दीपावली से पहले 1 नवंबर को बनेगा रविपुष्यामृत योग, खरीदारी के लिए रहेगा शुभ संयोग
खरीदारी और नए कार्यों के शुभारंभ के लिए विशेष संयोग; रविपुष्य के साथ रहेगा सर्वार्थ सिद्धि योग
मनोज जैन नायक
मुरैना दीपावली से पहले रविवार, 1 नवंबर को रविपुष्यामृत योग का विशेष संयोग बन रहा है। ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार, इस योग में खरीदारी और नए कार्यों का शुभारंभ करना अच्छा माना जाता है। दीपावली की तैयारियों के बीच यह दिन बाजारों में खरीदारी के लिए भी खास रहने की उम्मीद है।
वरिष्ठ ज्योतिषाचार्य डॉ. हुकुमचंद जैन ने बताया कि 27 नक्षत्रों में पुष्य नक्षत्र को विशेष शुभ और प्रभावशाली माना गया है। जब पुष्य नक्षत्र का संयोग रविवार को बनता है, तब इसे रविपुष्यामृत योग कहा जाता है। गुरुवार के दिन पुष्य नक्षत्र होने पर गुरुपुष्यामृत योग बनता है। इस वर्ष 1 नवंबर, रविवार को पुष्य नक्षत्र होने के कारण रविपुष्यामृत योग का संयोग रहेगा।
सुबह से अगले दिन रात तक रहेगा पुष्य नक्षत्र
डॉ. जैन के अनुसार, 1 नवंबर को पुष्य नक्षत्र प्रातः 5:40 बजे से प्रारंभ होगा और अगले दिन, 2 नवंबर को रात्रि 4:31 बजे तक रहेगा। इस अवधि में खरीदारी करने और नए काम शुरू करने के लिए शुभ मुहूर्त माना गया है। दीपावली से पहले जरूरी वस्तुओं की खरीदारी करने वाले लोग इस दिन का लाभ उठा सकते हैं।
उन्होंने बताया कि पुष्य नक्षत्र को शुभ कार्यों के लिए श्रेष्ठ माना जाता है। जिस प्रकार जंगल के पशुओं में सिंह का विशेष स्थान होता है, उसी प्रकार नक्षत्रों में पुष्य को महत्वपूर्ण माना गया है। इसी वजह से पुष्य नक्षत्र के संयोग को खरीदारी और शुभ कार्यों के लिए विशेष महत्व दिया जाता है।
सोना-चांदी और व्यापारिक वस्तुओं की खरीदारी
ज्योतिषाचार्य डॉ. जैन के मुताबिक, रविपुष्यामृत योग में सोना-चांदी, आभूषण और सिक्के खरीदना शुभ माना जाता है। इसके साथ ही व्यापार से जुड़ी वस्तुएं, दुकान या प्रतिष्ठान के उपकरण, बहीखाते और लेखा पुस्तकों की खरीदारी भी की जा सकती है। दुकान या प्रतिष्ठान का शुभारंभ करने की योजना बना रहे लोगों के लिए भी यह दिन विशेष अवसर हो सकता है।
मान्यता है कि पुष्य नक्षत्र में खरीदी गई वस्तुएं स्थायित्व और समृद्धि का प्रतीक होती हैं। इसी कारण दीपावली के समय लोग इस संयोग में सोना-चांदी, पूजन सामग्री, कपड़े और घर के लिए जरूरी सामान खरीदना पसंद करते हैं। हालांकि, खरीदारी व्यक्ति की जरूरत और सामर्थ्य के अनुसार ही करनी चाहिए।
रविपुष्य के साथ सर्वार्थ सिद्धि योग
डॉ. हुकुमचंद जैन ने बताया कि 1 नवंबर को रविपुष्यामृत योग के साथ सर्वार्थ सिद्धि योग का संयोग भी रहेगा। इसी दिन कालाष्टमी और अहोई अष्टमी भी मनाई जाएगी। उनके अनुसार, दोपहर 2:52 बजे से इन पर्वों से संबंधित विशेष संयोग रहेगा।
एक ही दिन कई पर्वों और शुभ योगों का संयोग होने से धार्मिक और पारिवारिक गतिविधियों के लिए भी यह दिन महत्वपूर्ण रहेगा। अहोई अष्टमी पर व्रत और पूजन करने वाली महिलाएं तथा कालाष्टमी से जुड़े श्रद्धालु अपनी परंपराओं के अनुसार पूजा-अर्चना करेंगे। पर्वों की पूजा और व्रत के समय के बारे में स्थानीय पंचांग या परिवार की परंपरा के अनुसार जानकारी लेना उचित रहेगा।
दीपावली की तैयारियों के लिए खास अवसर
रविपुष्यामृत योग के अवसर पर बाजारों में देर रात तक खरीदारी होने की संभावना है। दीपावली पूजन की सामग्री, कपड़े, सोना-चांदी के सिक्के, इलेक्ट्रॉनिक सामान और व्यापार से जुड़ी वस्तुओं की खरीदारी के लिए लोग इस दिन को शुभ मानते हैं। मकान, दुकान या अन्य संपत्ति के अनुबंध की योजना बना रहे लोग भी इस संयोग को महत्व देते हैं।
ज्योतिषाचार्य के अनुसार, 1 नवंबर का दिन दीपावली की तैयारियों और नए कामों की शुरुआत के लिए विशेष माना जाएगा। रविपुष्यामृत योग और सर्वार्थ सिद्धि योग के संयोग के कारण बाजारों में रौनक रहने की उम्मीद है। लोग अपनी सुविधा के अनुसार खरीदारी कर सकते हैं और शुभ कार्यों की योजना बना सकते हैं।
