अबोल प्राणी करुणा दिवस पर महिदपुर रोड सकल जैन श्री संघ द्वारा सामूहिक आयंबिल तप का आयोजन किया गया, जिसमें 37 तपस्वियों ने भाग लेकर जीव दया और करुणा का संदेश दिया।
अबोल प्राणी करुणा दिवस पर हुआ सामूहिक आयंबिल तप का आयोजन
अबोल प्राणी करुणा दिवस के पावन अवसर पर महिदपुर रोड सकल जैन श्री संघ द्वारा गुरुवार को सामूहिक आयंबिल तप का भव्य आयोजन किया गया। अखिल भारतीय राजेंद्र जैन परिषद परिवार के आह्वान पर आयोजित इस धार्मिक एवं करुणामय आयोजन में नगर के जैन समाज के लोगों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।
कार्यक्रम में 50 से अधिक घरों के 37 महानुभावों ने सामूहिक रूप से आयंबिल तप कर जीव दया, करुणा और प्राणी मात्र के प्रति प्रेम का संदेश दिया। आयोजन के दौरान पूरे वातावरण में धार्मिकता, सेवा और करुणा का भाव दिखाई दिया।
महिदपुर रोड जैन समाज द्वारा करुणा दिवस पर अनूठा आयोजन
महिदपुर रोड सकल जैन श्री संघ द्वारा आयोजित यह कार्यक्रम केवल धार्मिक आयोजन नहीं था, बल्कि समाज को जीवों के प्रति संवेदनशील बनाने का प्रेरणादायक प्रयास भी था।अबोल प्राणी करुणा दिवस पर तप के माध्यम से अबोल प्राणियों एवं जीवों को शाता पहुंचाने का यह करुणामय कार्य समाज के लोगों के लिए विशेष प्रेरणा का केंद्र बना।जैन समाज हमेशा से अहिंसा, दया और करुणा के संदेश को समाज तक पहुंचाता आया है और यही भावना इस आयोजन में भी देखने को मिली।
37 तपस्वियों ने किया सामूहिक आयंबिल तप
इस विशेष आयोजन में 50 से अधिक परिवारों के 37 तपस्वियों ने सहभागिता कर आयंबिल तप किया। तपस्वियों ने संयम, साधना और आत्मशुद्धि के इस तप को पूरी श्रद्धा और भक्ति के साथ संपन्न किया।आयंबिल तप जैन धर्म में आत्मसंयम और तपस्या का महत्वपूर्ण माध्यम माना जाता है। यह तप शरीर एवं आत्मा दोनों की शुद्धि का संदेश देता है।
करुणा और जीव दया का दिया संदेश
अबोल प्राणी करुणा दिवस के माध्यम से समाज को यह संदेश दिया गया कि प्रत्येक जीव के प्रति दया और संवेदना रखना मानवता का सबसे बड़ा धर्म है।आज के समय में जहां हिंसा और स्वार्थ बढ़ रहा है, वहीं ऐसे आयोजन समाज में सकारात्मक ऊर्जा और आध्यात्मिक चेतना का संचार करते हैं।जैन धर्म का मूल सिद्धांत “अहिंसा परमो धर्म:” भी यही सिखाता है कि हर जीव की रक्षा और सम्मान करना हमारा कर्तव्य है।
सचिन भंडारी ने दी आयोजन की जानकारी
जैन समाज के मीडिया प्रभारी सचिन भंडारी ने जानकारी देते हुए बताया कि सभी महानुभावों को आयंबिल तप कराने का मंगलकारी लाभ लाभार्थी परिवारों द्वारा लिया गया।उन्होंने बताया कि इस आयोजन का उद्देश्य समाज में जीव दया और करुणा की भावना को मजबूत करना है।
इन लाभार्थी परिवारों ने लिया तप कराने का मंगलकारी लाभ
इस धार्मिक आयोजन में तप कराने का मंगलकारी लाभ निम्न परिवारों द्वारा लिया गया:
- अलका जितेंद्र कोचर परिवार
- प्रतिभा सुनील भंडारी परिवार
- अंगूरबाला राकेश कोचर परिवार
इन परिवारों द्वारा किए गए इस पुण्य कार्य की समाजजनों ने खूब सराहना की।
तपस्वियों का अक्षत-कुमकुम से हुआ सम्मान
श्री संघ के सभी सम्माननीय अनुभावों द्वारा तपस्वियों का अक्षत एवं कुमकुम से तिलक लगाकर बहुमान किया गया।सभी तपस्वियों की बारंबार अनुमोदना करते हुए समाजजनों ने उनके तप, संयम और साधना की प्रशंसा की।इसके साथ ही लाभार्थी परिवारों का भी जैन श्री संघ द्वारा विशेष बहुमान किया गया।
समाज के लोगों ने प्राप्त किया पुण्य लाभ
इस मंगलकारी अवसर पर समाज के सभी महानुभाव उपस्थित रहे और धार्मिक वातावरण में पुण्य लाभ प्राप्त किया।कार्यक्रम के दौरान धार्मिक भक्ति, सेवा भावना और सामाजिक एकता का सुंदर दृश्य देखने को मिला।
जैन धर्म में आयंबिल तप का विशेष महत्व
क्या है आयंबिल तप?
आयंबिल तप जैन धर्म का एक विशेष तप है जिसमें अत्यंत सादा एवं संयमित भोजन ग्रहण किया जाता है।
आत्मशुद्धि का माध्यम
यह तप मन, वचन और काया की शुद्धि का माध्यम माना जाता है।
आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार
आयंबिल तप से आत्मबल बढ़ता है और व्यक्ति के भीतर आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार होता है।
अबोल प्राणी करुणा दिवस क्यों है महत्वपूर्ण
अबोल प्राणी करुणा दिवस केवल धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि समाज को जीवों के प्रति संवेदनशील बनाने का अभियान है।यह दिवस हमें सिखाता है कि:
- हर जीव में आत्मा होती है
- दया और करुणा सबसे बड़ा धर्म है
- जीवों की रक्षा करना मानवता है
- अहिंसा ही सच्चा मार्ग है
समाज में बढ़ रही है करुणा और सेवा की भावना
महिदपुर रोड जैन समाज द्वारा किए गए ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को संस्कार और आध्यात्मिकता से जोड़ने का कार्य कर रहे हैं।धार्मिक आयोजनों के माध्यम से समाज में:
- सेवा भावना
- करुणा
- दया
- संयम
- सामाजिक एकता
जैसे मूल्यों को मजबूती मिल रही है।

