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धर्म ही जीवन का प्रकाश है, जो आत्मा को अज्ञान के अंधकार से मुक्त करता है — Acharya Shri Udaysagar

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Published On: 31 July 2026
Acharya Shri Udaysagar: Religion Guides the Sou

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धर्म ही जीवन का प्रकाश है, जो आत्मा को अज्ञान के अंधकार से मुक्त करता है — Acharya Shri Udaysagar

मुरैना (मनोज जैन नायक) जैनाचार्य अभिनंदनसागरजी महाराज के परम प्रभावक आज्ञानुवर्ती शिष्य, परम पूज्य आचार्यश्री उदारसागरजी महाराज ने बड़े जैन मंदिर में आयोजित धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि “जब-जब अधर्म बढ़ता है, तब-तब धर्म का प्रकाश मानवता का मार्गदर्शन करने के लिए प्रकट होता है।” संसार में अंधकार का अस्तित्व केवल प्रकाश के अभाव से होता है। उसी प्रकार जीवन में अशांति, हिंसा, मोह, लोभ, क्रोध, अहंकार और अनैतिकता का विस्तार धर्म के अभाव का परिणाम है। धर्म कोई संप्रदाय या बाहरी आडंबर नहीं, बल्कि आत्मा को उसके शुद्ध स्वरूप का बोध कराने वाली दिव्य साधना है।

आचार्यश्री ने कहा कि जिस प्रकार एक छोटा-सा दीपक भी घोर अंधकार को दूर करने की क्षमता रखता है, उसी प्रकार धर्म का एक छोटा-सा संस्कार भी मनुष्य के जीवन को नई दिशा दे सकता है। धर्म मनुष्य को सत्य, अहिंसा, क्षमा, दया, करुणा, संयम और आत्मानुशासन का मार्ग सिखाता है। जहां धर्म है, वहां सद्भाव है; जहां धर्म है, वहां शांति है; और जहां धर्म है, वहां आत्मकल्याण का मार्ग स्वतः प्रशस्त हो जाता है । उन्होंने कहा कि आज संसार में भौतिक साधनों की कोई कमी नहीं है, लेकिन मानसिक शांति का अभाव बढ़ता जा रहा है।

मनुष्य ने विज्ञान के माध्यम से बाहरी संसार को जीतने का प्रयास तो किया, किंतु अपने मन को जीतने का प्रयास नहीं किया। जैन दर्शन कहता है कि सबसे बड़ी विजय किसी दूसरे पर नहीं, बल्कि अपने राग, द्वेष, क्रोध, मान, माया और लोभ पर विजय प्राप्त करना है। यही वास्तविक धर्म है और यही आत्मविजय है।

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*धर्म क्यों और कब तक करना चाहिए*

आचार्यश्री ने एक अत्यंत प्रेरणादायक दृष्टांत सुनाया। उन्होंने कहा कि एक व्यक्ति ने एक संत से प्रश्न किया—”धर्म क्यों करना चाहिए और कब तक करना चाहिए?” संत ने तत्काल उत्तर देने के स्थान पर उसे रात्रि में अपनी कुटिया पर आने के लिए कहा। रात्रि होने पर वह व्यक्ति संत की कुटिया में पहुंचा। वहां एक दीपक जल रहा था। उस व्यक्ति ने संत से पूछा, “गुरुदेव! यह दीपक क्यों जल रहा है?” संत ने मुस्कराते हुए कहा, “अंधकार है, इसलिए दीपक जल रहा है।” उस व्यक्ति ने पुनः प्रश्न किया, “यह दीपक कब तक जलता रहेगा?” संत ने उत्तर दिया, “जब तक अंधकार रहेगा, तब तक दीपक जलता रहेगा।”

कुछ क्षण बाद उस व्यक्ति ने कहा, “अब मेरे प्रश्न का उत्तर दीजिए कि धर्म क्यों करना चाहिए और कब तक करना चाहिए?” तब संत ने अत्यंत सरल शब्दों में कहा, “तुम्हारे प्रश्न का उत्तर यही दीपक है। जिस प्रकार बाहरी अंधकार को दूर करने के लिए दीपक आवश्यक है, उसी प्रकार मन के भीतर व्याप्त अज्ञान, मोह, राग-द्वेष और कषायों के अंधकार को समाप्त करने के लिए धर्म आवश्यक है। जब तक अंतःकरण का अज्ञान दूर नहीं हो जाता, जब तक आत्मा अपने वास्तविक स्वरूप को प्राप्त नहीं कर लेती, तब तक धर्म-साधना निरंतर करते रहना चाहिए।”

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*दिखावे का धर्म आत्मकल्याण का कारक नहीं बनता*

इस अवसर पर परम पूज्य मुनिश्री उपशांतसागर महाराज ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि जैन दर्शन में सम्यग्दर्शन मोक्षमार्ग का प्रथम सोपान है। सच्चा सम्यग्दृष्टि वही है, जो देव, शास्त्र और गुरु के प्रति निष्कपट श्रद्धा, अटूट विश्वास एवं विनय रखता है तथा गुरु के आगमन से पूर्व ही श्रद्धाभाव से धर्मसभा में उपस्थित होकर धर्मश्रवण के लिए तत्पर रहता है।
उन्होंने कहा कि लोक-प्रशंसा, मान-सम्मान या दिखावे के लिए किया गया धर्म आत्मकल्याण का कारण नहीं बनता।

वास्तविक धर्म बाहरी आडंबर में नहीं, बल्कि निर्मल भाव, विनम्रता, आत्मचिंतन और संयमपूर्ण आचरण में निहित है। जब मनुष्य शुद्ध भावों के साथ धर्म का पालन करता है, तभी उसका जीवन मोक्षमार्ग की ओर अग्रसर होता है। मुनिश्री ने कहा कि धर्मात्मा व्यक्ति साधु संतों के प्रति समर्पण, भक्ति और श्रद्धा का भाव रखता है । ऐसा व्यक्ति साधु संतों को आदर भाव से देखते हुए बगैर किसी असमानता के उन्हें नमन करता है, उनकी सेवा करते हुए उनकी संयम चर्या में सहभागी बनता है ।

*धर्म सभा में सैकड़ों की संख्या में उपस्थित रहे साधर्मी बंधु*

धर्मसभा में बड़ी संख्या में साधर्मी बंधुओं माता बहनों एवं युवाओं ने उपस्थित होकर आचार्यश्री एवं मुनिश्री के अमृत वचनों का श्रवण करते हुए अपने जीवन में धर्म, सम्यग्दर्शन, संयम और सदाचार को अपनाने का संकल्प लिया। आचार्यश्री ने बताया कि आज से प्रवचनों की एक नई श्रृंखला का शुभारंभ होगा । आप सभी नियत समय पर यथासमय धर्म सभा में उपस्थित होकर जिनेन्द्र वाणी का श्रमण करें ।

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कुमकुम सोनी स्वराज वाणी न्यूज मे कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है। इन्होंने स्नातक पत्रकारिता एवं जनसंचार से की है। यह विशेषतः राजनीति एवं भू-राजनीति से जुड़े मुद्दों का गहन विशलेषण कर सरल भाषा में आम जनता के समक्ष प्रस्तुत करने का प्रयास करती है।… Read More

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