आचार्यश्री उदारसागरजी महाराज ससंघ के वर्षायोग का मंगल कलश स्थापना समारोह मुरैना में श्रद्धा-भक्ति के साथ संपन्न हुआ। जानिए चातुर्मास और धर्माराधना से जुड़ी पूरी खबर।
आचार्यश्री उदारसागरजी महाराज का भव्य चातुर्मास: मुरैना में 5 मंगल कलशों से धर्माराधना का शुभारंभ
मुरैना। (मनोज जैन नायक) — आचार्यश्री उदारसागरजी महाराज ससंघ के पावन वर्षायोग का मंगल कलश स्थापना समारोह रविवार को मुरैना में श्रद्धा, भक्ति और धार्मिक उल्लास के साथ संपन्न हुआ। संत शिरोमणि आचार्यश्री विद्यासागर महाराज एवं आचार्यश्री अभिनंदन सागरजी महाराज के परम प्रभावक आज्ञानुवर्ती शिष्य आचार्यश्री उदारसागरजी महाराज के ससंघ के चातुर्मास प्रारंभ होने के अवसर पर बड़ी संख्या में जैन समाज के श्रद्धालु उपस्थित रहे।
श्रद्धालुओं ने आचार्यश्री ससंघ के दर्शन, वंदन एवं मंगल आशीर्वाद का लाभ लिया। मंगल कलश स्थापना के साथ ही मुरैना नगरी में आगामी वर्षायोग के दौरान धर्म, अध्यात्म, स्वाध्याय और साधना का विशेष क्रम प्रारंभ हो गया।
मुरैना में हुआ मंगल कलश स्थापना समारोह
जैन सिद्धांत के अनुसार वर्षायोग साधु-संतों की संयम, साधना और आत्मकल्याण की आराधना का विशेष काल माना जाता है। वर्षा ऋतु में सूक्ष्म एवं त्रस जीवों की उत्पत्ति अधिक होने के कारण दिगंबर जैन साधु-संत एक स्थान पर स्थिर रहकर अहिंसा, संयम, स्वाध्याय, ध्यान, तप और जिनवाणी की आराधना करते हैं।
इसी धार्मिक भावना के साथ आचार्यश्री उदारसागरजी महाराज ससंघ का वर्षायोग मुरैना में प्रारंभ हुआ। मंगल कलश स्थापना के अवसर पर आचार्यश्री उदारसागरजी, मुनिश्री उपशांत सागरजी, ऐलकश्री उत्साह सागर, क्षुल्लकश्री उपकारसागर, क्षुल्लिकाश्री उदितमति एवं उपासनामति माताजी का पावन सान्निध्य रहा।
विधि-विधान एवं धार्मिक परंपराओं के अनुरूप मंगल कलश स्थापित किए गए। श्रद्धालुओं ने वर्षायोग के दौरान नियमित रूप से देवदर्शन, पूजन, स्वाध्याय, सामायिक, प्रतिक्रमण, तप एवं धर्मचर्चा करने का संकल्प लिया।
आचार्यश्री ने दिया आत्मचिंतन का संदेश
धर्मसभा को संबोधित करते हुए आचार्यश्री ने कहा कि चातुर्मास केवल साधु-संतों के एक स्थान पर रहने का समय नहीं है, बल्कि श्रावक-श्राविकाओं के लिए भी आत्मचिंतन और धर्माराधना का महत्वपूर्ण अवसर है।
उन्होंने कहा कि मनुष्य को इस पावन काल का सदुपयोग करते हुए अपने जीवन में अहिंसा, संयम, त्याग और सदाचार को अपनाना चाहिए। बाहरी परिस्थितियों को बदलने के साथ-साथ अपने भीतर मौजूद राग-द्वेष और कषायों को कम करना ही वास्तविक धर्मसाधना है।
वर्षायोग के दौरान आचार्यश्री उदारसागरजी महाराज ससंघ के सान्निध्य में नियमित धर्मसभा एवं जिनवाणी प्रवचन के साथ विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम, स्वाध्याय, तप एवं साधना के आयोजन होंगे।
चातुर्मास आत्मकल्याण की साधना का अवसर
कलश स्थापना समारोह में मुनिश्री उपशांत सागर महाराज ने कहा कि चातुर्मास केवल चार माह का पड़ाव नहीं, बल्कि आत्मकल्याण की साधना का पवित्र अवसर है।
उन्होंने कहा कि जिस प्रकार कलश में जल भरकर उसे मंगल का प्रतीक माना जाता है, उसी प्रकार हमें अपने जीवन को भी धर्म, संयम, त्याग और सद्भावना से भरना चाहिए।
मुनिश्री ने कहा कि संतों का चातुर्मास जिस स्थान पर होता है, वहां धर्म की प्रभावना बढ़ती है और समाज को आत्मचिंतन का अवसर मिलता है। इन चार महीनों में प्रत्येक श्रावक को नियमित रूप से मंदिर दर्शन, स्वाध्याय, सामायिक, पूजा-पाठ एवं साधु-संतों की वाणी का श्रवण करते हुए अपने जीवन में सकारात्मक परिवर्तन का संकल्प लेना चाहिए।
उन्होंने कहा कि कलश की स्थापना तभी सार्थक होगी, जब हमारे भीतर भी धर्म का कलश स्थापित हो और हम अपने आचरण से अहिंसा, संयम एवं सदाचार को जीवन में उतारें। चातुर्मास का उद्देश्य केवल बाहरी उत्सव नहीं, बल्कि भीतर की आत्मा को जागृत करना है।
पांच कलशों के पुण्यार्जक परिवार
वर्षायोग कलश स्थापना समारोह में पांच मंगल कलश स्थापित किए गए।
प्रथम कलश — विनोदकुमार पवन कुमार जैन, उज्जैन।
द्वितीय कलश — रमाशंकर शुभम जैन नायक, गढ़ी वाले, मुरैना।
तृतीय कलश — पवन कुमार सिद्धार्थ जैन, पोरसा वाले, मुरैना।
चतुर्थ कलश — आशीषकुमार मिथुन जैन, गढ़ी वाले, गंज मुरैना।
पांचवां कलश — विजयकुमार जैन, मुंबई।
इन पुण्यार्जक परिवारों द्वारा विधि-विधान के साथ मंगल कलश स्थापित किए गए।
ब्रह्मचारी एवं विद्वतजनों ने कराया आयोजन
समारोह में बाल ब्रह्मचारी संजय भैयाजी विशेष रूप से उपस्थित थे। ब्रह्मचारी प्रदीप जैन “पियूष” ने सभी धार्मिक क्रियाएं विधि-विधानपूर्वक मंत्रोच्चारण के साथ संपन्न कराईं।
मंच संचालन में संजय शास्त्री सिहोनिया, विद्वत नवनीत शास्त्री एवं चक्रेश शास्त्री ने पूर्ण सहयोग प्रदान किया।
इस अवसर पर टीकमगढ़, फिरोजाबाद, सागर, दमोह, बड़ागांव, आठनेर, मुलताई, खड़गापुर, सुल्तानगंज, बांसा, अम्बाह सहित विभिन्न स्थानों से गुरु भक्त साधर्मी बंधुओं ने सहभागिता की।
साधर्मी बंधुओं ने किए मांगलिक कार्यक्रम
समारोह के शुभारंभ में प्रेमचंद पंकज जैन द्वारा ध्वजारोहण किया गया। बाहर से आए अतिथियों द्वारा चित्र अनावरण एवं दीप प्रज्वलित किया गया।
मंगलाचरण के रूप में भूमि जैन, जैन मिलन की बालिकाओं एवं नन्हे-मुन्ने बच्चों ने भक्तिमय नृत्य प्रस्तुत किए। धार्मिक प्रस्तुतियों ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया।
समारोह में जैन समाज के विभिन्न संगठनों के पदाधिकारी, महिला मंडल, युवा वर्ग एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। समाजजनों ने आचार्यश्री उदारसागरजी महाराज के वर्षायोग को अधिक से अधिक धर्माराधना, आत्मचिंतन और आत्मकल्याण का माध्यम बनाने का संकल्प लिया।
मंगल कलश स्थापना के साथ मुरैना नगरी में चार माह की धर्मसाधना, जिनवाणी श्रवण, स्वाध्याय, तप और आध्यात्मिक गतिविधियों का शुभारंभ हो गया है।




