय स्थित पुराने तहसील कार्यालय के पीछे बने ईवीएम वेयरहाउस में रखी निर्वाचन सामग्री के भौतिक सत्यापन के दौरान 24 ईवीएम इकाइयां कम मिलने का मामला सामने आया है। इनमें 8 बैलेट यूनिट (BU) और 16 कंट्रोल यूनिट (CU) शामिल बताई गई हैं। शिकायत मिलने के बाद अनूपपुर कोतवाली पुलिस ने अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
शिकायत के अनुसार 30 सितंबर को प्राथमिक विद्यालय सीतापुर के सहायक शिक्षक फूल सिंह, तहसीलदार अनूपपुर वेद प्रकाश सिंह तथा प्राथमिक विद्यालय बस्ती के सहायक शिक्षक संजय निगम कोतवाली पहुंचे और मामले की जानकारी दी। शिकायत के आधार पर पुलिस ने अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ बीएनएस की धारा 331(4) और 305(ए) के तहत प्रकरण दर्ज किया है।
भवन खाली कराने के दौरान सामने आया मामला
पुराना तहसील भवन क्षतिग्रस्त होने के कारण उसे डिसमेंटल करने की प्रक्रिया चल रही है। इसी के चलते पुराने परिसर में रखी ईवीएम इकाइयों को पॉलीटेक्निक महाविद्यालय परिसर में संचालित तहसील कार्यालय में स्थानांतरित किया जा रहा था।
शिकायत के मुताबिक पुराने तहसील कार्यालय के पीछे स्थित ईवीएम वेयरहाउस की दीवार क्षतिग्रस्त मिली थी। इसके बाद वहां रखी मशीनों की सुरक्षा और उपलब्ध संख्या को लेकर भौतिक सत्यापन कराया गया। इसी मिलान में रिकॉर्ड और मौके पर उपलब्ध इकाइयों की संख्या में अंतर सामने आया।
8 बैलेट और 16 कंट्रोल यूनिट का नहीं मिला मिलान
भौतिक सत्यापन में कुल 24 इकाइयां रिकॉर्ड के मुकाबले कम पाई गईं। इनमें 8 बैलेट यूनिट और 16 कंट्रोल यूनिट शामिल हैं। शिकायत में संबंधित मशीनों के सीरियल नंबर भी दर्ज कराए गए हैं। अब इन्हीं सीरियल नंबरों के आधार पर रिकॉर्ड, आवंटन और मशीनों की पूर्व आवाजाही की जानकारी की जांच की जा सकती है।
पुलिस जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि मशीनें वास्तव में चोरी हुई हैं या रिकॉर्ड और भौतिक उपलब्धता में अंतर का कोई अन्य कारण है।
2014 के पंचायत चुनाव से जुड़ा बताया गया रिकॉर्ड
शिकायत के अनुसार वर्ष 2014 में स्थानीय निर्वाचन यानी पंचायत चुनाव के लिए पुराने तहसील कार्यालय परिसर में बड़ी संख्या में ईवीएम रखी गई थीं। रिकॉर्ड में 620 कंट्रोल यूनिट और 1670 बैलेट यूनिट रखे जाने का उल्लेख बताया गया है।
लंबे समय तक इन्हें पुराने तहसील भवन के पीछे बने वेयरहाउस में रखा गया। भवन की स्थिति खराब होने के बाद निर्वाचन सामग्री को सुरक्षित स्थान पर स्थानांतरित करने की प्रक्रिया शुरू की गई।
वेयरहाउस की क्षतिग्रस्त दीवार से सुरक्षा पर उठे सवाल
शिकायत के अनुसार 16 मार्च को मशीनें हटाने से संबंधित कार्रवाई के दौरान वेयरहाउस के पीछे की दीवार क्षतिग्रस्त मिली थी। बाद में ईवीएम इकाइयों को पुराने परिसर से हटाकर पॉलीटेक्निक महाविद्यालय अनूपपुर में संचालित तहसील कार्यालय के भूतल स्थित कक्ष क्रमांक 6 में रखा गया।
बताया गया कि 21 सितंबर को मशीनें नए स्थान पर रखी गईं और 24 से 28 सितंबर 2026 के बीच भौतिक सत्यापन किया गया। इसी प्रक्रिया के दौरान रिकॉर्ड में दर्ज संख्या और उपलब्ध मशीनों की संख्या में अंतर पाया गया।
मामला सामने आने के बाद वेयरहाउस की पूर्व सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। जांच में यह पता लगाना महत्वपूर्ण होगा कि वेयरहाउस में प्रवेश-निकासी की क्या व्यवस्था थी, सुरक्षा की जिम्मेदारी किसके पास थी और मशीनों का अंतिम भौतिक सत्यापन कब किया गया था।
सीरियल नंबर से खंगाला जाएगा रिकॉर्ड
गायब बताई जा रही बैलेट और कंट्रोल यूनिट के सीरियल नंबर उपलब्ध होने के कारण जांच एजेंसी उनके पुराने रिकॉर्ड का मिलान कर सकती है। इससे यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि संबंधित इकाइयां अंतिम बार कब सत्यापित की गई थीं और किस रिकॉर्ड में उनकी मौजूदगी दर्ज है।
पुराने वेयरहाउस से संबंधित निरीक्षण रिपोर्ट, सुरक्षा दस्तावेज, स्टॉक रिकॉर्ड तथा स्थानांतरण प्रक्रिया से जुड़े दस्तावेज भी जांच के लिए महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
FIR के बाद जांच में सामने आएगा वास्तविक घटनाक्रम
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि 24 ईवीएम इकाइयां कब और किन परिस्थितियों में कम हुईं। साथ ही यह भी जांच का विषय है कि वेयरहाउस की दीवार क्षतिग्रस्त होने और भवन को डिसमेंटल करने की प्रक्रिया के बीच निर्वाचन सामग्री को सुरक्षित स्थान पर स्थानांतरित करने में क्या प्रक्रिया अपनाई गई।
पुलिस जांच और संबंधित विभागीय रिकॉर्ड के सत्यापन के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि मामला चोरी का है अथवा रिकॉर्ड और स्टॉक के बीच अंतर के पीछे कोई दूसरा कारण है।
कोतवाली निरीक्षक उमेश उपाध्याय ने बताया कि शिकायत मिलने और मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।
