—Advertisement—

Morena में धर्मसभा: आचार्यश्री बोले, पाप कर्म सद्बुद्धि हरकर पतन की ओर ले जाता है

Author Picture
Published On: 22 October 2026
Morena

—Advertisement—

 

पाप कर्म का उदय होने पर राजा से रंक तक कोई नहीं बच सकता: आचार्यश्री उदारसागर

Morena (मनोज जैन नायक)

कर्म का सिद्धांत अटल

नगर में चातुर्मासरत आचार्यश्री उदारसागर महाराज ने बड़े जैन मंदिर में धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि जैन दर्शन के अनुसार प्रत्येक जीव अपने कर्मों का स्वयं कर्ता और भोक्ता है। कर्म का सिद्धांत अटल है। मनुष्य जैसा कर्म करता है, उसे उसके अनुरूप फल भोगना पड़ता है। पाप कर्म किसी व्यक्ति की प्रतिष्ठा, पद, धन या शक्ति को देखकर अपना प्रभाव नहीं बदलता। राजा हो या रंक, मंत्री हो या करोड़पति, कर्मों के उदय के समय कोई भी उनके फल से पूरी तरह बच नहीं सकता।

पाप की शुरुआत और आत्मिक पतन

आचार्यश्री ने कहा कि पाप कर्म की शुरुआत मनुष्य की वृत्तियों में आए विकारों से होती है। जब व्यक्ति पहली बार अनुचित कार्य करता है, तब उसका विवेक उसे भीतर से रोकता है और आत्मा में संकोच का भाव उत्पन्न होता है। लेकिन जब वह बार-बार उसी पाप को दोहराता है, तो उसकी संवेदनशीलता कम होने लगती है। धीरे-धीरे गलत कार्य भी सामान्य लगने लगता है। अंततः स्थिति ऐसी हो जाती है कि वह पाप को पाप मानना ही छोड़ देता है और अनुचित कार्य करने में गर्व अनुभव करने लगता है। यही अवस्था आत्मिक पतन का कारण बनती है।

अनुकूल में विनम्र, प्रतिकूल में धैर्यवान

उन्होंने कहा कि जब पुण्य कर्मों का उदय होता है, तब मनुष्य को धन, वैभव, प्रतिष्ठा और सफलता मिल सकती है। ऐसे समय में यदि वह विवेक खोकर अहंकार में डूब जाता है और अपने सामर्थ्य को ही सब कुछ मानने लगता है, तो पाप कर्म का उदय होने पर उसका अहंकार चूर-चूर हो जाता है। इसलिए मनुष्य को अनुकूल परिस्थितियों में विनम्र और प्रतिकूल परिस्थितियों में धैर्यवान बने रहना चाहिए। आचार्यश्री ने कहा कि राग-द्वेष, क्रोध, मान, माया और लोभ से दूर रहकर ही कर्मबंध को कम किया जा सकता है। आत्मकल्याण के लिए सदाचार, संयम और सम्यक दृष्टि अपनाना आवश्यक है।

मुनिश्री उपशांतसागर: सबसे बड़ा शत्रु भीतर है

मुनिश्री उपशांतसागर महाराज ने प्रवचन में कहा कि मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु बाहर नहीं, बल्कि उसके भीतर छिपे कषाय और विकार हैं। जब तक व्यक्ति अपने दोषों को पहचानने के बजाय दूसरों की गलतियां खोजता रहता है, तब तक आत्मशुद्धि का मार्ग प्रशस्त नहीं हो पाता। उन्होंने कहा कि अहिंसा, सत्य, अचौर्य, ब्रह्मचर्य और अपरिग्रह जैसे सिद्धांत केवल धार्मिक उपदेश नहीं, बल्कि जीवन को पवित्र बनाने की साधना हैं। इनका पालन करने वाला व्यक्ति स्वयं भी शांति का अनुभव करता है और दूसरों के लिए भी कल्याणकारी बनता है।

whatsapp image 2026 10 22 at 1.10.13 am 1

विचारों, वाणी और व्यवहार की शुद्धता

मुनिश्री ने कहा कि पाप कर्म से बचने के लिए केवल बाहरी आडंबर पर्याप्त नहीं है। इसके लिए विचारों, वाणी और व्यवहार की शुद्धता जरूरी है। किसी के प्रति ईर्ष्या रखना, दूसरे का अहित चाहना, छल-कपट करना या अपने स्वार्थ के लिए किसी को कष्ट पहुंचाना भी आत्मा को अशुद्ध करने वाले भाव हैं। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को प्रतिदिन आत्मनिरीक्षण करना चाहिए कि उसने दिनभर में कौन-से शुभ और अशुभ भाव उत्पन्न किए। अपनी भूल स्वीकार करना, पश्चाताप करना और भविष्य में उसे न दोहराने का संकल्प लेना आत्मसुधार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

समभाव और वास्तविक संपदा

उन्होंने कहा कि पुण्य मिलने पर इतराना और विपरीत परिस्थितियों में दूसरों को दोष देना सम्यक दृष्टि नहीं है। सुख और दुख दोनों में समभाव बनाए रखना जैन साधना का महत्वपूर्ण अंग है। संसार की संपत्ति, पद और प्रतिष्ठा स्थायी नहीं हैं। वास्तविक संपदा आत्मा की निर्मलता, उत्तम आचरण और संयम है। जो व्यक्ति अपने भीतर के क्रोध, मान, माया और लोभ को नियंत्रित करने का प्रयास करता है, वह आत्मिक उन्नति की ओर बढ़ता है।

जीवन की सार्थकता

मुनिश्री ने कहा कि जीवन की सार्थकता दूसरों को पराजित करने में नहीं, बल्कि अपने विकारों पर विजय पाने में है। पाप से बचने का संकल्प, जीवों के प्रति करुणा, सत्य का आचरण और आत्मचिंतन मनुष्य को धर्म के वास्तविक स्वरूप से जोड़ते हैं। प्रत्येक व्यक्ति को ऐसे कार्य करने चाहिए, जिनसे किसी जीव को पीड़ा न पहुंचे और आत्मा की शुद्धि का मार्ग प्रशस्त हो। यही धर्म का वास्तविक उद्देश्य और मानव जीवन की श्रेष्ठ उपलब्धि है।

 

कुमकुम सोनी स्वराज वाणी न्यूज मे कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है। इन्होंने स्नातक पत्रकारिता एवं जनसंचार से की है। यह विशेषतः राजनीति एवं भू-राजनीति से जुड़े मुद्दों का गहन विशलेषण कर सरल भाषा में आम जनता के समक्ष प्रस्तुत करने का प्रयास करती है।… Read More

Related News
Breaking News हमेशा आपके पास

SwarajVani App Install करें

Latest India News & Breaking Updates — सीधे Home Screen पर

Offline पढ़ें Breaking Alerts बिल्कुल Free
SwarajVani को iPhone पर install करें:
📤 Share बटन दबाएं → "Add to Home Screen" select करें
Home
Web Stories
Instagram
WhatsApp