MP Weather Update: पूर्वी मध्यप्रदेश में सामान्य से अधिक बारिश, पश्चिमी हिस्से में कमी; मानसून की वापसी के संकेत
दैनिक स्वराज वाणी | भोपाल
मध्यप्रदेश में दक्षिण-पश्चिम मानसून की वापसी के लिए परिस्थितियां अनुकूल होने लगी हैं। हालांकि, मानसून की विदाई से पहले प्रदेश में बारिश पूरी तरह थमी नहीं है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 28 से 30 सितंबर के बीच पूर्वी और पश्चिमी मध्यप्रदेश के कुछ क्षेत्रों में गरज-चमक तथा बिजली गिरने की चेतावनी जारी की है। पूर्वी मध्यप्रदेश के लिए यह चेतावनी 1 अक्टूबर तक भी दी गई है। ऐसे में मानसून की वापसी के संकेतों के बीच लोगों को स्थानीय मौसम पूर्वानुमान पर नजर रखने की जरूरत है।
इस वर्ष बारिश का वितरण प्रदेश भर में एक समान नहीं रहा। 1 जून से 27 सितंबर 2026 तक के प्रकाशित आंकड़ों के अनुसार, पूर्वी मध्यप्रदेश में सामान्य से करीब 5 प्रतिशत अधिक बारिश दर्ज हुई, जबकि पश्चिमी मध्यप्रदेश में बारिश सामान्य से लगभग 11 प्रतिशत कम रही। पूरे प्रदेश में इस अवधि की वर्षा सामान्य से करीब 4 प्रतिशत कम बताई गई है। ये आंकड़े मौसमी कुल वर्षा के हैं; किसी एक दिन हुई बारिश को इससे अलग समझना चाहिए।
प्रदेश में अब तक कितनी बारिश हुई?
27 सितंबर तक मध्यप्रदेश में लगभग 907.9 मिलीमीटर, यानी करीब 35.7 इंच बारिश दर्ज होने की जानकारी प्रकाशित हुई है। इसी अवधि के लिए सामान्य वर्षा करीब 37.1 इंच बताई गई है। इस हिसाब से प्रदेश का कुल आंकड़ा सामान्य के करीब पहुंचा है, लेकिन क्षेत्रवार अंतर बना हुआ है। पूर्वी हिस्से में हुई अधिक बारिश ने राज्य के कुल औसत को संभाला है, जबकि पश्चिमी हिस्से में कमी बरकरार है। राज्य का औसत किसी जिले की पूरी स्थिति नहीं बताता। एक ही क्षेत्र के जिलों में भी वर्षा का आंकड़ा अलग हो सकता है। इसी कारण अपने जिले की स्थिति जानने के लिए जिलेवार मौसमी वर्षा और उसके सामान्य स्तर से अंतर को देखना जरूरी है।
किन जिलों में सामान्य से अधिक बारिश दर्ज हुई?
27 सितंबर तक प्रकाशित जिलेवार जानकारी में अनूपपुर, छतरपुर, मैहर, मऊगंज, निवाड़ी, पन्ना, सतना, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, टीकमगढ़ और उमरिया को सामान्य से अधिक बारिश वाले जिलों में गिनाया गया है। पश्चिमी मध्यप्रदेश के आगर-मालवा, भिंड, भोपाल, बुरहानपुर, दतिया, गुना, ग्वालियर, खरगोन, राजगढ़, श्योपुर और शिवपुरी भी इस सूची में शामिल हैं। यह सूची मौसमी वर्षा की स्थिति बताती है; इससे आज के लिए किसी जिले में बारिश का अलर्ट तय नहीं होता।
किसी जिले में सामान्य से अधिक वर्षा दर्ज होने का मतलब यह है कि निर्धारित अवधि में वहां हुई कुल बारिश उस अवधि के औसत से ऊपर रही। इससे यह निष्कर्ष नहीं निकालना चाहिए कि जिले के हर गांव या तहसील में समान मात्रा में पानी गिरा होगा। स्थानीय स्तर पर बारिश का असर अलग-अलग हो सकता है।
कम बारिश वाले इलाकों के लिए क्या मायने हैं?
पश्चिमी मध्यप्रदेश में सामान्य से करीब 11 प्रतिशत कम बारिश का आंकड़ा बताता है कि प्रदेश का यह हिस्सा पूर्वी क्षेत्र की तुलना में पीछे रहा है। हालांकि, पश्चिमी हिस्से के कुछ जिले सामान्य से अधिक बारिश वाली सूची में भी शामिल हैं। इससे स्पष्ट होता है कि क्षेत्रीय औसत और जिले का आंकड़ा अलग-अलग तस्वीर दिखा सकते हैं।
बारिश की कमी या अधिकता का असर समझने के लिए केवल मौसमी कुल वर्षा पर्याप्त नहीं होती। बारिश कब हुई और उसका वितरण कैसा रहा, यह भी महत्वपूर्ण है। खेती तथा स्थानीय जल उपलब्धता से जुड़े फैसलों में अपने क्षेत्र के ताजा आंकड़ों और विभागीय सलाह को देखना उपयोगी होगा।
क्या मध्यप्रदेश से मानसून लौट गया है?
मानसून की वापसी के लिए परिस्थितियां अनुकूल होना और उसका आधिकारिक रूप से लौट जाना अलग स्थितियां हैं। अभी बारिश या गरज-चमक की संभावना बनी हुई है। IMD की 28 सितंबर को जारी चेतावनी के अनुसार, पूर्वी और पश्चिमी मध्यप्रदेश में 30 सितंबर तक कुछ स्थानों पर गरज-चमक तथा बिजली गिरने का जोखिम है। पूर्वी मध्यप्रदेश में 1 अक्टूबर के लिए भी ऐसी चेतावनी दर्ज है। मौसम की स्थिति बदलने पर चेतावनियां भी बदल सकती हैं।
इस दौरान खुले स्थानों पर काम करने वाले लोगों को गरज-चमक शुरू होने पर सुरक्षित भवन में जाना चाहिए। खेत, खुले मैदान और पेड़ों के नीचे बिजली चमकने के समय ठहरने से बचें। यात्रा की योजना बनाते समय भी अपने जिले का ताजा पूर्वानुमान देख लें।
अपने जिले का हाल कैसे देखें?
प्रदेश के कुल वर्षा आंकड़े से अपने जिले की स्थिति का अनुमान लगाने के बजाय IMD के जिलेवार वर्षा आंकड़े देखें। वहां दैनिक बारिश और 1 जून से अब तक की संचयी बारिश अलग-अलग दिखाई जाती है। इसी तरह मौसम चेतावनी में यह देखना जरूरी है कि वह किस तारीख और किस क्षेत्र के लिए जारी की गई है। 28 सितंबर तक की स्थिति में प्रदेश के एक हिस्से में सामान्य से अधिक और दूसरे में कम बारिश दर्ज हुई है; आने वाले दिनों का स्थानीय मौसम ताजा बुलेटिन से ही स्पष्ट होगा।
