प्रवासी आदिवासी श्रमिकों की सुरक्षा को लेकर जोबट विधायक सेना महेश पटेल ने उठाई आवाज
प्रधानमंत्री और केंद्रीय श्रम मंत्री को पत्र भेजकर विशेष हेल्पलाइन, श्रमिक पंजीयन और त्वरित सूचना व्यवस्था की मांग
दैनिक स्वराज वाणी रिपोर्टर | अलीराजपुर | खलील मंसूरी
Alirajpur । आदिवासी बहुल अलीराजपुर सहित झाबुआ, बड़वानी और धार जिलों से रोजगार की तलाश में गुजरात, महाराष्ट्र सहित देश के अन्य राज्यों में मजदूरी के लिए पलायन करने वाले श्रमिकों की सुरक्षा का मुद्दा अब प्रमुखता से उठाया गया है। जोबट विधायक सेना महेश पटेल ने प्रवासी आदिवासी श्रमिकों की सुरक्षा, उनके अधिकारों के संरक्षण और संकट की स्थिति में उनके परिवारों तक तत्काल सूचना पहुंचाने के लिए केंद्र सरकार से विशेष व्यवस्था किए जाने की मांग की है।
विधायक सेना महेश पटेल ने इस संबंध में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया को पत्र भेजा है। पत्र के माध्यम से उन्होंने सरकार का ध्यान आदिवासी अंचलों से बड़ी संख्या में होने वाले मजदूरों के पलायन और दूसरे राज्यों में काम करने के दौरान सामने आने वाली समस्याओं की ओर आकर्षित किया है।
विधायक ने मांग की है कि दूसरे राज्यों में रोजगार के लिए जाने वाले श्रमिकों के लिए ऐसी प्रभावी व्यवस्था बनाई जाए, जिससे उनकी पहचान, उनके परिवार की संपर्क जानकारी और उनके कार्यस्थल से जुड़ी आवश्यक जानकारी प्रशासन के पास उपलब्ध रहे। साथ ही किसी दुर्घटना, मृत्यु अथवा अन्य अप्रिय घटना की स्थिति में संबंधित श्रमिक के परिवार को बिना देरी के सूचना और आवश्यक सहायता मिल सके।
रोजगार के लिए बड़ी संख्या में होता है श्रमिकों का पलायन
आदिवासी बहुल अलीराजपुर जिले सहित आसपास के जिलों में रोजगार के सीमित अवसरों के कारण बड़ी संख्या में श्रमिक मजदूरी की तलाश में दूसरे राज्यों का रुख करते हैं। विशेषकर गुजरात और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में निर्माण कार्य, कृषि, औद्योगिक इकाइयों तथा अन्य क्षेत्रों में मजदूरी करने के लिए श्रमिक परिवारों के साथ अथवा समूहों में पलायन करते हैं।
विधायक सेना महेश पटेल ने अपने पत्र में उल्लेख किया है कि अलीराजपुर, झाबुआ, बड़वानी और धार जैसे आदिवासी बहुल जिलों से बड़ी संख्या में श्रमिक रोजगार की तलाश में अन्य राज्यों में जाते हैं। इन श्रमिकों के लिए दूसरे राज्यों में जाकर काम करना कई बार मजबूरी होती है, क्योंकि स्थानीय स्तर पर पर्याप्त रोजगार उपलब्ध नहीं होने के कारण उन्हें परिवार की आजीविका चलाने के लिए घर से दूर जाना पड़ता है।
रोजगार के लिए घर से दूर जाने वाले इन श्रमिकों की सुरक्षा और उनके अधिकारों की रक्षा एक महत्वपूर्ण विषय है। दूसरे राज्य में रहने के दौरान भाषा, प्रशासनिक व्यवस्था और स्थानीय परिस्थितियों से पूरी तरह परिचित नहीं होने के कारण कई बार श्रमिकों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
दुर्घटना और अप्रिय घटनाओं को लेकर चिंता
विधायक ने केंद्र सरकार को भेजे पत्र में प्रवासी श्रमिकों के साथ होने वाली दुर्घटनाओं और अन्य अप्रिय घटनाओं को लेकर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि दूसरे राज्यों में काम करने के दौरान कई बार श्रमिक दुर्घटनाओं का शिकार हो जाते हैं। इसके अलावा मारपीट, प्रताड़ना और अन्य प्रकार की अप्रिय घटनाओं की शिकायतें भी सामने आती रहती हैं।
दूसरे राज्य में काम करने वाले श्रमिकों के सामने सबसे बड़ी समस्या उस समय उत्पन्न होती है, जब उनके साथ कोई गंभीर घटना हो जाती है। यदि श्रमिक के साथ दुर्घटना हो जाए अथवा उसकी मृत्यु हो जाए, तो कई बार उसके परिवार को घटना की जानकारी तत्काल नहीं मिल पाती।
ऐसी परिस्थितियों में परिवार के लोग अपने परिजन से संपर्क करने के लिए परेशान होते रहते हैं। कई बार उन्हें लंबे समय तक यह जानकारी नहीं मिल पाती कि उनका परिजन किस स्थिति में है और वह कहां है। सूचना मिलने में होने वाली देरी से परिवार को मानसिक परेशानी के साथ-साथ आर्थिक संकट का भी सामना करना पड़ता है।
परिवार को समय पर सूचना मिलना सबसे जरूरी
विधायक सेना महेश पटेल ने विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया है कि किसी प्रवासी श्रमिक के साथ दुर्घटना अथवा मृत्यु जैसी स्थिति उत्पन्न होने पर उसके परिवार को तत्काल सूचना उपलब्ध कराना सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
आमतौर पर श्रमिक अपने परिवार से दूर दूसरे राज्य में काम करता है। ऐसे में परिवार के पास उसके कार्यस्थल, ठेकेदार, नियोक्ता या स्थानीय संपर्क की पर्याप्त जानकारी नहीं होती। किसी आपात स्थिति में यही जानकारी परिवार के लिए सबसे महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।
विधायक ने केंद्र सरकार से मांग की है कि श्रमिकों के पंजीयन के दौरान उनके परिवार के कम से कम एक या अधिक जिम्मेदार सदस्यों की संपर्क जानकारी दर्ज की जाए। इसके साथ ही श्रमिक जिस राज्य और क्षेत्र में काम करने जा रहा है, उसकी आवश्यक जानकारी भी संबंधित रिकॉर्ड में सुरक्षित रखी जाए।
इस व्यवस्था से किसी अप्रिय घटना की स्थिति में प्रशासन के लिए संबंधित श्रमिक के परिवार तक पहुंचना आसान हो सकेगा।
विशेष हेल्पलाइन नंबर जारी करने की मांग
विधायक ने केंद्र सरकार के समक्ष विशेष हेल्पलाइन नंबर जारी करने की मांग भी रखी है। उनका कहना है कि प्रवासी श्रमिकों और उनके परिवारों के लिए ऐसी हेल्पलाइन होनी चाहिए, जहां दुर्घटना, मृत्यु, प्रताड़ना, मजदूरी संबंधी विवाद अथवा किसी अन्य गंभीर समस्या की स्थिति में तत्काल संपर्क किया जा सके।
हेल्पलाइन व्यवस्था केवल शिकायत दर्ज करने तक सीमित न रहे, बल्कि उसे संबंधित राज्य और जिले के प्रशासन से जोड़ा जाए, ताकि शिकायत या सूचना मिलने के बाद त्वरित कार्रवाई की जा सके।
यदि किसी श्रमिक के साथ दूसरे राज्य में दुर्घटना होती है, तो हेल्पलाइन के माध्यम से उसके गृह जिले और परिवार तक तत्काल जानकारी पहुंचाई जा सके। इससे परिवार को अनिश्चितता और परेशानियों से राहत मिल सकती है।
विधायक ने यह भी मांग की है कि हेल्पलाइन की जानकारी श्रमिकों और उनके परिवारों तक व्यापक रूप से पहुंचाई जाए, ताकि जरूरत पड़ने पर वे उसका उपयोग कर सकें।

श्रमिकों के पंजीयन की हो प्रभावी व्यवस्था
सेना महेश पटेल ने दूसरे राज्यों में मजदूरी के लिए जाने वाले श्रमिकों के आवश्यक पंजीयन की व्यवस्था किए जाने पर भी जोर दिया है। उनका कहना है कि यदि प्रवासी श्रमिकों का व्यवस्थित रिकॉर्ड उपलब्ध हो, तो किसी संकट की स्थिति में प्रशासन को उनकी पहचान करने और उनके परिवार से संपर्क करने में आसानी होगी।
पंजीयन में श्रमिक का नाम, मूल निवास, परिवार के सदस्यों की जानकारी, संपर्क नंबर और वह जिस राज्य या क्षेत्र में काम करने जा रहा है, जैसी आवश्यक जानकारियां दर्ज की जा सकती हैं।
इस तरह की व्यवस्था से न केवल दुर्घटना या मृत्यु के मामलों में परिवार को तत्काल सूचना दी जा सकेगी, बल्कि जरूरत पड़ने पर प्रशासनिक और कानूनी सहायता उपलब्ध कराने में भी मदद मिलेगी।
मजदूरी नहीं मिलने और अमानवीय व्यवहार का भी मुद्दा
विधायक ने अपने पत्र में प्रवासी श्रमिकों के सामने आने वाली मजदूरी संबंधी समस्याओं का भी उल्लेख किया है। उन्होंने कहा कि कई मामलों में ठेकेदारों द्वारा श्रमिकों को उनकी मेहनत की मजदूरी का समय पर भुगतान नहीं किए जाने की शिकायतें सामने आती हैं।
घर से दूर दूसरे राज्य में काम करने वाले श्रमिकों के लिए मजदूरी ही परिवार की आय का प्रमुख साधन होती है। ऐसे में मजदूरी का भुगतान नहीं होना उनके परिवार की आर्थिक स्थिति को सीधे प्रभावित करता है।
इसके अलावा कुछ मामलों में श्रमिकों के साथ अमानवीय व्यवहार किए जाने की शिकायतें भी सामने आती हैं। ऐसी परिस्थितियों में श्रमिकों को अपनी समस्या लेकर स्थानीय स्तर पर शिकायत करने में कठिनाई हो सकती है। भाषा, जानकारी और प्रशासनिक प्रक्रियाओं की कमी भी उनके लिए परेशानी का कारण बन सकती है।
विधायक ने केंद्र सरकार से ऐसी प्रभावी व्यवस्था विकसित करने की मांग की है, जिससे श्रमिकों के अधिकारों का संरक्षण हो और उन्हें किसी भी प्रकार की प्रताड़ना का सामना न करना पड़े।
संकट के समय परिवार को मिले प्रशासनिक सहयोग
सेना महेश पटेल ने इस बात पर भी जोर दिया है कि केवल सूचना उपलब्ध कराना पर्याप्त नहीं है, बल्कि संकट की स्थिति में श्रमिक के परिवार को आवश्यक प्रशासनिक सहयोग भी मिलना चाहिए।
यदि किसी श्रमिक के साथ गंभीर दुर्घटना होती है या उसकी मृत्यु हो जाती है, तो परिवार को संबंधित प्रक्रिया, आवश्यक दस्तावेज, सहायता और अन्य प्रशासनिक औपचारिकताओं के लिए मार्गदर्शन की आवश्यकता होती है।
ऐसे मामलों में गृह जिले का प्रशासन संबंधित परिवार के साथ समन्वय कर सके, ऐसी व्यवस्था विकसित की जानी चाहिए। इससे दूरदराज के आदिवासी क्षेत्रों में रहने वाले परिवारों को सहायता प्राप्त करने में सुविधा होगी।
आदिवासी श्रमिकों की सुरक्षा सरकार की प्राथमिकता बने
विधायक सेना महेश पटेल ने कहा कि रोजगार की तलाश में घर से दूर जाने वाले आदिवासी श्रमिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है। आर्थिक मजबूरी के कारण श्रमिक दूसरे राज्यों में जाते हैं और ऐसे में सरकार की जिम्मेदारी है कि उनके अधिकारों और सुरक्षा के लिए प्रभावी व्यवस्था उपलब्ध कराई जाए।
उन्होंने कहा कि श्रमिकों को यह भरोसा होना चाहिए कि संकट की स्थिति में सरकार और प्रशासन उनके साथ खड़ा है। इसी तरह उनके परिवारों को भी यह विश्वास होना चाहिए कि दूसरे राज्य में काम करने गए उनके परिजन के साथ यदि कोई अप्रिय घटना होती है, तो उन्हें तत्काल जानकारी और आवश्यक मदद उपलब्ध होगी।
केंद्र सरकार से ठोस पहल की उम्मीद
प्रधानमंत्री और केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री को पत्र भेजकर विधायक ने इस मुद्दे को केंद्र सरकार के समक्ष रखा है। अब देखना होगा कि प्रवासी श्रमिकों की सुरक्षा और उनके परिवारों तक त्वरित सूचना पहुंचाने के लिए केंद्र सरकार किस प्रकार की व्यवस्था विकसित करती है।
अलीराजपुर सहित आदिवासी बहुल क्षेत्रों से हर वर्ष बड़ी संख्या में श्रमिक रोजगार की तलाश में दूसरे राज्यों में जाते हैं। ऐसे में इस वर्ग के लिए सुरक्षित और व्यवस्थित प्रवासन व्यवस्था की आवश्यकता लगातार महसूस की जा रही है।
विशेष हेल्पलाइन, श्रमिक पंजीयन, परिवार की संपर्क जानकारी का रिकॉर्ड, दुर्घटना या मृत्यु की स्थिति में तत्काल सूचना और आवश्यक प्रशासनिक सहायता जैसी व्यवस्थाएं प्रवासी श्रमिकों और उनके परिवारों के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकती हैं।
विधायक सेना महेश पटेल की मांग का मूल उद्देश्य यही है कि रोजगार की तलाश में घर से दूर जाने वाला कोई भी श्रमिक संकट की स्थिति में व्यवस्था से पूरी तरह कट न जाए और उसके परिवार को किसी अनहोनी की जानकारी पाने के लिए लंबे समय तक भटकना न पड़े।
उनकी मांग है कि केंद्र सरकार इस विषय को गंभीरता से लेते हुए प्रवासी आदिवासी श्रमिकों की सुरक्षा के लिए ठोस, प्रभावी और जवाबदेह व्यवस्था लागू करे, ताकि रोजगार के लिए पलायन करने वाले श्रमिकों को सुरक्षा का भरोसा मिल सके और उनके परिवार भी संकट की घड़ी में समय पर सहायता प्राप्त कर सकें।
