—Advertisement—

अखिल भारतीय विद्वत परिषद ने किया सम्मानित, सुधासागर जी बने ‘श्रमण शिरोमणि’

Author Picture
Published On: 29 September 2025
WhatsApp Image 2025 09 29 at 9.30.53 PM 1

—Advertisement—

श्रमण शिरोमणि उपाधि से अलंकृत हुए जगतपूज्य मुनि श्री सुधासागर जी महाराज

राजेश जैन ‘दद्दू’, इंदौर।
जन-जन के आराध्य, श्रमण संस्कृति के गौरव, महामहिम परम पूज्य गुरूदेव, संत शिरोमणि आचार्य श्री 108 विद्यासागर जी महाराज के परम प्रिय शिष्य एवं आज्ञाकारी प्रभावक, जगतपूज्य मुनि श्री 108 सुधासागर जी महाराज को सोमवार, 29 सितंबर 2025 को अशोकनगर में आयोजित वृहत राष्ट्रीय विद्वत संगोष्ठी में “श्रमण शिरोमणि” की अलंकरण उपाधि से विभूषित किया गया।

इस संगोष्ठी का आयोजन अखिल भारतीय विद्वत परिषद के तत्वावधान में हुआ, जिसमें देशभर से आए 80 से अधिक विद्वान एवं विदुषियों ने सर्वसम्मति से यह सम्मान मुनिश्री को अर्पित किया।

गुरुदेव का विनम्र उत्तर

अलंकरण के इस अवसर पर जब विद्वानों ने उन्हें “श्रमण शिरोमणि” की उपाधि से विभूषित किया, तब परम पूज्य मुनिश्री सुधासागर जी ने अत्यंत विनम्रता से कहा—
“श्रमण का पद तो मैं स्वीकार कर लेता हूँ, किंतु ‘शिरोमणि’ आप अपने पास ही रख लीजिए। मेरे लिए सबसे बड़ा गौरव यही है कि मैं अपने गुरुदेव आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के चरणों की धूल हूँ।”

WhatsApp Image 2025 09 29 at 9.30.54 PM

समाज को दिया मंगल संदेश

हजारों श्रद्धालुओं और समाजजनों को संबोधित करते हुए पूज्य मुनिश्री ने कहा—
“मेरे गुरुदेव, संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज ने मुझे सन 1983 में मुनि पद पर प्रतिष्ठित किया था। यही मेरे जीवन का सबसे बड़ा पद है। इससे बड़ा पद इस संसार में कोई नहीं, और मुझे किसी अन्य पद की चाह भी नहीं।”

मुनिश्री के इन शब्दों ने उपस्थित जनसमूह को भावविभोर कर दिया।

साधना और निस्पृहता की अद्भुत मिसाल

मुनि श्री सुधासागर जी महाराज का जीवन सादगी, तप, त्याग और साधना की सर्वोच्च ऊँचाइयों का प्रतीक माना जाता है। वे आचार्य विद्यासागर जी महाराज की परंपरा में चलते हुए निरंतर समाज के कल्याण और धर्म के प्रचार-प्रसार के लिए समर्पित हैं।

अखिल भारतीय विद्वत परिषद द्वारा प्रदत्त यह “श्रमण शिरोमणि” अलंकरण न केवल उनके तपस्वी जीवन की मान्यता है, बल्कि संपूर्ण जैन समाज के लिए गौरव का विषय भी है।

धन्य हैं ऐसे संत, जो स्वयं को किसी भी उपाधि से बड़ा मानने के बजाय सदैव अपने गुरुदेव आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज की शरण में रहना ही अपनी सबसे बड़ी उपलब्धि मानते हैं।

Related News
Breaking News हमेशा आपके पास

SwarajVani App Install करें

Latest India News & Breaking Updates — सीधे Home Screen पर

Offline पढ़ें Breaking Alerts बिल्कुल Free
SwarajVani को iPhone पर install करें:
📤 Share बटन दबाएं → "Add to Home Screen" select करें
Home
Web Stories
Instagram
WhatsApp