अरुणाचल में कई जगह भारत-चीन के सैनिक आमने-सामने, ITBP प्रमुख ने जुलाई से जारी गतिरोध की पुष्टि की
सीमा पर फिर बढ़ी चर्चा
भारत और चीन के बीच सीमा पर तनाव एक बार फिर चर्चा में है। भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) के महानिदेशक शत्रुजीत सिंह कपूर ने पुष्टि की है कि अरुणाचल प्रदेश में कई स्थानों पर भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच आमने-सामने की स्थिति बनी हुई है। उनके अनुसार जुलाई 2026 से शुरू हुआ यह गतिरोध अब तक पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। यह बयान ऐसे समय आया है, जब दोनों देशों के बीच सीमा विवाद सुलझाने के लिए बातचीत भी जारी है।
अलवर में जवानों को संबोधन
राजस्थान के अलवर में जवानों को संबोधित करते हुए ITBP प्रमुख ने कहा कि हाल के दिनों में अरुणाचल प्रदेश के कई इलाकों में चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी के सैनिकों के साथ आमना-सामना हुआ है। उन्होंने ITBP की विशेष कमांडो टीमों की भूमिका की सराहना भी की, जिन्होंने ऐसी परिस्थितियों में अपनी क्षमता दिखाई है।
तवांग क्षेत्र में तनाव
रिपोर्टों के मुताबिक, अरुणाचल प्रदेश के अपर सुबनसिरी जिले में तक्सिंग क्षेत्र के पास माजा बेस के आसपास जुलाई में भारतीय और चीनी गश्ती दल आमने-सामने आए थे। इसके बाद चीनी सैनिकों की ओर से इस इलाके में दोबारा तंबू लगाए जाने की जानकारी सामने आई। रिपोर्टों में दावा किया गया कि ये तंबू भारत की वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) की समझ के मुताबिक सीमा से करीब 6 से 7 किलोमीटर की दूरी पर थे।
ITBP प्रमुख के बयान से स्पष्ट हुआ है कि अरुणाचल प्रदेश में कई स्थानों पर तनाव की स्थिति बनी हुई है। हालांकि, सीमा पर आमने-सामने आने की स्थिति और किसी क्षेत्र पर कब्जे के दावे अलग-अलग बातें हैं। भारतीय सेना पहले कुछ रिपोर्टों में चीनी घुसपैठ और नए निर्माण से जुड़े आरोपों को खारिज कर चुकी है।
‘शौर्य कमांडो’ तैयार
ITBP प्रमुख ने बताया कि बल ने ‘शौर्य कमांडो’ नाम से विशेष लड़ाकू टीम तैयार की है। इन कमांडो को ऊंचाई वाले दुर्गम इलाकों में चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों का सामना करने के लिए प्रशिक्षित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि शौर्य कमांडो ने अरुणाचल प्रदेश में चीनी सैनिकों के साथ जारी आमने-सामने की स्थितियों के दौरान अपनी क्षमता का प्रदर्शन किया है।
योजना के मुताबिक, इन कमांडो को ITBP की हर सीमा बटालियन में शामिल किया जाएगा। बल का लक्ष्य एक पूरी बटालियन के बराबर विशेष कमांडो तैयार करना है। इसके अलावा, गलवान जैसी परिस्थितियों से निपटने के लिए जवानों को विशेष प्रशिक्षण देने पर भी जोर दिया जा रहा है।
ड्रोन और एंटी-ड्रोन तकनीक पर जोर
ITBP प्रमुख ने कहा कि आधुनिक युद्ध में ड्रोन और एंटी-ड्रोन तकनीक की भूमिका तेजी से बढ़ी है। रूस-यूक्रेन युद्ध और ईरान से जुड़े संघर्षों का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि अब केवल पारंपरिक सैन्य तरीकों के भरोसे रहना पर्याप्त नहीं है। चीन ने भी अपने सैन्य संसाधनों और तकनीक का आधुनिकीकरण किया है, इसलिए भारत को अपनी क्षमताएं लगातार बढ़ानी होंगी।
उन्होंने बताया कि ITBP ने सीमावर्ती इकाइयों में ड्रोन प्लाटून तैयार की हैं। बल के आधुनिकीकरण के लिए मिलने वाले बजट का बड़ा हिस्सा ड्रोन तकनीक पर खर्च किया जा रहा है। साथ ही ड्रोन संचालन और उनसे निपटने की क्षमताओं को बेहतर बनाने पर काम हो रहा है।
भूमिगत बंकर की तैयारी
ITBP प्रमुख ने सीमावर्ती इलाकों में भूमिगत शेल्टर और बंकर बनाने की जरूरत पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि युद्ध जैसी स्थिति में जमीन के ऊपर बने ढांचे निशाना बन सकते हैं, इसलिए जवानों की सुरक्षा के लिए भूमिगत सुविधाएं महत्वपूर्ण हैं।
बातचीत जारी, फिर भी तनाव
भारत और चीन के बीच सीमा पर शांति बनाए रखने के लिए सैन्य और राजनयिक स्तर पर बातचीत जारी है। इसके बावजूद अरुणाचल प्रदेश में आमने-सामने की स्थिति बने रहने की ITBP प्रमुख की पुष्टि ने सीमा सुरक्षा और सैन्य तैयारियों को लेकर चर्चा तेज कर दी है।
