दो दिवसीय राष्ट्रीय अधिवेशन में उमड़ा आस्था, भक्ति और समर्पण का सैलाब
गच्छाधिपति नित्यसेन सूरीश्वरजी सहित गुरु भगवंतों का मिला मार्गदर्शन, हजारों गुरु भक्त हुए शामिल
दैनिक स्वराज वाणी
सचिन भंडारी, मीडिया प्रभारी, महिदपुर रोड जैन समाज
इंदौर। केसरी वाटिका में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय अधिवेशन में देशभर से आए हजारों गुरु भक्तों ने सहभागिता की। आस्था, श्रद्धा और समर्पण से भरे आयोजन में धर्म, संस्कार, सेवा और संगठन की एकजुटता का संदेश दिया गया। गच्छाधिपति श्री नित्यसेन सूरीश्वरजी महाराज साहब सहित गुरु भगवंतों के सान्निध्य में आयोजित अधिवेशन के दौरान परिसर गुरुदेव के मंगलकारी जयकारों से गूंज उठा।
मंगलाचरण और दीप प्रज्वलन से शुभारंभ
अधिवेशन का शुभारंभ मंगलाचरण एवं मंचासीन अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। इंदौर श्री संघ की ओर से चातुर्मास समिति अध्यक्ष नीरज सुराणा और श्री संघ अध्यक्ष धनराज संघवी ने स्वागत उद्बोधन दिया। उन्होंने उपस्थित गुरु भगवंतों, अतिथियों और देशभर से आए परिषद प्रतिनिधियों का स्वागत किया।
राष्ट्रीय परिषद से प्रकाश छाजेड़, तरुण परिषद से आदित्य धोखा सहित जयंतीलाल संघवी, मोहित तांतेड़, रमेश धाड़ीवाल, सुरेंद्र लोढ़ा और रमेश धरू ने संबोधित किया। भरतपुर ट्रस्ट अध्यक्ष बाबूलाल संघवी ने उपस्थित समाजजनों को द्विशताब्दी महोत्सव में आने का निमंत्रण दिया। राजेंद्र दगवाड़ा, मुकेश नाकोड़ा सहित संघ एवं परिषद के वरिष्ठजन और पदाधिकारी मंचासीन रहे।
सेवा से परोपकार का मार्ग प्रशस्त होता है: कश्यप
मुख्य अतिथि मध्यप्रदेश शासन के कैबिनेट मंत्री चैतन्य कश्यप ने कहा कि परिषद ने हमेशा सेवा कार्यों को महत्व दिया है। सेवा के माध्यम से परोपकार के कार्यों को आगे बढ़ाना चाहिए। उन्होंने अपने परिवार के योगदान का उल्लेख करते हुए बताया कि गुरु आज्ञा का पालन करते हुए विभिन्न कार्यों में सहभागिता की गई है।
गुरु भगवंतों ने धर्म के प्रति आस्था, जीवन में सदाचार, सेवा भावना और संगठन की शक्ति को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि आध्यात्मिक मूल्यों को जीवन में अपनाने से समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाया जा सकता है।
पद के मोह से ऊपर उठकर करें कार्य
पूज्य मुनिराज सिद्ध रत्नविजयजी महाराज साहब ने कहा कि पद का मोह छोड़कर समर्पण भाव से कार्य करना चाहिए। उन्होंने पूर्ण सम्राट द्वारा संघ एवं परिषद के लिए किए गए त्याग को स्मरण करते हुए प्रगति के पथ पर बढ़ने का आह्वान किया।
पूज्य मुनिराज विद्वरत्न विजयजी महाराज साहब ने स्वार्थ त्यागकर सेवा और समर्पण की भावना जागृत करने का संदेश दिया। उन्होंने परंपरा का पालन करते हुए परिषद की गरिमा को ऊंचाइयों तक पहुंचाने की प्रेरणा दी।
पूज्य मुनिराज चारित्र रत्न विजयजी महाराज साहब ने संस्था में अनुशासन की आवश्यकता बताई। धर्म और कर्तव्य का अंतर समझाते हुए उन्होंने कहा कि पद मिले या नहीं, व्यक्ति को अपने कार्यों का मूल्यांकन करवाना चाहिए। कार्यों की गुणवत्ता ऐसी हो कि पद स्वयं उसके पास आए।
युवा पीढ़ी को धर्म और संस्कार से जोड़ने का संदेश
पूज्य मुनिराज प्रसम सेम श्रीजी महाराज साहब ने कहा कि जहां त्याग और समर्पण होता है, वहां सफलता मिलती है। मानव जीवन के समय का सदुपयोग सदाचार, सेवा और परोपकार में करना चाहिए। उन्होंने मोबाइल, लैपटॉप और भौतिक साधनों में व्यस्त युवा पीढ़ी को धर्म तथा संस्कारों की ओर प्रेरित करने की आवश्यकता बताई। संगठन की एकजुटता को भी शक्ति का आधार बताया गया।
निःस्वार्थ सेवा के लिए सोहेब भाई का बहुमान
गुरु भगवंतों की सेवा में योगदान देने वाले सोहेब भाई का इंदौर संघ द्वारा बहुमान किया गया। आयोजकों के अनुसार, मुस्लिम धर्मावलंबी सोहेब भाई बिना आर्थिक लाभ की अपेक्षा के सेवा करते हैं। पूज्य मुनिराज विद्वरत्न विजयजी महाराज साहब ने उनकी सेवा भावना की अनुमोदना की।
शाखाओं ने प्रस्तुत किए सेवा कार्यों के प्रतिवेदन
देशभर की शाखाओं से आए अध्यक्षों और पदाधिकारियों ने जीवदया, परोपकार, सहायता, शिक्षा तथा चिकित्सा सहित विभिन्न क्षेत्रों में किए गए रचनात्मक कार्यों की जानकारी दी। आयोजन संपन्न कराने में राष्ट्रीय पदाधिकारी राजकमल दूगड़ का सहयोग रहा। विभिन्न शाखाओं से प्राप्त प्रतिवेदनों के आधार पर सेवा कार्यों के लिए पुरस्कार वितरण भी किया गया।
