एडवांस लीडरशिप कैंप में नागदा के कैडेट्स ने सीखे नेतृत्व के गुण, एसएसबी चयन प्रक्रिया की मिली जानकारी
रायपुर में आयोजित एनसीसी के एडवांस लीडरशिप कैंप (एएलसी) 2026 में पीजी कॉलेज नागदा के कॉर्पोरल रोहित डाबिया और लांस कॉर्पोरल अरुण प्रजापति ने सहभागिता की। दोनों कैडेट्स ने 21 एमपी बटालियन रतलाम का प्रतिनिधित्व किया। 8 से 18 सितंबर तक आयोजित कैंप में देश के विभिन्न राज्यों से आए कैडेट्स ने नेतृत्व क्षमता, अनुशासन और व्यक्तित्व विकास से जुड़ी गतिविधियों में हिस्सा लिया। कैंप का संचालन कैंप कमांडेंट सीओ नीलेश चतुर्वेदी के मार्गदर्शन में हुआ।
सेना में अधिकारी बनने की प्रक्रिया समझी
कैंप के दौरान कैडेट्स को सेना में अधिकारी बनने की प्रक्रिया और सर्विसेज सिलेक्शन बोर्ड यानी एसएसबी की चयन प्रणाली से परिचित कराया गया। विशेषज्ञों ने चयन प्रक्रिया में आवश्यक गुणों और तैयारी से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं की जानकारी दी। कैडेट्स ने मनोवैज्ञानिक परीक्षण, समूह परीक्षण अधिकारी की गतिविधियों और व्यक्तिगत साक्षात्कार की प्रक्रिया को समझा।
मनोवैज्ञानिक परीक्षण से संबंधित सत्रों में व्यक्तित्व, सोचने की क्षमता, परिस्थितियों के अनुसार निर्णय लेने और समस्या समाधान जैसे विषयों पर मार्गदर्शन दिया गया। कैडेट्स को समझाया गया कि चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में उनकी सोच और प्रतिक्रिया नेतृत्व क्षमता के महत्वपूर्ण पहलू होते हैं।
समूह गतिविधियों में टीमवर्क का प्रशिक्षण
जीटीओ सत्रों में कैडेट्स को समूह में प्रभावी ढंग से कार्य करने का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। टीम के सदस्यों के बीच समन्वय बनाए रखने, जिम्मेदारी निभाने और सामूहिक लक्ष्य की दिशा में प्रयास करने पर जोर रहा। चुनौतीपूर्ण कार्यों के दौरान नेतृत्व क्षमता प्रदर्शित करने तथा परिस्थितियों के अनुरूप निर्णय लेने का अभ्यास कराया गया।
इन गतिविधियों से कैडेट्स को अपने साथियों के विचार समझने और मिलकर काम करने का अवसर मिला। प्रशिक्षण के दौरान आपसी सहयोग, धैर्य और समूह की जिम्मेदारी को महत्व दिया गया।
साक्षात्कार और प्रभावी संवाद पर मार्गदर्शन
व्यक्तिगत साक्षात्कार से संबंधित सत्रों में आत्मविश्वास, प्रभावी संचार और व्यक्तित्व प्रस्तुतीकरण की जानकारी साझा की गई। कैडेट्स को प्रश्नों के तार्किक उत्तर देने और अपने विचार स्पष्ट रूप से रखने के महत्वपूर्ण पहलुओं से अवगत कराया गया।
ग्रुप डिस्कशन के माध्यम से बोलने और सुनने, दोनों क्षमताओं का अभ्यास हुआ। कैडेट्स ने दूसरों के विचारों को समझते हुए अपनी बात प्रस्तुत करने और सामूहिक रूप से समस्याओं का समाधान खोजने के गुण सीखे।
बाधा प्रशिक्षण से बढ़ी शारीरिक और मानसिक दक्षता
कैंप में ऑब्स्टेकल ट्रेनिंग, लीडरशिप एक्टिविटीज, ग्रुप टास्क तथा अन्य शारीरिक और मानसिक दक्षता बढ़ाने वाली गतिविधियां आयोजित की गईं। बाधाओं को पार करने के अभ्यास ने कैडेट्स को कठिन परिस्थितियों का सामना करने और चुनौतियों के बीच संयम बनाए रखने का अवसर दिया।
इन गतिविधियों में त्वरित निर्णय, आपसी सहयोग और धैर्यपूर्वक कार्य करने पर जोर दिया गया। साथ ही टीमवर्क, कम्युनिकेशन स्किल और पर्सनैलिटी डेवलपमेंट से संबंधित प्रशिक्षण भी मिला।
सांस्कृतिक गतिविधियों से बढ़ा आपसी परिचय
विभिन्न राज्यों से आए कैडेट्स ने सांस्कृतिक गतिविधियों में भी भाग लिया। इसके माध्यम से उन्हें एक-दूसरे की संस्कृति, परंपराओं और विचारों को जानने का अवसर मिला। साथ रहने और सामूहिक गतिविधियों में शामिल होने से राष्ट्रीय एकता, सद्भाव और भाईचारे की भावना को प्रोत्साहन मिला।
यात्रा में सूबेदार राजपाल सिंह का मिला सहयोग
कैडेट्स इंदौर से बिलासपुर पहुंचे और वहां ट्रेन बदलकर रायपुर गए। रायपुर रेलवे स्टेशन पर कैंप के पीआई स्टाफ ने उनका स्वागत कर कैंप स्थल तक पहुंचाया। 18 सितंबर को समापन के बाद कैडेट्स रायपुर से भोपाल पहुंचे और वहां से ट्रेन बदलकर रतलाम रवाना हुए।
यात्रा के दौरान सूबेदार राजपाल सिंह ने कैडेट्स की सुरक्षा, सुविधा और कुशलक्षेम का ध्यान रखा। कैडेट्स ने उनके सहयोग और मार्गदर्शन के प्रति आभार व्यक्त किया।
प्राचार्य और एनसीसी अधिकारी ने दी बधाई
कैंप सफलतापूर्वक पूर्ण करने पर महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. पी. बी. रेड्डी और एनसीसी अधिकारी लेफ्टिनेंट डॉ. के. मिश्रा ने रोहित डाबिया एवं अरुण प्रजापति को बधाई और शुभकामनाएं दीं। दोनों कैडेट्स के लिए कैंप नेतृत्व कौशल सीखने, नए अनुभव प्राप्त करने और भविष्य में सेना में अधिकारी बनने की दिशा में प्रेरणा लेने का अवसर रहा।
