अम्बाह में श्रद्धा-भक्ति के साथ मनाया उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म
दशलक्षण महापर्व के अंतिम दिन पांचों जैन मंदिरों सहित जैन बगीची में हुए धार्मिक अनुष्ठान, भगवान वासुपूज्य स्वामी का निर्वाण कल्याणक मनाया
अम्बाह/मुरैना। दशलक्षण महापर्व के दसवें एवं अंतिम दिन अम्बाह नगर में उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म श्रद्धा, भक्ति और धार्मिक उल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर नगर के पांचों जैन मंदिरों सहित जैन बगीची में विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किए गए। जैन बगीची में आर्यिका श्री संगममति माताजी ससंघ के सान्निध्य में भगवान श्री वासुपूज्य स्वामी के निर्वाण कल्याणक के उपलक्ष्य में श्रद्धालुओं द्वारा निर्वाण लाडू अर्पित किया गया।
दशलक्षण महापर्व के अंतिम दिन सुबह से ही जैन मंदिरों में श्रद्धालुओं का पहुंचना शुरू हो गया था। भगवान के अभिषेक, शांतिधारा और विशेष पूजा-अर्चना के साथ धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। श्रद्धालुओं ने भगवान के समक्ष आत्मशुद्धि, संयम और उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म की भावना को जीवन में अपनाने का संकल्प लिया।
विश्व शांति और समस्त जीवों के कल्याण की मंगलकामना को लेकर मंदिरों में विशेष शांतिधारा एवं अभिषेक किए गए। धार्मिक अनुष्ठानों के दौरान श्रद्धालुओं ने भक्तिभाव के साथ भगवान की आराधना की और जीवन में संयम, त्याग तथा आत्मकल्याण के मार्ग पर आगे बढ़ने की भावना व्यक्त की।

अनंत चतुर्दशी पर श्रद्धालुओं ने रखा उपवास
अनंत चतुर्दशी के अवसर पर जैन समाज के अनेक श्रद्धालुओं ने उपवास एवं विभिन्न व्रत रखकर धार्मिक आराधना की। श्रद्धालुओं ने मंदिरों में पहुंचकर भगवान का अभिषेक और शांतिधारा की तथा विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना की। इस दौरान उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म की भावना को आत्मसात करने और इंद्रियों पर संयम रखने का संकल्प लिया गया।
जैन समाज के लिए दशलक्षण महापर्व आत्मशुद्धि, संयम और आध्यात्मिक साधना का महत्वपूर्ण पर्व माना जाता है। दस दिनों तक चले इस महापर्व में उत्तम क्षमा, मार्दव, आर्जव, शौच, सत्य, संयम, तप, त्याग, आकिंचन्य और ब्रह्मचर्य जैसे धर्मों की आराधना की गई। अंतिम दिन उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म की आराधना के साथ पर्व का धार्मिक समापन हुआ।
जिनालयों में गूंजे भगवान के जयकारे
दशलक्षण महापर्व के अंतिम दिन अम्बाह के जैन बगीची सहित नगर के विभिन्न जिनालयों में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। मंदिर परिसर भगवान के जयकारों और भक्तिमय वातावरण से गूंजते रहे। श्रद्धालुओं ने सामूहिक रूप से पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लिया।
भगवान श्री वासुपूज्य स्वामी के निर्वाण कल्याणक के अवसर पर निर्वाण लाडू अर्पित करने की धार्मिक परंपरा भी श्रद्धा के साथ निभाई गई। इस दौरान उपस्थित श्रद्धालुओं ने भगवान के प्रति अपनी आस्था व्यक्त करते हुए आत्मकल्याण और मोक्ष मार्ग पर आगे बढ़ने की भावना रखी।
दशलक्षण महापर्व के दस दिनों तक चले धार्मिक आयोजनों के समापन पर जैन समाज के श्रद्धालुओं ने धर्म, संयम, त्याग और आत्मकल्याण के मार्ग पर चलने का संकल्प दोहराया। पूरे आयोजन के दौरान जैन समाज में श्रद्धा और भक्ति का वातावरण बना रहा।
