Stock Market Crash: शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स करीब 850 अंक गिरा, निफ्टी 23,000 के नीचे फिसला
दैनिक स्वराज वाणी | बिजनेस डेस्क
भारतीय शेयर बाजार में सोमवार, 28 सितंबर को कारोबार की शुरुआत गिरावट के साथ हुई। शुरुआती सत्र में बिकवाली बढ़ने पर बीएसई सेंसेक्स करीब 850 अंक नीचे आया और एनएसई निफ्टी 23,000 के स्तर से नीचे फिसल गया। बैंकिंग और सूचना प्रौद्योगिकी समेत कई बड़े शेयरों में कमजोरी दिखी। कच्चे तेल की ऊंची कीमतों, विदेशी निवेशकों की बिकवाली और अंतरराष्ट्रीय तनाव को बाजार पर दबाव के संभावित कारणों के रूप में देखा जा रहा है। ये शुरुआती कारोबार के आंकड़े हैं; दिन के अंतिम बंद स्तर अलग हो सकते हैं।
खुलने के बाद बढ़ी गिरावट
शुक्रवार को सेंसेक्स 73,895.74 पर बंद हुआ था। सोमवार को यह करीब 73,734 पर खुला, लेकिन कारोबार आगे बढ़ने के साथ बिकवाली तेज हो गई। प्रकाशित शुरुआती अपडेट में सेंसेक्स लगभग 72,981 के स्तर तक पहुंचने की जानकारी दी गई है। यह पिछले बंद स्तर से करीब 915 अंक नीचे है, जबकि रिपोर्ट में गिरावट को लगभग 850 अंक बताया गया है। अलग-अलग क्षणों पर दर्ज स्तरों के कारण गिरावट के आंकड़े बदलते रहते हैं।
निफ्टी शुक्रवार के 23,140.50 के बंद स्तर के मुकाबले सोमवार को करीब 23,065 पर खुला। इसके बाद वह 23,000 के नीचे चला गया। प्रमुख सूचकांकों के साथ बड़े शेयरों में आई कमजोरी ने शुरुआती बाजार धारणा पर असर डाला। हालांकि, किसी महत्वपूर्ण स्तर के नीचे कुछ समय के लिए जाना और कारोबार के अंत में उसके नीचे बंद होना अलग बातें हैं।
बैंकिंग और आईटी शेयरों पर दबाव
शुरुआती कारोबार में बैंकिंग और आईटी क्षेत्र के शेयरों में दबाव दिखाई दिया। प्रकाशित बाजार अपडेट के अनुसार, एचडीएफसी बैंक, कोटक बैंक, एसबीआई, आईसीआईसीआई बैंक, बजाज फाइनेंस, रिलायंस इंडस्ट्रीज, हिंदुस्तान यूनिलीवर और ट्रेंट जैसे बड़े शेयरों में गिरावट दर्ज की गई। बड़े शेयरों की कीमत में बदलाव का सेंसेक्स और निफ्टी पर असर पड़ता है, इसलिए इनमें एक साथ बिकवाली होने पर सूचकांकों की गिरावट तेज दिख सकती है।
किसी सूचकांक में बड़ी गिरावट आने का अर्थ यह नहीं है कि उसमें शामिल हर शेयर समान मात्रा में गिरा है। अलग-अलग कंपनियों और क्षेत्रों पर बाजार के कारणों का असर अलग हो सकता है। सोमवार के पूरे कारोबारी सत्र की स्थिति समझने के लिए अंतिम क्षेत्रवार और शेयरवार आंकड़े देखना जरूरी होगा।
कच्चे तेल की कीमत क्यों बनी चिंता?
सोमवार के शुरुआती अपडेट में अंतरराष्ट्रीय मानक ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 106 डॉलर प्रति बैरल बताई गई है। रिपोर्ट के अनुसार, उस समय इसमें लगभग 1.5 से 1.8 प्रतिशत की तेजी थी। तेल की कीमत में बढ़ोतरी को अमेरिका-ईरान संबंधों और होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़े जोखिमों की अनिश्चितता के साथ जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, किसी एक दिन बाजार में आई गिरावट का पूरा कारण केवल तेल की कीमत को नहीं माना जा सकता।
भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात से पूरा करता है। ऐसे में लंबे समय तक महंगा तेल बने रहने पर आयात लागत, महंगाई और तेल का उपयोग करने वाली कंपनियों के खर्च को लेकर चिंता बढ़ सकती है। शेयर बाजार इन संभावित प्रभावों को भी ध्यान में रखता है।
विदेशी निवेशकों की बिकवाली का असर
बाजार पर दबाव के संदर्भ में विदेशी संस्थागत निवेशकों की बिकवाली भी चर्चा में है। प्रकाशित आंकड़ों के अनुसार, शुक्रवार, 25 सितंबर को विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयरों में 3,693.93 करोड़ रुपये की शुद्ध बिकवाली की थी। इसी दिन घरेलू संस्थागत निवेशकों ने 2,838.17 करोड़ रुपये की शुद्ध खरीदारी की। ये पिछले कारोबारी दिन के आंकड़े हैं, सोमवार के पूरे दिन के नहीं।
विदेशी और घरेलू संस्थागत निवेशकों की खरीद-बिक्री बाजार की दिशा को प्रभावित कर सकती है, लेकिन सूचकांक की चाल कई कारणों से बनती है। कंपनियों के शेयरों में बदलाव, वैश्विक संकेत और निवेशकों की तत्काल प्रतिक्रिया भी उसमें शामिल होते हैं। इसलिए किसी एक आंकड़े को सोमवार की गिरावट की अकेली वजह बताना सही नहीं होगा।
शुरुआती गिरावट को अंतिम नतीजा न समझें
सेंसेक्स का करीब 850 अंक गिरना और निफ्टी का 23,000 के नीचे जाना सोमवार सुबह की बाजार स्थिति को दर्शाता है। कारोबार के दौरान कीमतें लगातार बदलती हैं। बाद में खरीदारी लौटने पर गिरावट कम हो सकती है या बिकवाली बढ़ने पर और गहरी हो सकती है।
निवेशकों की नजर अब कच्चे तेल के भाव, विदेशी पूंजी के प्रवाह और वैश्विक घटनाक्रम पर रहेगी। सोमवार के बाजार का अंतिम निष्कर्ष बीएसई और एनएसई के आधिकारिक बंद आंकड़े आने के बाद ही निकाला जा सकेगा। फिलहाल उपलब्ध सूचना के अनुसार, सप्ताह की शुरुआत दोनों प्रमुख सूचकांकों में तेज गिरावट के साथ हुई है।
