ग्वालियर में अनंत चतुर्दशी पर उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म की पूजा, भगवान वासुपूज्य को चढ़ाया निर्वाण लाडू
दैनिक स्वराज वाणी | ग्वालियर। दानाओली स्थित दिगंबर बीसपंथी चंपाबाग जैन मंदिर में शुक्रवार को अनंत चतुर्दशी श्रद्धा के साथ मनाई गई। इसके साथ ही 16 सितंबर से चल रहे दस दिवसीय दशलक्षण पर्व का समापन हुआ। आचार्यश्री चैत्य सागर महाराज और मुनिश्री अनुमान सागर महाराज के सान्निध्य में समाजजनों ने उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म की पूजा की। जैन धर्म के बारहवें तीर्थंकर भगवान वासुपूज्य के मोक्ष कल्याणक पर निर्वाण लाडू अर्पित किया गया। समाज के प्रवक्ता सचिन जैन के अनुसार, मंदिर में सुबह से अभिषेक और पूजन के लिए श्रद्धालु पहुंचे।
18 प्रकार के द्रव्यों से किया अभिषेक
प्रवक्ता सचिन जैन ने बताया कि आचार्यश्री और मुनिश्री के सान्निध्य तथा प्रतिष्ठाचार्य पंडित डॉ. आनंद प्रकाश शास्त्री की मौजूदगी में धार्मिक विधियां संपन्न हुईं। मंत्रोच्चार के बीच भगवान जिनेंद्र को पांडुशिला पर विराजित किया गया। इसके बाद जल, घी, दही, दूध और फलों के रस सहित 18 प्रकार के द्रव्यों से अभिषेक किया गया। अभिषेक के दौरान मंदिर में जयकारे गूंजते रहे।
अभिषेक के पश्चात शांतिधारा की विधि हुई। आयोजकों के अनुसार, राजू पंकज जैन परिवार ने शांतिधारा की। आत्म साधना वर्षायोग समिति और सकल जैन समाज के तत्वावधान में आयोजित पूजन में तपस्वियों तथा अन्य श्रद्धालुओं ने भाग लिया। पर्व के अंतिम दिन होने के कारण मंदिर में सुबह से धार्मिक गतिविधियां जारी रहीं।
दशलक्षण पूजन में चढ़ाए महाअर्घ्य
दशलक्षण पूजन के दौरान नित्य पूजा, नवदेवता पूजा, पंचमेरू पूजा और निर्वाण पूजन किया गया। इसके बाद उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म की विशेष पूजा हुई। समाज के तपस्वियों ने भगवान जिनेंद्र के समक्ष महाअर्घ्य समर्पित किए। श्रद्धालुओं ने भक्ति नृत्य के साथ पूजा में सहभागिता की।
दशलक्षण पर्व के दस दिनों में प्रतिदिन एक धर्म की आराधना की जाती है। अंतिम दिन उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म पर प्रवचन और पूजन के साथ पर्व का समापन हुआ। ग्वालियर में 16 सितंबर से दशलक्षण पर्व के कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे थे।
भगवान वासुपूज्य को अर्पित किया निर्वाण लाडू
अनंत चतुर्दशी पर भगवान वासुपूज्य के मोक्ष कल्याणक के अवसर पर निर्वाण पाठ का वाचन किया गया। प्रवक्ता सचिन जैन के मुताबिक, प्रथम निर्वाण लाडू धनेन्द्र निशांत जैन ने अर्पित किया। इसके बाद अन्य श्रावक-श्राविकाओं ने भी भक्तिभाव से भगवान वासुपूज्य के समक्ष निर्वाण लाडू चढ़ाया। इस दौरान मंदिर में जयकारे लगाए गए।
पर्व के अंतिम दिन अभिषेक, पूजन, धर्मसभा और निर्वाण लाडू अर्पण के आयोजन हुए। इनमें समाज के अलग-अलग आयु वर्ग के लोगों ने भाग लिया। दस दिनों तक चली आराधना के समापन पर श्रद्धालुओं ने तीर्थंकर भगवान वासुपूज्य के मोक्ष कल्याणक को भी मनाया।
‘आत्मा के समीप रहना ही ब्रह्मचर्य’
धर्मसभा में आचार्यश्री चैत्य सागर महाराज ने कहा कि ब्रह्म का अर्थ आत्मा है और आत्मा के समीप रहना ही उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म है। उन्होंने समझाया कि जब मनुष्य केवल बाहरी विषयों में सुख खोजता है, तो उसका ध्यान अपने भीतर से हट जाता है। आचार्यश्री ने आत्मचिंतन और संयम को साधना का महत्वपूर्ण भाग बताया।
उन्होंने कहा कि संसार में रहते हुए भी व्यक्ति अपनी दृष्टि और व्यवहार में बदलाव ला सकता है। गुरुओं के जीवन दर्शन से सीख लेकर आत्मकल्याण की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए। प्रवचन के बाद समिति के अध्यक्ष डॉ. वीरेंद्र गंगवाल, महामंत्री निर्मल पाटनी, विनय कासलीवाल, विकास जैन और पंकज छाबड़ा सहित समाजजनों ने आचार्यश्री को श्रीफल भेंट किया।
शनिवार को निकलेगी तपस्वियों की शोभायात्रा
मुनिश्री अनुमान सागर महाराज ने कहा कि उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म सदाचरण की सीख देता है। उनके अनुसार, संयम की साधना की शुरुआत मन से होती है। उन्होंने श्रद्धालुओं से विचारों और आचरण में संयम अपनाने का आग्रह किया।
समाज के प्रवक्ता सचिन जैन ने बताया कि शनिवार, 26 सितंबर को सुबह 7:30 बजे से उपवास करने वाले तपस्वियों की शोभायात्रा निकलेगी। यह चंपाबाग मंदिर से शुरू होकर दानाओली, महाराज बाड़ा, सराफा बाजार, गश्त का ताजिया और नई सड़क होते हुए चंपाबाग बगीची पहुंचेगी। वहां दस, पांच और तीन दिन का उपवास करने वाले तपस्वियों का महापारणा कराया जाएगा।
