झमाझम बारिश के बीच विदिशा में भक्तिभाव से मनाया अनंत चतुर्दशी पर्व, दशलक्षण धर्म का हुआ समापन
दैनिक स्वराज वाणी | विदिशा। झमाझम बारिश के बीच किला अंदर स्थित श्री शीतलनाथ दिगम्बर जैन बड़ा मंदिर में शुक्रवार को अनंत चतुर्दशी पर्व भक्तिभाव और उत्साह के साथ मनाया गया। सुबह से मंदिर में श्रीजी के अभिषेक के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रही। दिनभर पूजन, धार्मिक विधान और प्रवचन हुए। दशलक्षण पर्व के समापन पर रात में इंद्र सभा का मंचन किया गया। मंदिर ट्रस्ट के प्रवक्ता डॉ. मक्खन लाल जैन ने बताया कि पर्व के सभी आयोजनों में सकल जैन समाज ने भाग लिया।
अभिषेक के साथ शुरू हुए धार्मिक आयोजन
सुबह मंदिर में नित्य पूजन और विधान के बाद भगवान वासुपूज्य का मोक्ष कल्याणक मनाया गया। श्रद्धालुओं ने निर्वाण लाडू चढ़ाकर आराधना की। बारिश के बावजूद मंदिर में भक्तों का आना जारी रहा। सुबह के धार्मिक कार्यक्रमों के बाद दोपहर में भगवान का अभिषेक, अनंत चौदस की धारा और दशलक्षण धर्म की पूजन हुई।
प्रवक्ता डॉ. जैन के अनुसार, पर्व के अवसर पर समाज के परिवारों और संगठनों ने विभिन्न धार्मिक विधियों में भागीदारी की। अनंत चतुर्दशी के साथ दशलक्षण धर्म के दस दिनों के आयोजन का समापन हुआ। इन दिनों मंदिर में प्रतिदिन पूजन और धर्मसभा आयोजित की जा रही थी।
पांच इंद्रों ने की चौदस की धारा
दोपहर में आयोजित चौदस की धारा में प्रथम इंद्र का सौभाग्य अखिल भारतीय जैन युवा फेडरेशन को मिला। द्वितीय इंद्र प्रदुम्न सिंघई परिवार, तृतीय इंद्र अनेकांत-एकांत शीतल ज्वैलर परिवार, चतुर्थ इंद्र सतेंद्र लश्करी परिवार और पंचम इंद्र राजेन्द्र तथा इंजीनियर राजीव जैन परिवार बने।
समाज के सदस्यों ने इन धार्मिक विधियों में सहभागिता की और दशलक्षण पर्व के समापन पर सामूहिक पूजन किया। मंदिर परिसर में दिनभर श्रद्धालुओं की उपस्थिति बनी रही। आयोजकों के अनुसार, बारिश के बीच भी लोगों ने निर्धारित कार्यक्रमों में पहुंचकर पर्व मनाया।
पंडित संयम शास्त्री ने समझाया उत्तम ब्रह्मचर्य


मुंबई के विले पार्ले से आए पंडित संयम शास्त्री ने धर्मसभा में दशलक्षण धर्म के दस स्वरूपों पर प्रकाश डाला। पर्व के दौरान उन्होंने उत्तम क्षमा से लेकर अन्य धर्मों पर प्रवचन दिए। दस दिनों तक धार्मिक ग्रंथों का स्वाध्याय भी कराया गया। मंदिर में इस सप्ताह उत्तम तप धर्म सहित अन्य विषयों पर उनके प्रवचन आयोजित हुए थे।
समापन दिवस पर पंडित संयम शास्त्री ने उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म की व्याख्या की। उन्होंने कहा कि ‘ब्रह्म’ का आशय आत्मा से है और आत्मा में रमण करना ब्रह्मचर्य का सार है। उनके अनुसार, बाहरी पदार्थों में स्थायी सुख मानने के बजाय अपने स्वरूप को समझने का प्रयास करना चाहिए। उन्होंने धर्मसभा में उपस्थित लोगों को इस विषय पर आत्मचिंतन का संदेश दिया।
रात्रि में इंद्र सभा का मंचन
दिन के पूजन और प्रवचन के बाद रात्रिकालीन भक्ति कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसके पश्चात इंद्र सभा का मंचन हुआ। आयोजकों के अनुसार, मंचन में सौधर्मेन्द्र सहित इंद्र-इंद्राणियों के पात्रों ने धार्मिक विषयों और प्रश्नों पर संवाद प्रस्तुत किया। दशलक्षण पर्व के अंतिम दिन हुए इस आयोजन को श्रद्धालुओं ने देखा।
इस अवसर पर श्रावक-श्राविकाओं ने अनंत व्रत धारण कर आराधना की। अनंत चतुर्दशी पर्व पर मंदिर में सुबह से रात तक चले अलग-अलग कार्यक्रमों ने दशलक्षण धर्म के समापन को विशेष रूप दिया।
अधिकारी और समाजजन रहे उपस्थित


कार्यक्रम में डिप्टी कलेक्टर नितिन जैन और एसडीएम मनीष जैन भी शामिल हुए। मंदिर कमेटी के अध्यक्ष मलुकचंद जैन, मंत्री एडवोकेट चक्रवर्ती जैन, रवि पटेल, राजकुमार जैन, राकेश मोदी, वीरेंद्र मानपुर, प्रकाश सिंघई, संजय अलंकार, रीतेश करैया, सुरेंद्र जैन और डॉ. एम.एल. जैन सहित बड़ी संख्या में समाजजन उपस्थित रहे।
आयोजन के अंत में मंदिर ट्रस्ट की ओर से सभी अतिथियों और श्रद्धालुओं का आभार व्यक्त किया गया। बारिश के बीच मंदिर में दिनभर हुई धार्मिक गतिविधियों के साथ विदिशा में दशलक्षण पर्व का समापन हुआ।
