80 वर्ष पुरानी परंपरा से अलग हुआ अन्नकूट आयोजन: नागदा में दो स्थानों पर महोत्सव
नागदा (जिला उज्जैन) — मप्र की धार्मिक-औद्योगिक नगरी नागदा में इस वर्ष श्रीनाथजी हवेली में आयोजित होने वाली परंपरागत गोवर्धन पूजा-अन्नकूट (“अन्नकूट महोत्सव”) कार्यक्रम में दो अलग-अलग स्थानों पर आयोजन हुआ है, जिससे करीब 80 वर्षों से क्रमशः चली आ रही एक-संध परंपरा में बेमेल विभाजन की स्थिति उभरी है।
मंगलवार को हवेली परिसर में मुख्य पुजारी पुष्पेंद्र त्रिवेदी ने बताया कि उनके पूर्वजों से लेकर वर्तमान तक मुखिया परिवार द्वारा निरंतर रूप से इस गोवर्धन पूजा एवं अन्नकूट आयोजन को संचालित किया जा रहा है। प्रमुख पुष्टिमार्गी वैष्णव परिवार — जैसे श्री गोविंदजी मोहता, श्री घनश्यामजी राठी, श्री बंसीलालजी राठी, श्री गोपालजी बाजाज, श्री बृजेशजी पंड्या, श्री विपिनजी मोहता — आदि वर्षों से इस हवेली-परंपरा से जुड़े रहे हैं और प्रत्येक वर्ष दीपावली के उपरांत गोवर्धन पूजा एवं अन्नकूट में योगदान देते रहे हैं।
मुख्य पुजारी पुष्पेंद्र त्रिवेदी ने स्पष्ट किया कि इस वर्ष हवेली के समीप स्थित धर्मशाला में एक “श्रीनाथ सेवा समिति” नामक समूह द्वारा अवैधिक सक्रियता से, हवेली के नाम से पृथक रूप से अन्नकूट आयोजन किया गया है। यह आयोजन पुष्टिमार्गीय वैष्णव परिषद एवं हवेली से कोई आधिकारिक संबंध नहीं रखता।
दो विभिन्न स्थलों पर आयोजनों के कारण नगरवासियों एवं श्रद्धालुओं में भ्रम की स्थिति उत्पन्न हुई। इसे ध्यान में रखते हुए मुख्य पुजारी ने सार्वजनिक रूप से यह स्पष्ट किया कि केवल हवेली परिसर में सम्पन्न हुआ अन्नकूट आयोजन ही अधिकृत, पिछले 80 वर्षों से चली आ रही परंपरा के अनुरूप संचालित आयोजन है।
परंपरा, विवाद और सुझाव
इस मामले की जड़ में यह है कि इतने वर्षों से स्थापित परंपरा — जिसमें हवेली परिसर में गोवर्धन पूजा एवं अन्नकूट महोत्सव आयोजन होता रहा — इस वर्ष अचानक एक अन्य स्थान पर अनाधिकृत आयोजन के साथ बदली है। मुख्य पुजारी के अनुसार, यह पहली बार हुआ है कि परंपरागत कार्यक्रम से हटकर किसी अन्य समूह ने ‘हवेली-संलग्न’ धर्मशाला में आयोजन किया। इस प्रकार, परंपरागत व्यवस्था, श्रद्धालुओं की विश्वास-मान्यता तथा आयोजन-समानता पर प्रश्नचिह्न लग गया है।
श्रद्धालुओं-नागरिकों के लिए यह स्पष्ट करना आवश्यक था कि उनके द्वारा मान्य एवं भरोसेमंद आयोजन-स्थान कौन-सा है। यह कदम इसलिए भी लिया गया क्योंकि भ्रम का माहौल था — कुछ लोग धर्मशाला में हुए आयोजन को हवेली से संबद्ध समझ बैठे थे।
मुख्य पुजारी ने सुझाव दिया है कि भविष्य में इस तरह की व्यवस्थाओं में पुनः एकरूपता एवं पारदर्शिता बनी रहनी चाहिए। समिति-समूहों के बीच संवाद स्थापित हो, आयोजन-स्थान एवं जिम्मेदारी स्पष्ट हो, ताकि मूल परंपरा का सम्मान बना रहे और पूछ-परख योग्य आयोजन ही हो।
श्रद्धालुओं के लिए जानकारी
– यदि आप इस वर्ष गोवर्धन पूजा पर अन्नकूट महोत्सव में भाग लेने आ रहे हैं, तो कृपया स्थान सुनिश्चित करें — हवेली परिसर में आयोजित कार्यक्रम ही अधिकृत माना गया है।
– धर्मशाला में हुए आयोजन से अलग रहें, यदि उसे हवेली से संबद्ध समझा गया है तो सावधानी अपनाएँ।
– परंपरागत रूप से अन्नकूट में विभिन्न व्यंजन तैयार होते हैं, जिसे पश्चात प्रतिपदा तिथि पर प्रसाद और भंडारे के रूप में वितरित किया जाता है। इस उत्सव-विवरण के बारे में विस्तृत जानकारी अन्य स्रोतों में मिलती है। Artarium+1
निष्कर्ष
नागदा में 80 वर्ष पुरानी परंपरा को मानते हुए इस वर्ष अन्नकूट आयोजन में विभाजन एक संवेदनशील मुद्दा बन गया है। धार्मिक आयोजन-स्थल और आयोजन-समिति की पहचान स्पष्ट होना जरूरी है, सर्वसाधारण की धार्मिक भावना और सहभागिता सुरक्षित बनी रह सके। जैसे कि मुख्य पुजारी पुष्पेंद्र त्रिवेदी ने कहा, “हवेली में ही वास्तविक परंपरागत आयोजन है” — इसलिए श्रद्धालुओं एवं नागरिकों को निर्देश दिया गया है कि वे उसी कार्यक्रम को मान्यता दें।
इस प्रकार, नागदा की धार्मिक-समुदाय में इस घटना ने ‘स्थापित परंपरा’ और ‘अनधिकृत आयोजन’ के बीच विभाजन को उजागर किया है, और यह स्पष्ट किया गया है कि भविष्य में ऐसी स्थिति पुनरावृत्ति न हो, इसके लिए संस्थागत संवाद एवं आयोजन-प्रबंधन की आवश्यकता है।
