राष्ट्र संत आचार्य विहर्ष सागर जी महाराज ससंघ का वर्षायोग 29 जुलाई से किशनगढ़ में, गुरु पूर्णिमा पर होगा चातुर्मास का मंगल प्रवेश
देशभर से उमड़ेंगे श्रद्धालु, इंदौर सहित विभिन्न राज्यों से पहुंचेगा गुरु भक्तों का विशाल जत्था
रिपोर्ट: सतीश जैन, प्रचार प्रमुख, दिगंबर जैन समाज सामाजिक संसद, इंदौर
इंदौर। समाधिस्थ गणाचार्य विराग सागर जी महाराज के सुयोग्य शिष्य, राष्ट्र संत आचार्य श्री विहर्ष सागर जी महाराज ससंघ का वर्ष 2026 का पावन वर्षायोग (चातुर्मास) राजस्थान के किशनगढ़ में आयोजित होने जा रहा है। जैन समाज के लिए यह अत्यंत महत्वपूर्ण एवं आध्यात्मिक दृष्टि से प्रेरणादायी अवसर माना जा रहा है। गुरु पूर्णिमा के शुभ अवसर पर बुधवार, 29 जुलाई को आचार्य श्री ससंघ का मंगल प्रवेश एवं चातुर्मास स्थापना समारोह धार्मिक गरिमा के साथ संपन्न होगा।
इस आयोजन को लेकर जैन समाज में विशेष उत्साह देखा जा रहा है। देशभर के विभिन्न राज्यों से हजारों श्रद्धालु, साधर्मी एवं गुरु भक्त इस पावन अवसर पर किशनगढ़ पहुंचकर धर्म लाभ अर्जित करेंगे। इंदौर सहित मध्यप्रदेश, राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र और अन्य राज्यों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है।
गुरु पूर्णिमा पर होगा मंगल कलश स्थापना एवं चातुर्मास प्रवेश

दिगंबर जैन समाज सामाजिक संसद, इंदौर के अध्यक्ष श्री विनय बाकलीवाल एवं प्रचार प्रमुख श्री सतीश जैन ने जानकारी देते हुए बताया कि 29 जुलाई को दोपहर 12:15 बजे राजस्थान के किशनगढ़ स्थित आर.के. कम्युनिटी सेंटर में गुरु पूर्णिमा एवं चातुर्मास मंगल कलश स्थापना का भव्य आयोजन होगा।
पूरे कार्यक्रम का आयोजन धार्मिक विधि-विधान, वैदिक एवं जैन परंपराओं के अनुरूप किया जाएगा। श्रद्धालु मंगल कलश स्थापना, पूजन, अभिषेक एवं अन्य धार्मिक अनुष्ठानों में सहभागी बनकर पुण्य लाभ अर्जित करेंगे।
15 सदस्यीय संघ के साथ विराजमान हैं आचार्य श्री
वर्तमान में आचार्य श्री विहर्ष सागर जी महाराज के संघ में कुल 15 साधु एवं आर्यिका माताएं विराजमान हैं। यह संघ निरंतर धर्म प्रचार, आत्मकल्याण, संयम, तप एवं आध्यात्मिक जागरण का संदेश समाज तक पहुंचा रहा है।
संघ की उपस्थिति से किशनगढ़ का धार्मिक वातावरण चातुर्मास अवधि में पूरी तरह भक्तिमय रहेगा। चार माह तक चलने वाले इस वर्षायोग में प्रतिदिन प्रवचन, धर्मसभा, स्वाध्याय, तप, आराधना एवं विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
श्री मुनिसुब्रतनाथ दिगंबर जैन पंचायत करेगी आयोजन
इस भव्य धार्मिक आयोजन की संपूर्ण व्यवस्थाओं का दायित्व श्री मुनिसुब्रतनाथ दिगंबर जैन पंचायत, किशनगढ़ द्वारा संभाला जा रहा है।
आयोजन समिति ने देशभर से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए आवास, भोजन, परिवहन, दर्शन व्यवस्था तथा अन्य आवश्यक सुविधाओं की व्यापक तैयारियां की हैं।
समिति के सदस्यों के अनुसार चातुर्मास के दौरान प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के आने की संभावना को देखते हुए सभी व्यवस्थाएं सुव्यवस्थित रूप से की जा रही हैं।
चातुर्मास का जैन धर्म में विशेष महत्व
जैन धर्म में चातुर्मास का अत्यंत विशेष धार्मिक महत्व है। वर्षा ऋतु के चार महीनों में साधु-संत एक ही स्थान पर विराजमान होकर धर्मोपदेश देते हैं। इस अवधि में श्रद्धालु अधिकाधिक धर्म साधना, तप, स्वाध्याय, पूजा, प्रतिक्रमण एवं संयम का पालन करते हैं।
चातुर्मास को आत्मशुद्धि, आध्यात्मिक उन्नति और नैतिक जीवन के अभ्यास का श्रेष्ठ समय माना जाता है।
इस दौरान समाज में धार्मिक संस्कारों को मजबूत करने के साथ-साथ युवा पीढ़ी को जैन दर्शन और संस्कृति से जोड़ने का भी महत्वपूर्ण कार्य किया जाता है।
आचार्य विहर्ष सागर जी महाराज का आध्यात्मिक योगदान
राष्ट्र संत आचार्य विहर्ष सागर जी महाराज अपने ओजस्वी प्रवचनों, सरल जीवन, संयम, त्याग और आध्यात्मिक चिंतन के लिए देशभर में सम्मानित हैं।
वे अपने प्रवचनों के माध्यम से समाज को सत्य, अहिंसा, करुणा, आत्मसंयम, सदाचार एवं मानव सेवा का संदेश देते हैं। उनके विचार केवल धार्मिक नहीं, बल्कि सामाजिक जीवन को भी सकारात्मक दिशा प्रदान करते हैं।
आचार्य श्री सदैव युवाओं को नैतिक मूल्यों से जुड़ने, नशामुक्त जीवन अपनाने, पर्यावरण संरक्षण तथा पारिवारिक संस्कारों को मजबूत करने की प्रेरणा देते रहे हैं।
समाधिस्थ गणाचार्य विराग सागर जी महाराज की परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं
आचार्य विहर्ष सागर जी महाराज, समाधिस्थ गणाचार्य विराग सागर जी महाराज के सुयोग्य शिष्य हैं।
गणाचार्य विराग सागर जी महाराज ने अपने तप, त्याग और धर्म प्रचार के माध्यम से जैन समाज में अमिट पहचान बनाई थी। उनके आदर्शों और आध्यात्मिक परंपरा को आचार्य विहर्ष सागर जी महाराज आगे बढ़ा रहे हैं।
उनके सान्निध्य में हजारों श्रद्धालु धर्म, संयम और आत्मचिंतन की प्रेरणा प्राप्त करते हैं।
इंदौर से सैकड़ों श्रद्धालु होंगे रवाना
दिगंबर जैन समाज सामाजिक संसद के पूर्व अध्यक्ष श्री राजकुमार पाटोदी ने बताया कि इस ऐतिहासिक धार्मिक आयोजन में इंदौर से भी बड़ी संख्या में गुरु भक्त किशनगढ़ पहुंचेंगे।
उन्होंने बताया कि सैकड़ों श्रद्धालु बसों एवं निजी वाहनों से यात्रा कर चातुर्मास स्थापना समारोह में शामिल होंगे। श्रद्धालु पूरे उत्साह और भक्ति भाव के साथ इस आध्यात्मिक महोत्सव में सहभागिता करेंगे।
इंदौर के विभिन्न जैन संगठन एवं धार्मिक संस्थाएं भी अपने स्तर पर सामूहिक यात्रा की तैयारियां कर रही हैं।
देशभर के समाज श्रेष्ठियों का होगा आगमन
इस अवसर पर देश के विभिन्न राज्यों से समाज के वरिष्ठजन, उद्योगपति, समाजसेवी, धार्मिक संस्थाओं के प्रतिनिधि एवं हजारों श्रद्धालुओं के किशनगढ़ पहुंचने की संभावना है।
आयोजन समिति के अनुसार यह चातुर्मास केवल धार्मिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि समाज को एक सूत्र में जोड़ने का भी महत्वपूर्ण अवसर होगा।
चातुर्मास के दौरान होंगे विविध धार्मिक आयोजन
वर्षायोग अवधि में श्रद्धालुओं के लिए अनेक धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इनमें प्रमुख रूप से—
- प्रतिदिन मंगल प्रवचन
- धार्मिक प्रश्नोत्तरी एवं स्वाध्याय
- सामूहिक पूजन एवं अभिषेक
- तप एवं आराधना कार्यक्रम
- जैन सिद्धांतों पर विशेष व्याख्यान
- युवा एवं महिला धार्मिक सम्मेलन
- संस्कार एवं नैतिक शिक्षा कार्यक्रम
- सामाजिक समरसता एवं सेवा गतिविधियां
इन आयोजनों के माध्यम से श्रद्धालुओं को जैन दर्शन के सिद्धांतों को जीवन में अपनाने की प्रेरणा दी जाएगी।
आध्यात्मिक चेतना का बनेगा केंद्र किशनगढ़
चातुर्मास के चार महीनों तक किशनगढ़ आध्यात्मिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र बना रहेगा। प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु आचार्य श्री के दर्शन एवं प्रवचन का लाभ प्राप्त करेंगे।
धर्माचार्यों का मानना है कि चातुर्मास केवल धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं होता, बल्कि यह आत्मनिरीक्षण, आत्मसंयम और समाज में नैतिक मूल्यों के प्रसार का महत्वपूर्ण अवसर भी है।
भक्ति और संयम का संदेश देगा यह वर्षायोग
राष्ट्र संत आचार्य विहर्ष सागर जी महाराज का यह वर्षायोग श्रद्धालुओं के लिए आध्यात्मिक उन्नति का विशेष अवसर माना जा रहा है। गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर आरंभ होने वाला यह चातुर्मास श्रद्धालुओं को संयम, सेवा, सदाचार, अहिंसा और आत्मकल्याण की दिशा में प्रेरित करेगा।
जैन समाज के साथ-साथ विभिन्न समुदायों के लोग भी इस आयोजन में शामिल होकर आध्यात्मिक ऊर्जा एवं सकारात्मक जीवन मूल्यों का संदेश प्राप्त करेंगे। पूरे चातुर्मास के दौरान किशनगढ़ में धर्म, भक्ति और साधना का वातावरण बना रहेगा, जिससे यह आयोजन वर्ष 2026 के प्रमुख धार्मिक आयोजनों में शामिल होने जा रहा है।
