आचार्य सुनील सागर जी महाराज ने इंदौर के ऐतिहासिक राजबाड़ा पर 15 अगस्त के अवसर पर कहा—आजादी का यह ताज बड़े तप से भारत ने पाया है। जानिए तिरंगा यात्रा, विहार और उनके प्रेरणादायक संदेश की पूरी खबर।
आजादी का यह ताज बड़े तप से भारत ने पाया, मत पूछो इसके लिए देश ने क्या कुछ नहीं गंवाया है : आचार्य सुनील सागर जी महाराज
इंदौर। आचार्य सुनील सागर जी महाराज ने स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर देशभक्ति का संदेश देते हुए कहा, “आजादी का यह ताज बड़े तप से भारत ने पाया है, मत पूछो इसके लिए देश ने क्या कुछ नहीं गंवाया है।” शनिवार, 15 अगस्त को आचार्य संघ नेमि नगर, जैन कॉलोनी से विहार करते हुए इंदौर की हृदयस्थली ऐतिहासिक राजबाड़ा पहुंचा। पूरे रास्ते श्रावकों ने आचार्य श्री का पाद प्रक्षालन किया और आरती उतारकर आशीर्वाद प्राप्त किया।
जैन समाज के अध्यक्ष विनय बाकलीवाल एवं प्रचार प्रमुख सतीश जैन ने बताया कि विहार के दौरान रत्नत्रय ग्रुप के सदस्य तिरंगा एवं पचरंगा झंडा लेकर चले। यात्रा के आगे बैंड पर देशभक्ति के गीत गूंजते रहे, जिससे पूरे मार्ग पर राष्ट्रभक्ति का वातावरण बन गया।
आचार्य सुनील सागर जी महाराज के विहार में तिरंगा और पचरंगा साथ-साथ
विहार के दौरान देशभक्ति और धर्म का अनूठा संगम देखने को मिला। अभिषेक ग्रुप के सदस्यों ने तिरंगे झंडे लेकर वाहनों पर रैली निकाली। टोरी कॉर्नर पर निकाली गई विशाल तिरंगा यात्रा भी आचार्य संघ के विहार में सम्मिलित हुई।
यह यात्रा रामा शाह जी के मंदिर से होते हुए ऐतिहासिक राजबाड़ा पहुंची। यहां बड़ी संख्या में उपस्थित समाजजनों ने आचार्य श्री का स्वागत किया। राजबाड़ा पर गुरुदेव का पाद प्रक्षालन किया गया तथा उन्हें शास्त्र जी भेंट किए गए।
देश के 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम में धर्म, राष्ट्रभक्ति और सामाजिक संदेश का सुंदर समन्वय दिखाई दिया।
“वतन की मोहब्बत पूछकर नहीं की जाती”
आचार्य सुनील सागर जी महाराज ने अपने प्रवचन में कहा कि आजादी भारत को आसानी से नहीं मिली है। इसके पीछे असंख्य स्वतंत्रता सेनानियों, क्रांतिकारियों और देशभक्तों का त्याग तथा बलिदान है।
आचार्य श्री ने कहा—
“आजादी का यह ताज बड़े तप से भारत ने पाया है,
मत पूछो इसके लिए देश ने क्या कुछ नहीं गंवाया है।”
उन्होंने आगे कहा—
“फना होने की इजाजत ली नहीं जाती,
ये वतन की मोहब्बत है जनाब, पूछकर नहीं की जाती।”
आचार्य श्री ने स्वतंत्रता संग्राम में अपने प्राणों का बलिदान देने वाले वीरों को याद करते हुए कहा—
“आओ मिलकर याद करें उन्हें, जिनके हिस्से में ये मुकाम आया है,
कितने खुशनसीब हैं वो लोग, जिनका खून वतन के काम आया है।”
उनके इन विचारों ने कार्यक्रम में मौजूद समाजजनों को देश के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले वीरों के बलिदान की याद दिलाई।
चल और अचल तीर्थों की सुरक्षा पर दिया संदेश
आचार्य श्री ने अपने प्रवचन में धार्मिक और सामाजिक विषयों पर भी विचार रखे। उन्होंने कहा कि हमारे अचल और चल तीर्थ सुरक्षित रहें, इस बात का शासन को विशेष ध्यान रखना चाहिए।
उन्होंने भारतीय भाषाओं और संस्कृति के सम्मान की बात करते हुए लोगों से भाषा की गुलामी से बचने का आह्वान किया।
आचार्य श्री ने जीव दया का संदेश देते हुए कहा कि सबको जीने का अधिकार है और मांस व्यापार बंद होना चाहिए। उन्होंने शराबबंदी की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
हिंसक उद्योगों को अनुदान नहीं देने की बात
आचार्य सुनील सागर जी महाराज ने कहा कि हिंसक उद्योगों को प्रोत्साहित नहीं किया जाना चाहिए और ऐसे उद्योगों के लिए अनुदान नहीं दिया जाना चाहिए। उन्होंने समाज एवं शासन से अहिंसा के सिद्धांत को प्राथमिकता देने का आह्वान किया।
आचार्य श्री ने आरक्षण व्यवस्था का उल्लेख करते हुए कहा कि आरक्षण के नियमों में परिवर्तन होना चाहिए।
उनका कहना था कि राष्ट्र की उन्नति के साथ सामाजिक व्यवस्था, अहिंसा, भारतीय संस्कृति और धार्मिक मूल्यों की सुरक्षा पर भी गंभीरता से ध्यान देने की आवश्यकता है।
ये रहे कार्यक्रम के पुण्यार्जक परिवार
कार्यक्रम के पुण्यार्जक परिवारों में मनीष-सपना गोधा, मनीष-सविता जैन, सावन-पूनम पहाड़िया, अनिल जैन जैनको, संदीप जैन मोयरा एवं प्रमोद पापड़ीवाल शामिल रहे।
इन परिवारों के सहयोग से आयोजित कार्यक्रम में बड़ी संख्या में समाजजनों ने भाग लिया और आचार्य श्री का आशीर्वाद प्राप्त किया।
बड़ी संख्या में समाजजन रहे उपस्थित
कार्यक्रम में समाज श्रेष्ठी डॉ. अशोक बढ़जात्या, देवेंद्र सोगानी, डी.के. जैन, सतीश जैन, पिंकेश टोंग्या, जैनेश झांझरी, राजकुमार पाटोदी, कैलाश वेद, कैलाश लुहाड़िया, इंद्र कुमार सेठी, महावीर जैन, नकुल पाटोदी, धर्मेंद्र जैन, वीरेंद्र बड़जात्या, दीपक पाटनी और निलेश सेठी सहित बड़ी संख्या में समाजजन उपस्थित रहे।
आचार्य श्री के राजबाड़ा पहुंचने पर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह दिखाई दिया। ऐतिहासिक राजबाड़ा पर तिरंगे के साथ धार्मिक ध्वजों की मौजूदगी ने कार्यक्रम को विशेष स्वरूप प्रदान किया।
राजबाड़ा पर गूंजा देशभक्ति और धर्म का संदेश
स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर आचार्य संघ के विहार ने इंदौर में देशभक्ति और धर्म का संयुक्त संदेश दिया। एक ओर तिरंगा यात्रा और बैंड पर बजते देशभक्ति के गीत थे, तो दूसरी ओर आचार्य श्री के प्रवचन में स्वतंत्रता सेनानियों के त्याग, अहिंसा, जीव दया, भारतीय भाषाओं और तीर्थों की सुरक्षा का संदेश था।
आचार्य श्री के संदेश ने स्वतंत्रता दिवस को केवल उत्सव के रूप में नहीं, बल्कि देश के लिए बलिदान देने वालों को याद करने और राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्यों पर विचार करने के अवसर के रूप में प्रस्तुत किया।
कार्यक्रम का सफल संचालन जैनेश झांझरी एवं श्रीमती अनामिका-मनोज बाकलीवाल ने किया। कार्यक्रम के अंत में सुरेंद्र बाकलीवाल ने सभी का आभार माना।
रिपोर्ट : सतीश जैन (इला बैंक)
प्रचार प्रमुख, दिगंबर जैन समाज, सामाजिक संसद, इंदौर

