दिल्ली के इंडिया गेट पर पट्टाचार्य श्री विशुद्धसागर जी महाराज ने धर्मसभा को संबोधित कर राष्ट्र, धर्म, शाकाहार और श्रेष्ठ आचरण का संदेश दिया।
दिल्ली के इंडिया गेट पर गूंजी पट्टाचार्य श्री विशुद्धसागर जी महाराज की गुरुवाणी
दैनिक स्वराज वाणी
राजेश जैन दद्दू
इंदौर/दिल्ली। दिगम्बर जैन पट्टाचार्य श्री विशुद्धसागर जी महाराज ने दिल्ली के ऐतिहासिक इंडिया गेट पर आयोजित धर्मसभा को संबोधित करते हुए राष्ट्र, धर्म और श्रेष्ठ जीवन मूल्यों पर प्रवचन दिए। धर्म समाज प्रचारक राजेश जैन दद्दू ने बताया कि धर्मसभा में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने गुरुवाणी का लाभ लिया।
आचार्य श्री ने कहा कि वस्तु के वास्तविक स्वरूप और सम्यक बोध को समझना अत्यंत गंभीर विषय है। वस्तु सामान्य और विशेष गुणों से युक्त होती है। जो व्यक्ति इसके वास्तविक स्वरूप को समझ लेता है, वह जीवन को आनंद के साथ जीता है।
शासक और संत की भूमिका पर आचार्य श्री ने कहा कि सम्राट और आचार्य दोनों को कुशल, प्रजावत्सल, अनुशासनप्रिय, संयमी, नैतिक और न्यायवान होना चाहिए। उन्होंने कहा, “संत धर्म की रक्षा करते हैं और शासक देश की रक्षा करते हैं। जिस देश में शासक और साधु दोनों श्रेष्ठ होंगे, उस देश का विकास निश्चित है।”
उन्होंने श्रद्धालुओं से अपनी पहचान श्रेष्ठ बनाने का आह्वान करते हुए कहा कि पवित्र पहचान, पवित्र विचारों से बनती है। सहज जीवन, श्रेष्ठ विचार और शाकाहार मानव की सच्ची पहचान होनी चाहिए। देश की श्रेष्ठता उसके नागरिकों के अच्छे विचार और आचरण से बनती है।
धर्मसभा में उपस्थित श्रद्धालुओं ने आचार्य श्री के प्रवचनों को श्रद्धापूर्वक सुना।
