अहिंसा: श्री मार्तंड फाउंडेशन की काव्य-प्रस्तुति
राजस्थान। श्री मार्तंड फाउंडेशन द्वारा दिनांक 2 अक्टूबर 2026 के लिए “अहिंसा” विषय पर राजस्थान की रचनाकार पूनम रमेश गांधी की कविता प्रस्तुत की गई है। कविता भगवान महावीर के संदेश को केंद्र में रखकर करुणा, प्रेम और सह-अस्तित्व की भावना को स्वर देती है।
किसी को कष्ट न देने का संदेश
रचना की शुरुआत इस भाव से होती है कि अपने सुख के लिए किसी को कष्ट नहीं पहुँचाना चाहिए और न ही किसी का दिल दुखाना चाहिए। कवयित्री ने सरल शब्दों में यह आग्रह किया है कि हमारा सुख किसी दूसरे के दुख की कीमत पर न हो।
महावीर का संदेश: हर जीव में प्राण
कविता में भगवान महावीर के संदेश का उल्लेख है कि हर जीव में प्राण की आस है। रचना के अनुसार दया, प्रेम और करुणा के सामने अहंकार झुक जाता है। यही भाव अहिंसा के मूल में है।
अहिंसा: जीवन की पहचान
कवयित्री अहिंसा को केवल व्रत नहीं, बल्कि जीवन की पहचान बताती हैं। उनके अनुसार जब मन, वचन और कर्म तीनों से अहिंसा का पालन होता है, तब हर इंसान पावन बन जाता है।
बैर और भेद से मुक्त समाज की कामना
रचना में ऐसे समाज की कामना की गई है जहाँ न बैर हो, न भेदभाव और न नफरत। कविता का आदर्श है कि हर जीव सुख से जिए, और इसी को वह संसार का संविधान बनाने की बात कहती है।
दिल जीतने का आह्वान
अंतिम भाग में संदेश दिया गया है कि जीतना है तो दिलों को जीतो, किसी पर वार मत करो, क्योंकि हिंसा से स्वर्ग नहीं मिलता। रचना “अहिंसा परमो धर्म” के उद्घोष के साथ महावीर के संदेश को दोहराते हुए समाप्त होती है।
रचयिता: पूनम रमेश गांधी, राजस्थान | प्रस्तुति: श्री मार्तंड फाउंडेशन
