आचार्य शांतिसागर महाराज के समाधि दिवस पर हुआ महामंडल विधान
मुरैना (मनोज जैन नायक)। श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन पंचायती बड़ा मंदिर में चारित्र चक्रवर्ती आचार्य श्री 108 शांतिसागर महाराज के समाधि दिवस के अवसर पर श्रद्धा और भक्तिभाव के साथ आचार्य शांतिसागर महामंडल विधान का आयोजन किया गया। इस दौरान समाजबंधुओं ने विधि-विधानपूर्वक मंडल पर अर्घ्य समर्पित कर पुण्यार्जन किया और आचार्यश्री को श्रद्धांजलि अर्पित की।
कार्यक्रम में परम पूज्य आचार्य श्री 108 उदारसागर महाराज ने आचार्य शांतिसागर महाराज के जीवन और उनके धार्मिक योगदान पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि आचार्य शांतिसागर महाराज ने अपने तप, त्याग, संयम और चारित्र के माध्यम से देशभर में जिनशासन की प्रभावना का महत्वपूर्ण कार्य किया। उनका जीवन आत्मकल्याण के साथ-साथ धर्म के प्रचार-प्रसार और समाज को सदाचार एवं संयम के मार्ग पर प्रेरित करने के लिए समर्पित रहा।
आचार्यश्री ने कहा कि शांतिसागर महाराज ने जन-जन को धर्म से जोड़ने का कार्य किया। उनके प्रयासों से देश के विभिन्न क्षेत्रों में दिगंबर जैन साधुओं के निर्बाध विहार और धर्मोपदेश के लिए अनुकूल वातावरण तैयार हुआ। उनका त्याग, तपस्या और धर्म के प्रति समर्पण आज भी समाज के लिए प्रेरणास्रोत है।

महामंडल विधान के दौरान मंदिर परिसर भक्तिमय वातावरण से गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने मंडल पर अर्घ्य अर्पित कर आचार्य शांतिसागर महाराज के प्रति श्रद्धा व्यक्त की। भगवान की शांतिधारा करने का सौभाग्य नवीन जैन एवं प्रवीण कुमार जैन (चेंटा वाले) परिवार को प्राप्त हुआ। धार्मिक क्रियाएं प्रतिष्ठाचार्य विद्वत् श्री महेंद्रकुमार जैन शास्त्री, विद्वत् श्री नवनीत जैन शास्त्री एवं पं. मनोज कुमार जैन ने विधि-विधानपूर्वक संपन्न कराईं।
16 सितंबर से शुरू होगा दसलक्षण पर्व
दिगंबर जैन समाज में दसलक्षण पर्व 16 से 25 सितंबर तक मनाया जाएगा। इस दौरान श्रद्धालु व्रत, पूजन, आराधना, तप और संयम के माध्यम से आत्मशुद्धि का प्रयास करेंगे। मुनिश्री उपशांतसागरजी महाराज ने कहा कि दसलक्षण पर्व त्याग, तपस्या, संयम और साधना का पर्व है। यह मन की निर्मलता, अहिंसा, जीवदया और परोपकार की भावना को मजबूत करने की प्रेरणा देता है।

चोरी हुए रजत छत्रों की होगी पुनः स्थापना
श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन बड़ा मंदिर में रविवार, 13 सितंबर को रिद्धि-सिद्धि योग के अवसर पर भगवान श्री मुनिसुव्रतनाथ का महामस्तकाभिषेक, वेदी शुद्धि, चोरी हुए रजत छत्रों की पुनः स्थापना और यागमंडल विधान आयोजित किया जाएगा। मंदिर कमेटी एवं वर्षायोग समिति ने सकल दिगंबर जैन समाज से अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर आयोजन को सफल बनाने का आह्वान किया है। कार्यक्रम के बाद श्रद्धालुओं के लिए स्वल्पाहार की व्यवस्था भी रहेगी।

