Morena के ज्ञानतीर्थ में भगवान आदिनाथ का भव्य महामस्तकाभिषेक हुआ। आचार्य उदारसागर महाराज ने श्रद्धालुओं को भगवान महावीर के सिद्धांत अपनाने का संदेश दिया।
Morena ज्ञानतीर्थ में भगवान आदिनाथ का भव्य महामस्तकाभिषेक, जयकारों से गूंजा परिसर
आचार्य उदारसागर महाराज ने दिया आत्मनिरीक्षण का संदेश, कहा—भगवान महावीर के सिद्धांतों को जीवन में अपनाने से ही मानव जीवन होगा सार्थक
मुरैना। मनोज जैन नायक, दैनिक स्वराज वाणी।
मध्यप्रदेश के मुरैना स्थित श्री आदिनाथ दिगम्बर जैन ज्ञानतीर्थ क्षेत्र में वार्षिक महामस्तकाभिषेक महोत्सव श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ संपन्न हुआ। ज्ञानतीर्थ महाआराधक परिवार द्वारा आयोजित इस धार्मिक महोत्सव में आचार्यश्री उदारसागर महाराज एवं मुनिश्री उपशांत सागर महाराज ससंघ का पावन सान्निध्य प्राप्त हुआ।
महोत्सव के दौरान 54 फुट ऊंची कृत्रिम पहाड़ी पर विराजमान भगवान आदिनाथ का श्रद्धालुओं ने चांदी के कलशों से महामस्तकाभिषेक किया। भगवान आदिनाथ के जयकारों से पूरा ज्ञानतीर्थ परिसर गूंज उठा। आयोजन में आगरा, ग्वालियर, जौरा, बानमोर, धौलपुर, अम्बाह सहित विभिन्न स्थानों से बड़ी संख्या में जैन समाज के श्रद्धालु शामिल हुए।
भगवान महावीर के सिद्धांतों को जीवन में उतारें : आचार्य उदारसागर
धर्मसभा को संबोधित करते हुए आचार्यश्री उदारसागर महाराज ने कहा कि भगवान महावीर स्वामी के अनुयायी होने पर गर्व करना अच्छी बात है, लेकिन उनके सिद्धांतों का केवल प्रचार करना पर्याप्त नहीं है। वास्तविक धर्म वही है, जिसे व्यक्ति अपने आचरण में उतारे।
उन्होंने कहा कि यदि मनुष्य भगवान महावीर के सिद्धांतों को अपने जीवन में अपनाए, तो उसका वर्तमान जीवन सार्थक होने के साथ भविष्य भी बेहतर बन सकता है।
आचार्यश्री ने श्रद्धालुओं को आत्मनिरीक्षण का संदेश देते हुए कहा कि दूसरों की कमियां खोजने के बजाय व्यक्ति को अपने अवगुणों को पहचानकर उन्हें दूर करने का प्रयास करना चाहिए। मन की निर्मलता और अच्छे आचरण से ही जीवन में सकारात्मक परिवर्तन संभव है।
ज्ञानतीर्थ की धरोहर का संरक्षण सभी की जिम्मेदारी
मुनिश्री उपशांत सागर महाराज ने धर्मसभा में कहा कि समाधिस्थ सराकोद्धारक आचार्यश्री ज्ञानसागर महाराज ने ज्ञानतीर्थ के रूप में समाज को एक अनमोल धार्मिक धरोहर प्रदान की है।
उन्होंने कहा कि इस धरोहर का संरक्षण और विकास करना प्रत्येक समाजजन की जिम्मेदारी है। सभी को आपसी एकता, सहयोग और समर्पण के साथ ज्ञानतीर्थ के विकास में योगदान देना चाहिए।
मुनिश्री ने कहा कि आचार्य ज्ञानसागर महाराज भले ही आज हमारे बीच सशरीर उपस्थित नहीं हैं, लेकिन उनके आदर्श, संस्कार और शिक्षाएं सदैव समाज का मार्गदर्शन करती रहेंगी।
चांदी के कलशों से हुआ भगवान आदिनाथ का महामस्तकाभिषेक
महोत्सव का शुभारंभ मंगलाचरण के साथ हुआ। इसके बाद समाधिस्थ आचार्यश्री ज्ञानसागर महाराज के चित्र का अनावरण एवं दीप प्रज्वलन किया गया।
आचार्यश्री उदारसागर महाराज एवं मुनिश्री उपशांत सागर महाराज के पाद प्रक्षालन और शास्त्र भेंट की धार्मिक क्रियाएं संपन्न हुईं।
प्रतिष्ठाचार्य पंडित संजय शास्त्री, सिहोनिया के निर्देशन में धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किए गए। महामस्तकाभिषेक का प्रथम कलश प्रेमचंद पंकज जैन एवं वंदना साड़ी परिवार ने अर्पित किया।
शांतिधारा का सौभाग्य सुरेशचंद सुनीत जैन, पलपुरा तथा प्रेमलता ललित जैन को प्राप्त हुआ। सतीशचंद जैन, वीरेंद्रकुमार जैन एवं नवीनकुमार जैन ने भी भगवान आदिनाथ का कलशाभिषेक किया।
इस दौरान भगवान आदिनाथ की प्रतिमा पर चांदी के कलशों से प्रासुक जल की धारा प्रवाहित की गई। मंत्रोच्चारण और भक्तिमय वातावरण के बीच श्रद्धालुओं ने भगवान आदिनाथ की आराधना की।
निर्माणाधीन जिनालय के लिए सहयोग की घोषणा
महोत्सव के दौरान नगर के श्रावक श्रेष्ठी महेशचंद्र बंगाली एवं राहुल जैन, अजहेड़ा परिवार ने ज्ञानतीर्थ में निर्माणाधीन जिनालय के लिए आर्थिक सहयोग देने की घोषणा की।
आयोजन समिति ने विभिन्न स्थानों से पहुंचे अतिथियों एवं साधर्मी बंधुओं का स्वागत और सम्मान किया। श्रद्धालुओं के आवागमन के लिए निःशुल्क वाहन व्यवस्था भी की गई थी।
कार्यक्रम के समापन पर सभी श्रद्धालुओं के लिए वात्सल्य भोज का आयोजन किया गया।
ज्ञानतीर्थ में आयोजित इस वार्षिक महामस्तकाभिषेक महोत्सव ने धार्मिक आस्था, सामाजिक एकता, आत्मशुद्धि और भगवान महावीर के सिद्धांतों को जीवन में अपनाने का संदेश दिया।


