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लखनऊ एयरपोर्ट पर पहली कोशिश में नहीं उतर पाया एयर इंडिया का विमान, राहुल गांधी भी थे सवार

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Published On: 8 September 2026
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लखनऊ एयरपोर्ट पर पहली कोशिश में नहीं उतर पाया एयर इंडिया का विमान, राहुल गांधी भी थे सवार

Air India Flight Go-Around: दिल्ली से लखनऊ आ रही एयर इंडिया की फ्लाइट AI-1717 को अमौसी स्थित चौधरी चरण सिंह अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर उतरने से ठीक पहले गो-अराउंड करना पड़ा। बताया गया कि विमान का एप्रोच स्थिर नहीं होने के कारण पायलट ने सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए लैंडिंग रोक दी। इस विमान में कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी भी सवार थे। कुछ समय बाद विमान ने दूसरे प्रयास में सुरक्षित लैंडिंग की।

अंतिम समय पर रोकी गई विमान की लैंडिंग

लखनऊ एयरपोर्ट पर मंगलवार को उस समय यात्रियों में कुछ देर के लिए चिंता की स्थिति बन गई, जब दिल्ली से आ रहा एयर इंडिया का विमान पहली कोशिश में रनवे पर नहीं उतर सका। विमान लैंडिंग की प्रक्रिया में था, लेकिन अंतिम चरण में पायलट ने उसे दोबारा ऊंचाई पर ले जाने का निर्णय लिया।

प्रारंभिक रिपोर्ट के मुताबिक, फ्लाइट का एप्रोच निर्धारित सुरक्षा मापदंडों के अनुरूप स्थिर नहीं था। ऐसी स्थिति में पायलट ने लैंडिंग का प्रयास जारी रखने के बजाय गो-अराउंड की प्रक्रिया अपनाई। विमान को दोबारा ऊंचाई पर ले जाया गया और सुरक्षित लैंडिंग के लिए नया एप्रोच तैयार किया गया।

इस घटनाक्रम के दौरान विमान में कांग्रेस सांसद राहुल गांधी भी मौजूद थे। पहली कोशिश टलने के बाद विमान ने एयरपोर्ट के आसपास निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार उड़ान जारी रखी और फिर दूसरे प्रयास में सुरक्षित तरीके से रनवे पर उतर गया। किसी यात्री को नुकसान पहुंचने की सूचना नहीं है।

दूसरे प्रयास में सुरक्षित हुई लैंडिंग

गो-अराउंड के बाद पायलट ने एयर ट्रैफिक कंट्रोल के निर्देशों और निर्धारित विमानन प्रक्रिया का पालन करते हुए दोबारा लैंडिंग की तैयारी की। आवश्यक ऊंचाई और दिशा प्राप्त करने के बाद विमान को नए सिरे से रनवे की ओर लाया गया।

दूसरे प्रयास में विमान की लैंडिंग सुरक्षित रूप से पूरी हो गई। इसके बाद यात्रियों ने राहत की सांस ली। रिपोर्ट में किसी तकनीकी खराबी या आपात स्थिति की पुष्टि नहीं की गई है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, पहली लैंडिंग केवल अनस्टेबल एप्रोच के कारण रोकी गई थी।

विमानन विशेषज्ञों के मुताबिक, सुरक्षित एप्रोच की आवश्यक शर्तें पूरी नहीं होने पर लैंडिंग जारी रखना जोखिमपूर्ण हो सकता है। ऐसी स्थिति में गो-अराउंड करना पायलट की सतर्कता और निर्धारित सुरक्षा प्रक्रिया का हिस्सा माना जाता है।

क्या होता है अनस्टेबल एप्रोच?

किसी विमान की लैंडिंग से पहले उसका रनवे की दिशा, गति, ऊंचाई और उतरने की दर जैसे कई मानकों पर स्थिर होना आवश्यक होता है। जब विमान इन निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं होता, तो उसकी स्थिति को ‘अनस्टेबल एप्रोच’ कहा जाता है।

अनस्टेबल एप्रोच कई कारणों से हो सकता है। इनमें हवा की दिशा या गति में अचानक बदलाव, रनवे पर यातायात, मौसम की स्थिति, विमान की गति या ऊंचाई का निर्धारित सीमा में नहीं होना तथा एयर ट्रैफिक संबंधी परिस्थितियां शामिल हो सकती हैं।

इसका अर्थ यह नहीं है कि विमान दुर्घटना का शिकार होने वाला था। यह एक ऐसी स्थिति होती है, जिसमें पायलट सावधानी बरतते हुए मौजूदा लैंडिंग प्रयास को छोड़ देता है और दोबारा सुरक्षित तरीके से प्रयास करता है।

गो-अराउंड क्या है और क्यों किया जाता है?

गो-अराउंड विमानन क्षेत्र में अपनाई जाने वाली एक सामान्य सुरक्षा प्रक्रिया है। जब पायलट को लगता है कि वर्तमान स्थिति में विमान को सुरक्षित रूप से उतारना संभव नहीं है, तो वह इंजन की शक्ति बढ़ाकर विमान को दोबारा ऊंचाई पर ले जाता है।

इसके बाद विमान को निर्धारित दिशा और ऊंचाई पर ले जाकर नए एप्रोच की तैयारी की जाती है। एयर ट्रैफिक कंट्रोल विमान को आवश्यक निर्देश देता है और रनवे उपलब्ध होने पर लैंडिंग का दूसरा प्रयास कराया जाता है।

नागरिक उड्डयन महानिदेशालय के सुरक्षा दस्तावेजों में भी मिस्ड एप्रोच और गो-अराउंड से जुड़ी प्रक्रियाओं का उल्लेख किया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य ऐसी परिस्थिति में सुरक्षित विकल्प उपलब्ध कराना है, जब लैंडिंग जारी रखना उचित नहीं हो।

राहुल गांधी की मौजूदगी से चर्चा में आया मामला

फ्लाइट में राहुल गांधी के सवार होने के कारण यह घटना तेजी से चर्चा में आ गई। हालांकि विमान का गो-अराउंड होना किसी विशेष यात्री की मौजूदगी से संबंधित नहीं होता। पायलट सभी यात्रियों और विमान की सुरक्षा को ध्यान में रखकर यह निर्णय लेता है।

राहुल गांधी के लखनऊ पहुंचने से जुड़े कार्यक्रमों के बीच विमान की पहली लैंडिंग टलने की सूचना सामने आई। सुरक्षित लैंडिंग के बाद उन्होंने अपनी निर्धारित यात्रा आगे बढ़ाई। घटनाक्रम को लेकर सोशल मीडिया पर भी प्रतिक्रियाएं सामने आईं, लेकिन विमानन प्रक्रिया को समझने वाले लोगों ने इसे सुरक्षा की दृष्टि से लिया गया सामान्य निर्णय बताया।

पायलट का निर्णय सुरक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण

विमान को हर हाल में पहली कोशिश में उतारना पायलट का उद्देश्य नहीं होता। प्राथमिकता सुरक्षित लैंडिंग की होती है। यदि अंतिम समय में पायलट को एप्रोच संतोषजनक नहीं लगता, तो लैंडिंग रोक देना अधिक सुरक्षित विकल्प माना जाता है।

गो-अराउंड के दौरान यात्रियों को विमान के दोबारा ऊपर जाने, इंजन की आवाज बढ़ने या दिशा बदलने का अनुभव हो सकता है। इससे कुछ यात्रियों में घबराहट हो सकती है, लेकिन यह प्रक्रिया प्रशिक्षित पायलटों द्वारा निर्धारित विमानन नियमों के अनुसार पूरी की जाती है।

एयर इंडिया की फ्लाइट AI-1717 से जुड़ी इस घटना में भी पायलट ने पहली कोशिश में लैंडिंग जारी नहीं रखी। विमान को दोबारा ऊंचाई पर ले जाने के बाद नया एप्रोच बनाया गया और दूसरे प्रयास में सभी यात्रियों के साथ सुरक्षित लैंडिंग कराई गई।

 

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