झुमरीतिलैया में सोलहकारण और दशलक्षण तपस्या का महापारणा, 45 व्रतधारियों का सम्मान
दैनिक स्वराज वाणी
झुमरीतिलैया। सोलहकारण और दशलक्षण पर्व के दौरान कठिन उपवास करने वाले व्रतधारियों का महापारणा आयोजित किया गया। जैन समाज और विरागोदय वर्षायोग समिति 2026 ने तपस्वियों को स्मृति चिह्न, सम्मान पत्र और रजत माला देकर सम्मानित किया। समाज के अनुसार, झुमरीतिलैया में पहली बार इतनी बड़ी संख्या में लोगों ने लंबे उपवास किए हैं। इनमें महिलाएं, पुरुष और बच्चे शामिल हैं।
समाज की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, प्रियंका छाबड़ा और प्रेम झांझरी ने 16 दिवसीय कठिन उपवास किया, जबकि 43 अन्य व्रतधारियों ने 10 दिवसीय निर्जला उपवास रखा। मुनि श्री 108 सुयश सागर जी मुनिराज और मुनि श्री कौशल्य सागर जी मुनिराज के मंगल आशीर्वाद से आयोजित इस तपस्या के समापन पर व्रतधारियों के परिजनों और समाजजनों में उत्साह दिखाई दिया।
दोनों मंदिरों में अभिषेक और शांतिधारा के बाद हुआ महापारणा
सुबह दोनों जैन मंदिरों में अभिषेक, शांतिधारा और पूजन किया गया। इसके बाद मुनिराजों के मंगल आशीर्वाद से व्रतधारियों के महापारणा का आयोजन हुआ। तपस्या पूरी होने के इस अवसर पर समाज के लोग बड़ी संख्या में एकत्र हुए। उन्होंने व्रतधारियों को शुभकामनाएं दीं और उनके संकल्प की सराहना की।
समाजजनों ने बताया कि व्रतधारियों ने उपवास के साथ अपनी दिनचर्या में भी संयम रखा। उन्होंने मोबाइल फोन के उपयोग से दूरी बनाई और मौन व्रत जैसे नियमों का पालन किया। आयोजन से जुड़े लोगों के अनुसार, परिवार और समाज के सहयोग से बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक ने अपनी तपस्या पूरी की। पारणा के दौरान व्रतधारियों के चेहरों पर उत्साह था, वहीं उनके परिजन लंबे व्रत के पूर्ण होने से भावुक नजर आए।
दो महिलाओं ने 16 दिन और 43 लोगों ने 10 दिन की तपस्या की
इस वर्ष प्रियंका छाबड़ा और प्रेम झांझरी का 16 दिवसीय उपवास विशेष आकर्षण रहा। समाज के अनुसार, 43 महिलाओं, पुरुषों और बच्चों ने 10 दिवसीय निर्जला उपवास कर आत्मशुद्धि का संकल्प लिया। समाजजनों ने कहा कि एक छोटे जैन समाज में इतने लोगों का एक साथ कठिन तपस्या करना उनके लिए अभूतपूर्व है।
तपस्वियों का उत्साह बढ़ाने और उनका बहुमान करने के लिए जैन समाज तथा विरागोदय वर्षायोग समिति 2026 ने सम्मान समारोह आयोजित किया। व्रतधारियों को स्मृति चिह्न, सम्मान पत्र और रजत माला भेंट की गई। कार्यक्रम में उपस्थित परिवारों ने कहा कि तपस्या की अवधि में व्रतधारियों ने अनुशासन बनाए रखा और धार्मिक नियमों का पालन किया। समाज के बच्चों की भागीदारी को भी विशेष रूप से सराहा गया।
मुनिराजों ने श्रद्धा और इच्छाशक्ति की सराहना की
इस अवसर पर मुनिराजों ने तपस्वियों की श्रद्धा, हिम्मत और दृढ़ इच्छाशक्ति की सराहना की। उन्होंने कहा कि कठिन उपवास पूरा करने के लिए मन को स्थिर रखना और अपने संकल्प पर कायम रहना जरूरी है। धर्म के प्रति गहरी आस्था से ऐसी तपस्या संभव होती है। उन्होंने व्रतधारियों को आशीर्वाद दिया और समाजजनों से धार्मिक परंपराओं के साथ संयम को जीवन में स्थान देने का संदेश दिया।
सम्मान समारोह के बाद व्रतधारियों को गाजे-बाजे के साथ नए मंदिर परिसर पहुंचाया गया। वहां उनके परिवारों और रिश्तेदारों ने माला पहनाकर तथा तिलक लगाकर स्वागत किया। परिसर में तपस्वियों को बधाई देने वालों का सिलसिला चलता रहा। समाजजनों ने उनके मंगल स्वास्थ्य की कामना की।
इन व्रतधारियों का हुआ स्वागत और सम्मान
कार्यक्रम में मनोज जैन, विनीत जैन गंगवाल, निर्मला जैन सेठी, संजय जैन गंगवाल, ललित जैन अजमेरा, सुरेंद्र जैन छाबड़ा, तनीषा जैन छाबड़ा, खुशबू जैन पांड्या, पिंकी जैन सेठी, संगीता जैन छाबड़ा, सरला जैन सेठी, रचित जैन और सृष्टि जैन (हजारीबाग), राजीव जैन छाबड़ा, शोभा जैन पाटनी, सुनीता जैन सेठी, अंजू जैन रावका, शशि जैन छाबड़ा, ममता जैन सेठी, रौनक जैन कासलीवाल, आशीष जैन सेठी, प्रीति जैन सेठी, सुशील जैन काला और प्रवीण जैन पाटनी सहित व्रतधारियों का सम्मान किया गया।
इसके अलावा प्रियंका जैन लुहाड़िया, ऋषभ जैन काला, नीलम जैन सेठी, वैभव जैन सेठी, देवेश जैन (रांची), ललित जैन सेठी, नेहा जैन पाटोदी, अतिवीर जैन ठोल्या, किरण जैन सेठी, जोंटी जैन काला, राकेश जैन छाबड़ा, अलका जैन सेठी, दिब्या जैन छाबड़ा, जुली जैन लुहाड़िया, पीयूष जैन छाबड़ा, खुशबू जैन पाटनी, प्रिया जैन छाबड़ा और अक्षत जैन छाबड़ा का भी स्वागत हुआ।
समाजजनों ने कहा कि महापारणा और सम्मान समारोह ने तपस्वियों के संकल्प को सामूहिक उत्सव का रूप दिया। परिजनों की मौजूदगी में हुए स्वागत ने इस अवसर को और यादगार बनाया। आयोजन के अंत में समाज ने सभी व्रतधारियों के स्वस्थ और मंगलमय जीवन की कामना की।
