सड़क हादसे के बाद कौन-से दस्तावेज आएंगे काम? बीमा क्लेम के लिए संभालकर रखें ये कागज
वाहन के दस्तावेज, दुर्घटना की तस्वीरें, पुलिस रिपोर्ट और इलाज से जुड़े रिकॉर्ड आगे चलकर हो सकते हैं जरूरी
भोपाल। सड़क दुर्घटना के बाद वाहन और उससे जुड़े दस्तावेज संभालकर रखना जरूरी है। हादसे के समय कई लोग घबराहट में घटनास्थल की तस्वीरें लेना, दूसरे वाहन की जानकारी नोट करना या मरम्मत के बिल सुरक्षित रखना भूल जाते हैं। बाद में बीमा क्लेम, पुलिस जांच या कानूनी प्रक्रिया के दौरान इन रिकॉर्ड की जरूरत पड़ सकती है। इसलिए दुर्घटना के तुरंत बाद उपलब्ध जानकारी और कागजात को व्यवस्थित रखना उपयोगी होता है।
सबसे पहले सुरक्षित रहें और बीमा कंपनी को सूचना दें
दुर्घटना के बाद सबसे पहले घायलों की मदद और सुरक्षा पर ध्यान दें। जरूरत पड़ने पर पुलिस और एंबुलेंस को सूचना दें। इसके बाद अपनी बीमा कंपनी या उसके हेल्पलाइन नंबर पर हादसे की जानकारी दें और क्लेम दर्ज करने की प्रक्रिया पूछें। क्लेम नंबर, सूचना देने की तारीख और बीमा कंपनी से हुई बातचीत का रिकॉर्ड संभालकर रखें।
हादसे के बाद वाहन की मरम्मत शुरू कराने से पहले बीमा कंपनी से पूछना जरूरी है कि निरीक्षण या सर्वे की प्रक्रिया क्या होगी। कैशलेस सुविधा लेने पर वाहन को बीमा कंपनी के नेटवर्क गैराज में ले जाने की जरूरत पड़ सकती है। बिना जानकारी लिए मरम्मत शुरू कराने पर क्लेम की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है, इसलिए अपनी पॉलिसी और बीमा कंपनी के निर्देशों का पालन करें।
वाहन और चालक के कागजात रखें तैयार
बीमा क्लेम के लिए वाहन का रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (RC), बीमा पॉलिसी और दुर्घटना के समय वाहन चला रहे व्यक्ति का ड्राइविंग लाइसेंस मांगा जा सकता है। इनके साथ बीमा कंपनी का क्लेम फॉर्म भी भरना पड़ सकता है। कागजात की साफ और पढ़ने योग्य प्रतियां रखें। मूल दस्तावेज केवल तब दें, जब बीमा कंपनी या संबंधित अधिकारी इसकी मांग करे।
भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (IRDAI) की सामान्य जानकारी के अनुसार मोटर बीमा क्लेम में भरा हुआ क्लेम फॉर्म, वाहन की RC, नुकसान का अनुमान, मरम्मत का बिल और भुगतान की रसीद मांगी जा सकती है। कैशलेस क्लेम में दस्तावेजों की जरूरत अलग हो सकती है और FIR भी जरूरत के अनुसार मांगी जा सकती है। इसलिए पॉलिसी की शर्तें और बीमा कंपनी की दस्तावेज सूची जरूर जांचें।
घटनास्थल की तस्वीरें और दूसरी जानकारी सुरक्षित रखें
यदि स्थिति सुरक्षित हो, तो दुर्घटनास्थल और वाहन को अलग-अलग कोणों से फोटो या वीडियो में दर्ज करें। वाहन को हुए नुकसान, सड़क की स्थिति, आसपास लगे संकेतक और दुर्घटना में शामिल दूसरे वाहन की नंबर प्लेट की तस्वीरें उपयोगी हो सकती हैं। दूसरे वाहन के चालक का नाम, संपर्क नंबर और वाहन का विवरण भी नोट करें। मौके पर मौजूद प्रत्यक्षदर्शियों के नाम और फोन नंबर मिल जाएं, तो उन्हें भी लिखकर रखें।
तस्वीरें लेते समय घायलों की मदद में देरी न करें और किसी को खतरे में डालकर रिकॉर्डिंग न करें। तस्वीरों और वीडियो की मूल फाइलें सुरक्षित रखें; उन्हें संपादित करने के बजाय एक अलग बैकअप भी बना लें। दुर्घटना के तुरंत बाद बनाई गई यह जानकारी बाद में घटना का क्रम समझाने में मदद कर सकती है।
पुलिस और मेडिकल रिकॉर्ड भी संभालें
अगर दुर्घटना में किसी को चोट आई है, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान हुआ है या पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज की है, तो FIR, पुलिस रिपोर्ट या अन्य उपलब्ध दस्तावेजों की प्रति संभालकर रखें। पुलिस से मिलने वाली रसीद, शिकायत की प्रति या जांच से संबंधित कागजात भी सुरक्षित रखें। हर दुर्घटना में एक जैसे दस्तावेज जरूरी नहीं होते; बीमा कंपनी या पुलिस मामले की परिस्थिति के अनुसार अतिरिक्त कागजात मांग सकती है।
घायल व्यक्ति के इलाज से जुड़े अस्पताल के रिकॉर्ड भी संभालें। इनमें डॉक्टर की पर्चियां, जांच रिपोर्ट, दवाइयों के बिल, अस्पताल में भर्ती और छुट्टी से जुड़े कागजात शामिल हो सकते हैं। यदि दुर्घटना में किसी अन्य व्यक्ति को चोट पहुंची है, तो उससे संबंधित दस्तावेज पुलिस और बीमा प्रक्रिया में मांगे जा सकते हैं।
मरम्मत का अनुमान, बिल और भुगतान की रसीद रखें
वाहन को गैराज में देने से पहले मरम्मत का अनुमान (एस्टिमेट) लें और उसकी प्रति सुरक्षित रखें। मरम्मत पूरी होने के बाद अंतिम बिल, भुगतान की रसीद और गैराज से मिले अन्य दस्तावेज संभालें। बीमा कंपनी के सर्वेयर ने वाहन का निरीक्षण किया हो, तो निरीक्षण से जुड़े संदेश या रिपोर्ट भी रखें। वाहन की टोइंग या सड़क किनारे सहायता के लिए भुगतान किया हो, तो उसकी रसीद भी फाइल में जोड़ें।
अलग-अलग क्लेम में दस्तावेज बदल सकते हैं
वाहन के अपने नुकसान, तीसरे पक्ष को हुए नुकसान और चोट से जुड़े दावों में मांगे जाने वाले कागजात अलग हो सकते हैं। चोरी के मामलों में प्रक्रिया और दस्तावेज भी दुर्घटना से जुड़े क्लेम से अलग होते हैं। इसलिए किसी सामान्य सूची को हर मामले पर लागू न मानें। पॉलिसी की शर्तें पढ़ें और बीमा कंपनी से लिखित रूप में जरूरी दस्तावेजों की सूची मांगें।
दुर्घटना से जुड़े सभी कागजात की एक फाइल बनाकर उनकी डिजिटल प्रतियां भी सुरक्षित रखना मददगार हो सकता है। इससे क्लेम दर्ज करते समय जानकारी ढूंढना आसान होगा और जरूरी रिकॉर्ड समय पर उपलब्ध रहेंगे।
