Asian Games 2026: 17 साल की कुमकुम मोहोद ने जीता स्वर्ण, भारत को दिलाया 17वां गोल्ड
जापान। एशियन गेम्स 2026 में भारत की युवा तीरंदाज कुमकुम मोहोद ने शानदार प्रदर्शन करते हुए महिला व्यक्तिगत रिकर्व स्पर्धा का स्वर्ण पदक जीत लिया। महज 17 साल की कुमकुम ने फाइनल में दक्षिण कोरिया की ओह येजिन को रोमांचक शूट-ऑफ में हराया। इस जीत के साथ भारत के स्वर्ण पदकों की संख्या उस समय 17 पहुंच गई। कुमकुम की सफलता भारतीय तीरंदाजी के लिए भी ऐतिहासिक रही, क्योंकि वह एशियन गेम्स की महिला व्यक्तिगत रिकर्व स्पर्धा में पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनीं। उन्होंने इस उपलब्धि को सीधे स्वर्ण पदक के साथ हासिल किया।
शूट-ऑफ में परफेक्ट 10 लगाकर सुनिश्चित की जीत
फाइनल मुकाबले में दोनों खिलाड़ियों के बीच कड़ी टक्कर देखने को मिली। निर्धारित पांच सेटों के बाद मुकाबला 5-5 की बराबरी पर पहुंच गया। इसके बाद विजेता का फैसला शूट-ऑफ से हुआ, जहां दोनों तीरंदाजों को एक-एक निर्णायक तीर चलाना था।
दक्षिण कोरिया की ओह येजिन ने अपने तीर से 8 अंक हासिल किए। अब कुमकुम के सामने स्वर्ण जीतने का अवसर था। भारतीय खिलाड़ी ने दबाव के बीच सटीक निशाना लगाया और परफेक्ट 10 हासिल कर मुकाबला अपने नाम कर लिया। अंतिम परिणाम 6-5 से कुमकुम के पक्ष में रहा। निर्णायक तीर पर उनकी सटीकता ने बराबरी पर चल रहे मुकाबले को भारत की स्वर्णिम सफलता में बदल दिया।
शुरुआती पिछड़ने के बाद की मजबूत वापसी
कुमकुम के लिए फाइनल की शुरुआत आसान नहीं रही। पहले सेट में ओह येजिन ने 29-27 से बढ़त हासिल की। दूसरे सेट में दोनों खिलाड़ियों ने 29-29 अंक बनाए, जिससे सेट अंक बंट गए और कोरियाई खिलाड़ी 3-1 से आगे हो गईं।
तीसरे सेट में कुमकुम ने शानदार वापसी की। उन्होंने तीनों तीरों पर 10-10 अंक हासिल किए और मुकाबले को 3-3 की बराबरी पर ला दिया। हालांकि, चौथे सेट के बाद येजिन फिर 5-3 की बढ़त लेने में सफल रहीं।
पांचवां सेट भारतीय खिलाड़ी के लिए बेहद महत्वपूर्ण था। यहां कुमकुम ने एक बार फिर तीनों तीरों पर पूरे 10 अंक हासिल किए। इस प्रदर्शन से उन्होंने मुकाबला 5-5 पर बराबर किया और स्वर्ण पदक की लड़ाई को शूट-ऑफ तक पहुंचाया। दो बार पिछड़ने के बावजूद उनकी वापसी फाइनल का सबसे उल्लेखनीय पहलू रही।
सेमीफाइनल में चीन की खिलाड़ी को हराया
फाइनल से पहले कुमकुम ने सेमीफाइनल में चीन की जिंगयी झू को 6-2 से पराजित किया था। इस जीत से उन्होंने अपने लिए पदक सुनिश्चित करने के साथ भारत को लॉस एंजिलिस ओलंपिक 2028 के लिए कोटा स्थान भी दिलाया।
यहां एक महत्वपूर्ण बात यह है कि ओलंपिक का यह कोटा भारत को मिला है, किसी खिलाड़ी के नाम व्यक्तिगत रूप से आरक्षित नहीं हुआ है। इसलिए इसे कुमकुम की व्यक्तिगत ओलंपिक भागीदारी की अंतिम पुष्टि नहीं माना जाना चाहिए। फिलहाल उनकी उपलब्धि ने आगामी ओलंपिक की महिला रिकर्व प्रतियोगिता में भारत के लिए स्थान सुनिश्चित किया है।
टीम स्पर्धा में भी जीत चुकी हैं स्वर्ण पदक
कुमकुम की सफलता केवल व्यक्तिगत मुकाबले तक सीमित नहीं रही। इससे पहले उन्होंने अंकिता भकत और कीर्ति शर्मा के साथ मिलकर महिला रिकर्व टीम स्पर्धा में भी स्वर्ण पदक जीता था।
भारतीय टीम ने फाइनल में दक्षिण कोरिया को 5-3 से हराया। व्यक्तिगत स्पर्धा में उतरने से पहले ही कुमकुम स्वर्ण पदक विजेता टीम का हिस्सा बन चुकी थीं। इसके बाद एकल मुकाबले में मिली जीत ने उनके अभियान को और विशेष बना दिया। टीम और व्यक्तिगत, दोनों प्रतियोगिताओं में स्वर्ण हासिल करना इस युवा तीरंदाज की बड़ी उपलब्धि रही।
मिश्रित टीम में रजत, कुल तीन पदक किए अपने नाम
कुमकुम ने धीरज बोम्मदेवरा के साथ मिश्रित रिकर्व टीम स्पर्धा में भी भारत का प्रतिनिधित्व किया। इस प्रतियोगिता के फाइनल में भारतीय जोड़ी को चीन के खिलाफ 3-5 से हार मिली, लेकिन दोनों ने देश के लिए रजत पदक हासिल किया।
इस तरह कुमकुम ने इन एशियन गेम्स में दो स्वर्ण और एक रजत पदक जीता। महिला टीम, मिश्रित टीम और महिला व्यक्तिगत स्पर्धा—तीनों में उनका पदक तक पहुंचना इस प्रतियोगिता में उनके सफल प्रदर्शन को दर्शाता है
भारतीय तीरंदाजी के लिए यादगार उपलब्धि
महज 17 वर्ष की उम्र में कुमकुम ने एशियाई खेलों के बड़े मंच पर अपनी पहचान बनाई है। व्यक्तिगत फाइनल में उनकी जीत इसलिए भी खास रही कि उन्होंने शुरुआती बढ़त गंवाने के बाद मुकाबला छोड़ा नहीं। अंतिम सेट और फिर निर्णायक तीर पर पूरे अंक हासिल करके उन्होंने स्वर्ण पदक सुनिश्चित किया।
उनकी जीत के समय भारत के खाते में 77 पदक थे, जिनमें 17 स्वर्ण, 25 रजत और 35 कांस्य शामिल थे। यह आंकड़ा उनकी जीत के समय का है; आगे के मुकाबलों के साथ पदक संख्या बदल सकती है। कुमकुम का व्यक्तिगत स्वर्ण, टीम स्वर्ण और मिश्रित टीम रजत भारतीय तीरंदाजी के इस अभियान की प्रमुख सफलताओं में शामिल रहे।
