अनूपपुर में नो-एंट्री के बावजूद भारी वाहनों की आवाजाही, यातायात व्यवस्था और कथित वसूली पर उठे सवाल
दैनिक स्वराज वाणी
संवाददाता: मदन मोहन मिश्रा
अनूपपुर। जिला मुख्यालय में नो-एंट्री व्यवस्था के बावजूद भारी वाहनों की आवाजाही को लेकर स्थानीय नागरिकों ने नाराजगी जताई है। लोगों का कहना है कि शहर के व्यस्त मार्गों, बाजार क्षेत्र और बस स्टैंड के आसपास भारी वाहनों के प्रवेश से यातायात प्रभावित होता है। जाम लगने से छोटे वाहन चालकों और पैदल राहगीरों को परेशानी होती है तथा दुर्घटनाओं की आशंका बनी रहती है। नागरिकों ने पुलिस और जिला प्रशासन से व्यवस्था की समीक्षा कर सुधार की मांग की है।
प्रतिबंधित समय में प्रवेश पर सवाल
शहर में भारी वाहनों का प्रवेश नियंत्रित करने के लिए नो-एंट्री व्यवस्था लागू है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि इसके बावजूद प्रतिबंधित समय में भारी वाहन शहर के भीतर पहुंच जाते हैं। इससे प्रमुख चौराहों और संकरे मार्गों पर वाहनों का दबाव बढ़ता है। लोगों के अनुसार, कई बार जाम की स्थिति संभालने के लिए कोतवाली पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ता है।
नागरिकों ने सवाल उठाया है कि प्रवेश बिंदुओं पर निगरानी होने के बावजूद भारी वाहन भीतर कैसे पहुंच रहे हैं। उनका कहना है कि निर्धारित समय के दौरान निगरानी और नियमों का पालन सुनिश्चित होना चाहिए। विशेष परिस्थितियों में प्रवेश की अनुमति दिए जाने की प्रक्रिया भी स्पष्ट होनी चाहिए।
हाईवे पर कथित इंट्री वसूली के आरोप
कुछ वाहन चालकों और स्थानीय नागरिकों ने हाईवे तथा संपर्क मार्गों पर यातायात अमले द्वारा कथित इंट्री वसूली के आरोप लगाए हैं। उनका आरोप है कि वाहन जांच और चालानी कार्रवाई की आड़ में पैसे लिए जाते हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और इन्हें स्थापित तथ्य नहीं माना जा सकता।
नागरिकों का कहना है कि ऐसी शिकायतों की निष्पक्ष जांच से वास्तविक स्थिति स्पष्ट होनी चाहिए। वाहन जांच और चालानी कार्रवाई के उद्देश्य तथा प्रक्रिया में पारदर्शिता रहने से लोगों का भरोसा बढ़ेगा। आरोपों पर संबंधित विभाग का पक्ष भी सामने आना आवश्यक है।
संपर्क मार्गों पर जांच, शहर में जाम की शिकायत
अनूपपुर-बिजुरी, अनूपपुर-अमरकंटक, अनूपपुर-वेंकटनगर और अनूपपुर-शहडोल शहर के प्रमुख संपर्क मार्ग हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार, इन मार्गों पर यातायात अमले की वाहन जांच की गतिविधियां दिखाई देती हैं। इसके बावजूद शहर के अंदर जाम, अव्यवस्थित पार्किंग और भारी वाहनों की आवाजाही से जुड़ी शिकायतें बनी हुई हैं।
लोगों ने मांग की है कि संपर्क मार्गों पर जांच के साथ शहर के व्यस्त स्थानों पर भी पर्याप्त बल तैनात किया जाए। चौराहों पर नियमित मौजूदगी और प्रवेश बिंदुओं पर निगरानी से यातायात संचालन में सुधार की अपेक्षा जताई गई है।
यातायात प्रभारी की कार्यप्रणाली पर नाराजगी
यातायात प्रभारी विनोद दुबे की कार्यप्रणाली को लेकर भी कुछ नागरिकों और वाहन चालकों ने सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि विभाग की सक्रियता वाहन जांच और चालानी कार्रवाई में अधिक दिखाई देती है, जबकि शहर की रोजमर्रा की यातायात समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं हो रहा है।
स्थानीय स्तर पर नो-एंट्री के समय भारी वाहनों के प्रवेश और तेज गति से चलने की शिकायतें भी उठाई गई हैं। नागरिकों का कहना है कि नियमों के उल्लंघन पर समान रूप से कार्रवाई होनी चाहिए और यातायात प्रबंधन में आम लोगों की सुरक्षा को प्राथमिकता मिलनी चाहिए।
पार्किंग और चौराहों पर व्यवस्था सुधारने की मांग
बाजार क्षेत्रों में सड़क किनारे खड़े वाहन और पार्किंग की अव्यवस्था भी परेशानी का कारण बताई गई है। भारी वाहन पहुंचने पर स्थिति और कठिन हो जाती है। नागरिकों ने पार्किंग व्यवस्था सुधारने, प्रवेश एवं निकास बिंदुओं की निगरानी बढ़ाने तथा प्रमुख चौराहों पर प्रभावी तैनाती की मांग की है।
वरिष्ठ अधिकारियों से समीक्षा की अपेक्षा
नागरिकों ने पुलिस अधीक्षक विक्रांत मुराब और जिला प्रशासन से नो-एंट्री व्यवस्था की समीक्षा तथा शिकायतों पर कार्रवाई की मांग की है। उपलब्ध विवरण में संबंधित अधिकारियों की प्रतिक्रिया शामिल नहीं है। विभागीय पक्ष और जांच के निष्कर्ष सामने आने पर कथित वसूली तथा व्यवस्था संबंधी आरोपों की स्थिति स्पष्ट होगी।

