आचार्य विमलसागर पुण्य स्मृति दिवस पर इंदौर में भव्य धार्मिक आयोजन। मुनिश्री पूज्यसागर जी ने कहा— साधुओं का स्नेह और वात्सल्य जीवन को सद्मार्ग पर ले जाता है।
- राजेश जैन दद्दू
- इंदौर।
आचार्य विमलसागर पुण्य स्मृति दिवस: साधु वात्सल्य से जीवन को मिलती है दिशा
आचार्य विमलसागर पुण्य स्मृति दिवस के अवसर पर इंदौर में सोमवार को श्रद्धा, भक्ति और आराधना से परिपूर्ण वातावरण देखने को मिला। समाधीष्ट आचार्यश्री विमलसागर जी महाराज का 32वां पुण्य स्मृति दिवस केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि जैन समाज के लिए आत्मचिंतन और आध्यात्मिक प्रेरणा का पर्व बन गया।
इस अवसर पर परम पूज्य अंतर्मुखी मुनिश्री पूज्यसागर जी महाराज के सान्निध्य में आयोजित समारोह में बड़ी संख्या में गुरु भक्तों, समाजजनों और पुण्यार्जक परिवारों की उपस्थिति रही।
मुनिश्री पूज्यसागर जी का संदेश: साधु स्नेह ही सद्मार्ग है
विनयांजलि एवं गुणानुवाद सभा को संबोधित करते हुए मुनिश्री पूज्यसागर जी महाराज ने कहा—
“साधुओं का स्नेह, प्रेम और वात्सल्य व्यक्ति को स्वतः ही सद्मार्ग पर अग्रसर करता है।”
उन्होंने कहा कि आचार्य विमलसागर जी महाराज ऐसे विरल संत थे, जिनका वात्सल्य केवल शिष्यों तक सीमित नहीं था, बल्कि सम्पूर्ण समाज और मानवता के लिए था। उनके संपर्क में आने वाला हर व्यक्ति जीवन में सकारात्मक परिवर्तन अनुभव करता था।
आचार्य विमलसागर जी: चलते-फिरते तीर्थ
सभा में आर्यिका यशस्विनी मति माताजी ने भावांजलि अर्पित करते हुए कहा कि आचार्यश्री का जीवन पूर्णतः निर्मल था। उनकी चर्या, विचार और आचरण—सब कुछ धर्ममय था।
उन्होंने कहा कि यदि वे चतुर्थकाल में होते, तो निश्चित ही मोक्षगामी होते।
गुरु-शिष्य परंपरा का अनुपम उदाहरण
आर्यिका श्री ने गुरु-शिष्य संबंधों का एक भावपूर्ण प्रसंग साझा करते हुए बताया कि आचार्य विमलसागर जी का वात्सल्य अनुशासन से भी ऊपर था। वे शिष्यों की भावना को समझते थे और करुणा को सर्वोपरि रखते थे। यही कारण है कि उनकी स्मृति आज भी जीवंत है।

विधान, अभिषेक और आरती से सजी पुण्य बेला
प्रातः 7 बजे से जिन अभिषेक एवं आचार्य विमलसागर विधान का आयोजन हुआ। मुनिश्री पूज्यसागर जी महाराज के मंत्रोच्चार के साथ आचार्यश्री के चरणों में अर्घ्य समर्पित किए गए।
शाम को 36 दीपकों से संगीतमय आरती हुई, जिससे पूरा सभा मंडप “आचार्य विमलसागर जी महाराज की जय” के जयकारों से गूंज उठा।
संगीत, भक्ति और समाज की एकजुटता
भक्ति संगीतकार जैनम पंकज जैन की प्रस्तुतियों ने भक्तों को भावविभोर कर दिया। धार्मिक म्यूजिकल तंबोला और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने आयोजन को और भी स्मरणीय बना दिया।
समाजजनों का सहयोग बना आयोजन की शक्ति
इस भव्य आयोजन में सकल दिगंबर जैन समाज, वात्सल्य रत्नाकर विमलसागर भक्त परिवार, विभिन्न जैन संस्थाओं और पुण्यार्जक परिवारों का सराहनीय योगदान रहा।
