केंद्र और मध्यप्रदेश के साझा प्रयास से कला-संस्कृति के संरक्षण और वैश्विक प्रसार को मिलेगी नई दिशा: डॉ. भरत शर्मा
उस्ताद अलाउद्दीन खाँ संगीत एवं कला अकादमी में सांस्कृतिक संरक्षण, संवर्धन और प्रचार को लेकर हुआ विचार-विमर्श
भोपाल। भारतीय कला एवं संस्कृति के संरक्षण, संवर्धन और वैश्विक प्रसार को लेकर संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार और मध्यप्रदेश की उस्ताद अलाउद्दीन खाँ संगीत एवं कला अकादमी के बीच साझा कार्ययोजना तैयार करने पर विचार-विमर्श किया गया। बैठक में केंद्र और राज्य की संबंधित संस्थाओं के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर मध्यप्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों से जोड़ने पर जोर दिया गया।
चर्चा में विशेष रूप से उपस्थित डॉ. भरत शर्मा ने गुरु-शिष्य परंपरा, युवा कलाकारों के प्रशिक्षण, डिजिटल अभिलेखागार, अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक आदान-प्रदान और पारंपरिक कला विधाओं के संरक्षण जैसे विषयों पर सुझाव दिए। उन्होंने कहा कि युवा प्रतिभाओं के विकास के लिए प्रशिक्षण के साथ उन्हें अपनी कला प्रस्तुत करने के पर्याप्त अवसर उपलब्ध कराना जरूरी है।
परंपरा, प्रतिभा और वैश्विक प्रसार पर जोर
डॉ. शर्मा ने कहा कि भावी सांस्कृतिक कार्ययोजना को तीन प्रमुख आधारों—परंपरा का संरक्षण, प्रतिभा का संवर्धन और संस्कृति का वैश्विक प्रसार—के आधार पर आगे बढ़ाया जाना चाहिए। उन्होंने युवा कलाकारों के लिए प्रशिक्षण और मंच उपलब्ध कराने की प्रक्रिया को सरल बनाने की आवश्यकता भी बताई।
बैठक में ‘कल्चरल एक्सचेंज प्रोग्राम’ के माध्यम से भारतीय संस्कृति को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई। इसके तहत देश के विभिन्न राज्यों और विदेशों में सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित करने, कलाकारों के आदान-प्रदान को बढ़ावा देने तथा भारतीय सांस्कृतिक संस्थाओं और प्रवासी भारतीय समुदाय के बीच सहयोग मजबूत करने जैसे प्रस्तावों पर विचार किया गया।
संयुक्त कार्ययोजना और संस्थागत समन्वय
उस्ताद अलाउद्दीन खाँ संगीत एवं कला अकादमी के निदेशक प्रकाश सिंह राठौड़ ने संयुक्त कार्ययोजना और संस्थागत समन्वय को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य स्तर की संबंधित संस्थाओं के बीच प्रभावी समन्वय स्थापित करने के साथ उपलब्ध योजनाओं और संसाधनों का समन्वित उपयोग किया जाना चाहिए।
उन्होंने वार्षिक सांस्कृतिक कार्ययोजना तैयार करने पर भी जोर दिया, जिसमें प्राथमिकताओं, प्रस्तावित कार्यक्रमों और अपेक्षित परिणामों को स्पष्ट रूप से शामिल किया जाए।
युवाओं को प्रशिक्षण और मंच देने पर जोर
चर्चा के दौरान विश्वविद्यालयों और अन्य शैक्षणिक संस्थानों में भारतीय कला एवं संस्कृति से जुड़े कार्यक्रमों को बढ़ावा देने पर भी विचार किया गया। इसके अलावा युवा सांस्कृतिक नेतृत्व विकास, राष्ट्रीय स्तर की कार्यशालाएं, कलाकार रेजिडेंसी, मास्टरक्लास और कला महोत्सव आयोजित कर प्रतिभाशाली कलाकारों को प्रशिक्षण, मार्गदर्शन और अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने के अवसर उपलब्ध कराने की बात कही गई।
भारतीय शास्त्रीय संगीत, ध्रुपद, लोक एवं पारंपरिक कलाओं सहित विभिन्न कला विधाओं के संरक्षण और उन्हें नई पीढ़ी तक पहुंचाने को भी प्राथमिकता देने पर चर्चा हुई। इसके लिए गुरु-शिष्य परंपरा को मजबूत करने, वरिष्ठ कलाकारों के अनुभव और योगदान का संस्थागत दस्तावेजीकरण करने तथा युवा कलाकारों को प्रशिक्षण एवं प्रदर्शन के अवसर उपलब्ध कराने पर विशेष बल दिया गया।
डिजिटल तकनीक से सांस्कृतिक विरासत को जोड़ने की पहल
बैठक में आधुनिक तकनीक के उपयोग से सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने और नई पीढ़ी तक पहुंचाने की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई। डिजिटल अभिलेखागार के माध्यम से दुर्लभ कला विधाओं, वरिष्ठ कलाकारों के अनुभव और सांस्कृतिक सामग्री का दस्तावेजीकरण करने पर जोर दिया गया।
प्रस्तावित साझा प्रयासों से मध्यप्रदेश की सांस्कृतिक परंपराओं को राष्ट्रीय मंच से जोड़ने, युवा कलाकारों के लिए नए अवसर विकसित करने और दुर्लभ कला विधाओं के संरक्षण में सहयोग मिलने की उम्मीद व्यक्त की गई। साथ ही भारतीय कला एवं संस्कृति को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रस्तुत करने के लिए विभिन्न संस्थाओं के बीच समन्वय को मजबूत करने पर जोर दिया गया।
कार्यक्रम के दौरान डॉ. भरत शर्मा का स्वागत वरिष्ठ संस्कृतकर्मी विजय सप्रे ने किया। धन्यवाद प्रस्ताव उस्ताद अलाउद्दीन खाँ संगीत एवं कला अकादमी के उपनिदेशक शेखर कराड़कर ने रखा। चर्चा में कलाप्रेमी और कलाकार भी शामिल हुए।
