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गांव किलोड़िया मुक्तिधाम परिसर में 50 पौधों का पौधारोपण, पर्यावरण संरक्षण का दिया प्रेरक संदेश

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Published On: 27 July 2026
Akhil Bharatiya Kshatriya Mahasabha members and villagers planting 50 saplings at Kilodiya Moksh Dham in Nagda to promote environmental conservation, along with installing water bowls for birds
— Akhil Bharatiya Kshatriya Mahasabha members and villagers planting 50 saplings at Kilodiya Moksh Dham in Nagda to promote environmental conservation, along with installing water bowls for birds

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गांव किलोड़िया मुक्तिधाम परिसर में 50 पौधों का पौधारोपण, पर्यावरण संरक्षण का दिया प्रेरक संदेश

अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा एवं स्थानीय जनप्रतिनिधियों की पहल से हरित अभियान को मिली नई ऊर्जा

रिपोर्ट: जीवनलाल जैन
नागदा/खाचरौद।
पर्यावरण संरक्षण को जनआंदोलन का स्वरूप देने और प्रकृति के प्रति सामाजिक जिम्मेदारी का संदेश फैलाने के उद्देश्य से ग्राम किलोड़िया के मुक्तिधाम परिसर में रविवार को एक प्रेरणादायी पौधारोपण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस अवसर पर अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा, नागदा-खाचरौद इकाई के तत्वावधान में मुक्तिधाम परिसर में 50 छायादार एवं फलदार पौधों का रोपण किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य केवल पौधे लगाना ही नहीं, बल्कि उनके संरक्षण और पर्यावरण के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ाना भी रहा।

इस अभियान में समाज के विभिन्न वर्गों के लोगों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया और यह संदेश दिया कि यदि प्रत्येक नागरिक वर्ष में कम से कम एक पौधा लगाकर उसकी देखभाल करने का संकल्प ले, तो आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ, सुरक्षित और हरित वातावरण प्रदान किया जा सकता है।

राष्ट्रीय अध्यक्ष ठाकुर भेरू सिंह चौहान के नेतृत्व में हुआ पौधारोपण

कार्यक्रम का नेतृत्व अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ठाकुर भेरू सिंह चौहान ने किया। उनके साथ भाजपा पिछड़ा मोर्चा मंडल अध्यक्ष लखन गुर्जर, विनोद गुर्जर सहित अनेक सामाजिक कार्यकर्ता एवं ग्रामीणजन उपस्थित रहे।

सभी अतिथियों ने मुक्तिधाम परिसर में विभिन्न प्रजातियों के पौधे रोपे तथा प्रत्येक पौधे की नियमित देखभाल एवं सुरक्षा का संकल्प लिया। कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण आज केवल एक विकल्प नहीं, बल्कि मानव जीवन की सबसे बड़ी आवश्यकता बन चुका है।

उन्होंने कहा कि लगातार बढ़ते प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन, भूजल स्तर में गिरावट और बढ़ते तापमान जैसी समस्याओं का सबसे प्रभावी समाधान व्यापक स्तर पर वृक्षारोपण ही है। यदि प्रत्येक व्यक्ति अपनी जिम्मेदारी समझते हुए पौधे लगाए और उनकी देखभाल करे, तो आने वाले वर्षों में पर्यावरण संतुलन को काफी हद तक सुधारा जा सकता है।

मुक्तिधाम परिसर को हरित एवं सुंदर बनाने का लिया संकल्प

कार्यक्रम के दौरान मुक्तिधाम परिसर को हराभरा एवं स्वच्छ बनाने का विशेष संकल्प लिया गया। आयोजकों ने बताया कि मुक्तिधाम जैसे स्थान केवल अंतिम संस्कार स्थल ही नहीं होते, बल्कि ये समाज की आस्था और संवेदनाओं से जुड़े महत्वपूर्ण स्थान हैं। ऐसे स्थानों पर अधिक से अधिक पौधे लगाए जाने चाहिए ताकि वहां आने वाले लोगों को स्वच्छ वातावरण मिल सके।

कार्यक्रम में लगाए गए पौधों की नियमित सिंचाई, सुरक्षा और देखरेख की जिम्मेदारी स्थानीय समिति एवं ग्रामीणों द्वारा सामूहिक रूप से निभाई जाएगी।

पक्षियों के लिए लगाए गए जलपात्र

गर्मी के मौसम में पक्षियों को पानी उपलब्ध कराने की भावना से मुक्तिधाम परिसर एवं समीप स्थित शिव मंदिर परिसर में पक्षियों के लिए जलपात्र भी स्थापित किए गए।

आयोजकों ने कहा कि बढ़ती गर्मी और शहरीकरण के कारण पक्षियों को पानी एवं भोजन मिलने में कठिनाई होती है। ऐसे में यदि प्रत्येक व्यक्ति अपने घर, मंदिर, सार्वजनिक स्थानों या खेतों में जलपात्र रखे, तो हजारों पक्षियों का जीवन बचाया जा सकता है।

इस पहल की उपस्थित लोगों ने सराहना की और भविष्य में भी ऐसे कार्य निरंतर जारी रखने का संकल्प लिया।

पर्यावरण संरक्षण को लेकर दिलाई गई शपथ

पौधारोपण के बाद उपस्थित सभी लोगों ने सामूहिक रूप से पर्यावरण संरक्षण की शपथ ली। सभी ने यह संकल्प लिया कि—

  • लगाए गए पौधों की नियमित देखभाल करेंगे।
  • अनावश्यक रूप से पेड़ों की कटाई नहीं होने देंगे।
  • अपने आसपास अधिक से अधिक पौधे लगाने के लिए लोगों को प्रेरित करेंगे।
  • जल संरक्षण एवं स्वच्छता के प्रति समाज को जागरूक करेंगे।
  • पर्यावरण संतुलन बनाए रखने के लिए हर संभव प्रयास करेंगे।

वक्ताओं ने कहा कि केवल पौधे लगाने से पर्यावरण संरक्षण का उद्देश्य पूरा नहीं होता, बल्कि उनकी नियमित देखभाल और संरक्षण भी उतना ही आवश्यक है।

श्मशान घाट समिति के सदस्यों का किया गया सम्मान

कार्यक्रम के दौरान अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा की ओर से मुक्तिधाम एवं श्मशान घाट समिति के सदस्यों का दुपट्टा पहनाकर सम्मान किया गया।

महासभा के पदाधिकारियों ने कहा कि समाजहित एवं जनसेवा के कार्यों में सक्रिय लोगों का सम्मान करना समाज को सकारात्मक दिशा देता है। सम्मानित सदस्यों ने भी भविष्य में पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक सेवा के कार्यों में निरंतर सहयोग देने का विश्वास व्यक्त किया।

बड़ी संख्या में ग्रामीणों की रही सहभागिता

कार्यक्रम में गांव के अनेक सामाजिक, धार्मिक एवं राजनीतिक कार्यकर्ताओं सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।

इस अवसर पर जीवन सिंह तंवर, राजेंद्र सिंह झाला, सौरवी भदोरिया, बजरंग सिंह चौहान, देवेंद्र कुमार नागर, लक्ष्मण सिंह डोडिया, खुशपाल सिंह डोडिया, जितेन्द्र सिंह सौलंकी, भूपेंद्र सिंह, के.पी. सिंह, भारत शर्मा, समरथ परमार, जगदीशलाल टेलर, दिनेश चावड़ा, ईश्वर गुर्जर, मुकेश सेन, दिनेश सेन, दशरथ चौधरी, भैरूसिंह गुर्जर, बलवंत सिंह गुर्जर, भारतसिंह गुर्जर, दूल्हेसिंह चौधरी, मंगूसिंह गुर्जर, परमानंद टेलर, कमलेश सोलंकी तथा ग्राम पंचायत सचिव कन्हैयालाल गहलोत सहित बड़ी संख्या में ग्रामीणजन मौजूद रहे।

सभी उपस्थित लोगों ने पर्यावरण संरक्षण को जनभागीदारी का अभियान बनाने पर बल दिया।

वृक्षारोपण क्यों है आज की सबसे बड़ी आवश्यकता

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विशेषज्ञों के अनुसार लगातार घटते वन क्षेत्र और बढ़ते प्रदूषण के कारण पृथ्वी का तापमान तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे समय में वृक्षारोपण केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि मानव अस्तित्व से जुड़ा विषय बन गया है।

एक परिपक्व वृक्ष प्रतिवर्ष बड़ी मात्रा में कार्बन डाइऑक्साइड को अवशोषित कर वातावरण में ऑक्सीजन छोड़ता है। इसके साथ ही पेड़ वर्षा चक्र को संतुलित रखने, भूजल स्तर बनाए रखने, मिट्टी के कटाव को रोकने तथा जैव विविधता के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

विशेष रूप से गांवों में सामुदायिक स्थलों, विद्यालयों, मंदिरों, पंचायत परिसरों और मुक्तिधामों में पौधारोपण से हरित क्षेत्र बढ़ने के साथ-साथ लोगों में पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता भी विकसित होती है।

समाज के लिए प्रेरणादायी पहल

ग्राम किलोड़िया में आयोजित यह पौधारोपण अभियान केवल एक सामाजिक कार्यक्रम नहीं रहा, बल्कि यह पर्यावरण संरक्षण के प्रति सामूहिक जिम्मेदारी का जीवंत उदाहरण बनकर सामने आया। कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि जब सामाजिक संगठन, जनप्रतिनिधि, प्रशासन और ग्रामीण मिलकर किसी अच्छे उद्देश्य के लिए कार्य करते हैं, तो उसका सकारात्मक प्रभाव पूरे समाज पर पड़ता है।

इस अभियान ने यह भी साबित किया कि यदि प्रत्येक गांव अपने सार्वजनिक स्थलों पर नियमित पौधारोपण और संरक्षण अभियान चलाए, तो आने वाले वर्षों में प्रदेश को अधिक हरित और पर्यावरण की दृष्टि से समृद्ध बनाया जा सकता है।

“एक पेड़ – अनेक जीवन”

कार्यक्रम के अंत में उपस्थित सभी लोगों से अपील की गई कि वे अपने जीवन में कम से कम एक पौधा अवश्य लगाएं और उसकी देखभाल भी करें। क्योंकि एक पेड़ केवल छाया ही नहीं देता, बल्कि स्वच्छ हवा, जल संरक्षण, जैव विविधता और आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य का आधार भी बनता है।

 

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