—Advertisement—

अशोकनगर की ग्राम पंचायत आमखेड़ा सूखा में विकास कार्यों पर भ्रष्टाचार के आरोप: श्मशान, चारागाह और गौशाला निर्माण में अनियमितताओं का दावा, जांच की उठी मांग

Author Picture
Published On: 22 July 2026
Alleged irregularities in development works at Aamkheda Sukha Gram Panchayat in Ashoknagar, including crematorium, grazing land and gaushala construction projects
— Alleged irregularities in development works at Aamkheda Sukha Gram Panchayat in Ashoknagar, including crematorium, grazing land and gaushala construction projects

—Advertisement—

अशोकनगर की ग्राम पंचायत आमखेड़ा सूखा में विकास कार्यों पर भ्रष्टाचार के आरोप: श्मशान, चारागाह और गौशाला निर्माण में अनियमितताओं का दावा, जांच की उठी मांग

संवाददाता: राहुल जैन

मध्यप्रदेश सरकार ग्रामीण क्षेत्रों के विकास, आधारभूत सुविधाओं के विस्तार और पंचायतों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए हर वर्ष करोड़ों रुपये की विभिन्न योजनाएं संचालित करती है। इन योजनाओं का उद्देश्य गांवों में सड़क, श्मशान, गौशाला, पेयजल, चारागाह और अन्य सार्वजनिक सुविधाओं का विकास करना है, ताकि ग्रामीणों को बेहतर जीवन स्तर उपलब्ध कराया जा सके। हालांकि, कई बार इन योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के आरोप भी सामने आते रहे हैं।

ऐसा ही एक मामला अशोकनगर जनपद पंचायत की ग्राम पंचायत आमखेड़ा सूखा से सामने आया है, जहां पंचायत स्तर पर हुए विकास कार्यों को लेकर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। आरोप है कि श्मशान घाट के सौंदर्यीकरण, चारागाह विकास और गौशाला परिसर में निर्माण कार्यों के लिए स्वीकृत सरकारी राशि का उपयोग निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं किया गया। स्थानीय लोगों का दावा है कि कई कार्य या तो अधूरे हैं या उनकी गुणवत्ता बेहद खराब है, जबकि संबंधित मदों में राशि का भुगतान किया जा चुका है।

इन आरोपों के बाद पंचायत में हुए निर्माण कार्यों की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की जांच की मांग तेज हो गई है।

विकास कार्यों को लेकर ग्रामीणों ने उठाए सवाल

स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि ग्राम पंचायत में विकास कार्यों के नाम पर लाखों रुपये खर्च दिखाए गए, लेकिन धरातल पर अपेक्षित गुणवत्ता और कार्य दिखाई नहीं देते।

ग्रामीणों के अनुसार पंचायत क्षेत्र में कई ऐसे निर्माण कार्य हैं जिनकी स्थिति देखकर यह सवाल उठता है कि सरकारी धन का उपयोग निर्धारित उद्देश्य के अनुरूप हुआ भी या नहीं।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि संबंधित कार्यों की तकनीकी और वित्तीय जांच कराई जाए तो वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है।

श्मशान घाट के सौंदर्यीकरण में अनियमितता का आरोप

ग्रामीणों के अनुसार ग्राम पंचायत आमखेड़ा सूखा को पांचवें राज्य वित्त आयोग के अंतर्गत श्मशान घाट के सौंदर्यीकरण और बाउंड्री वॉल निर्माण के लिए राशि स्वीकृत हुई थी।

आरोप है कि स्वीकृत योजना के अनुसार पक्की बाउंड्री वॉल का निर्माण किए जाने के बजाय केवल तार फेंसिंग कर दी गई।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि योजना में बाउंड्री वॉल स्वीकृत थी, तो वास्तविक निर्माण कार्य योजना के अनुरूप क्यों नहीं किया गया।

उनका यह भी आरोप है कि कार्य पूर्ण होने से पहले ही भुगतान की प्रक्रिया पूरी कर ली गई।

यदि ये आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह सरकारी धन के उपयोग और निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है।

चारागाह विकास योजना पर भी उठे सवाल

ग्राम पंचायत क्षेत्र में मवेशियों के लिए चारागाह विकसित करने के उद्देश्य से भी सरकारी राशि स्वीकृत की गई थी।

ग्रामीणों का आरोप है कि चारागाह सुधार के नाम पर स्वीकृत राशि खर्च तो दिखाई गई, लेकिन मौके पर अपेक्षित विकास कार्य नजर नहीं आते।

उनका कहना है कि यदि चारागाह विकास के लिए धन स्वीकृत हुआ था, तो वहां वास्तविक रूप से कौन-कौन से कार्य किए गए, इसकी सार्वजनिक जानकारी दी जानी चाहिए।

ग्रामीणों ने इस पूरे मामले की तकनीकी जांच कराने की मांग की है।

गौशाला परिसर में निर्माण गुणवत्ता पर सवाल

गौशाला परिसर में सीसी रोड और फर्शीकरण का कार्य भी पंचायत के विकास कार्यों में शामिल बताया गया है।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि निर्माण कार्य में निम्न गुणवत्ता की सामग्री का उपयोग किया गया, जिसके कारण कुछ ही समय में सीसी सड़क उखड़ने लगी।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि निर्माण कार्य मानकों के अनुरूप हुआ होता, तो इतनी जल्दी उसकी गुणवत्ता प्रभावित नहीं होती।

उन्होंने मांग की है कि निर्माण सामग्री की गुणवत्ता और तकनीकी परीक्षण कराया जाए ताकि वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके।

पंचायत प्रतिनिधियों पर लगे आरोप

स्थानीय लोगों ने पंचायत के सरपंच और सचिव पर विकास कार्यों में अनियमितता बरतने के आरोप लगाए हैं।

हालांकि, इस संबंध में संबंधित जनप्रतिनिधियों का पक्ष सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आया है।

पत्रकारिता के सिद्धांतों के अनुसार किसी भी आरोप की पुष्टि सक्षम जांच एजेंसी द्वारा की जानी आवश्यक होती है। इसलिए मामले में अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

इंजीनियर और तकनीकी अमले की भूमिका पर भी सवाल

ग्रामीणों का कहना है कि किसी भी सरकारी निर्माण कार्य में तकनीकी स्वीकृति, स्थल निरीक्षण और कार्य पूर्णता प्रमाण-पत्र देने की जिम्मेदारी संबंधित उपयंत्री (सब-इंजीनियर) और तकनीकी अमले की होती है।

इसी कारण स्थानीय लोगों ने यह सवाल उठाया है कि—

  • क्या निर्माण कार्यों का नियमित निरीक्षण किया गया?
  • क्या तकनीकी मानकों के अनुसार कार्य पूर्ण होने की पुष्टि की गई?
  • यदि कार्य गुणवत्ता के अनुरूप नहीं थे तो भुगतान कैसे जारी हुआ?
  • क्या निर्माण कार्यों का भौतिक सत्यापन किया गया था?

ग्रामीणों का कहना है कि इन सभी बिंदुओं की निष्पक्ष जांच होना आवश्यक है।

WhatsApp Image 2026 07 22 at 2.39.31 PM
जनपद स्तर पर निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल

पंचायत स्तर के विकास कार्यों की निगरानी केवल ग्राम पंचायत तक सीमित नहीं रहती, बल्कि जनपद पंचायत स्तर पर भी संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी होती है।

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि समय-समय पर निरीक्षण होता तो कथित अनियमितताओं को शुरुआती स्तर पर ही रोका जा सकता था।

उन्होंने मांग की है कि पंचायत से लेकर जनपद स्तर तक पूरी कार्यप्रणाली की जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए।

ग्रामीणों की प्रमुख मांगें

ग्राम पंचायत आमखेड़ा सूखा के ग्रामीणों ने प्रशासन से कई मांगें रखी हैं।

इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं—

  • श्मशान घाट निर्माण कार्य की तकनीकी जांच।
  • बाउंड्री वॉल निर्माण की स्वीकृति और वास्तविक कार्य का मिलान।
  • चारागाह विकास योजना का भौतिक सत्यापन।
  • गौशाला परिसर में निर्माण सामग्री की गुणवत्ता जांच।
  • भुगतान संबंधी दस्तावेजों का ऑडिट।
  • संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों की भूमिका की जांच।
  • दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई।

पंचायत विकास योजनाओं में पारदर्शिता की जरूरत

विशेषज्ञों का मानना है कि पंचायत स्तर पर विकास कार्यों में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए डिजिटल मॉनिटरिंग, जियो-टैगिंग, कार्यों की ऑनलाइन फोटो अपलोडिंग और सोशल ऑडिट जैसी व्यवस्थाओं को प्रभावी बनाया जाना चाहिए।

यदि प्रत्येक निर्माण कार्य की प्रगति सार्वजनिक पोर्टल पर उपलब्ध हो तो ग्रामीण भी उसकी निगरानी कर सकते हैं और अनियमितताओं की संभावना कम हो सकती है।

प्रशासनिक जांच से ही सामने आएगी सच्चाई

फिलहाल ग्राम पंचायत आमखेड़ा सूखा में हुए विकास कार्यों को लेकर लगाए गए आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

मामले में संबंधित विभाग द्वारा जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि आरोप सही हैं या नहीं।

यदि जांच में अनियमितताएं पाई जाती हैं, तो संबंधित अधिकारियों, कर्मचारियों और जनप्रतिनिधियों के विरुद्ध नियमों के अनुसार कार्रवाई की जा सकती है।

वहीं यदि आरोप निराधार साबित होते हैं, तो संबंधित पक्ष अपना पक्ष सार्वजनिक रूप से रख सकते हैं।

निष्कर्ष

अशोकनगर जिले की ग्राम पंचायत आमखेड़ा सूखा में विकास कार्यों को लेकर लगाए गए आरोपों ने पंचायत स्तर पर सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन और निगरानी व्यवस्था पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। श्मशान घाट, चारागाह और गौशाला परिसर में हुए निर्माण कार्यों की गुणवत्ता तथा स्वीकृत राशि के उपयोग को लेकर ग्रामीणों ने निष्पक्ष जांच की मांग की है। अब सभी की निगाहें प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हैं। निष्पक्ष तकनीकी और वित्तीय जांच ही यह तय करेगी कि आरोपों में कितनी सच्चाई है और यदि किसी स्तर पर अनियमितता हुई है तो उसके लिए कौन जिम्मेदार है।

Related News
Breaking News हमेशा आपके पास

SwarajVani App Install करें

Latest India News & Breaking Updates — सीधे Home Screen पर

Offline पढ़ें Breaking Alerts बिल्कुल Free
SwarajVani को iPhone पर install करें:
📤 Share बटन दबाएं → "Add to Home Screen" select करें
Home
Web Stories
Instagram
WhatsApp