Petrol-Diesel New Rule: निजी पेट्रोल पंपों पर डीजल की लिमिट तय, Jio-bp पर 50 लीटर तक बिक्री
मिडिल ईस्ट संकट के बीच ईंधन सप्लाई पर असर; कुछ निजी रिटेलरों ने डीजल की बिक्री सीमित की, सरकारी तेल कंपनियों के पंपों पर फिलहाल ऐसी पाबंदी नहीं
नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और मिडिल ईस्ट में जारी संकट के बीच भारत में कुछ निजी ईंधन रिटेलरों ने डीजल की बिक्री सीमित कर दी है। इसका असर खास तौर पर उन ग्राहकों पर पड़ सकता है, जिन्हें एक बार में बड़ी मात्रा में डीजल की जरूरत होती है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक Jio-bp के कई आउटलेट्स पर प्रति ग्राहक 50 लीटर डीजल की सीमा तय की गई है, जबकि प्रत्येक आउटलेट की दैनिक बिक्री को करीब 6,000 लीटर तक सीमित किया गया है।
इससे पहले इन आउटलेट्स पर प्रतिदिन औसतन करीब 11,000 लीटर डीजल की बिक्री होने की बात सामने आई थी। नए बिक्री कोटे के बाद निजी रिटेल नेटवर्क के कुछ पंपों पर डीजल उपलब्धता प्रभावित हो सकती है।
Jio-bp ने 50 लीटर की सीमा तय की
रिपोर्ट के अनुसार Jio-bp ने अपने कई पेट्रोल पंपों पर एक ग्राहक को एक बार में अधिकतम 50 लीटर डीजल देने की सीमा तय की है। इसके अलावा संबंधित आउटलेट की कुल दैनिक बिक्री को 6,000 लीटर तक सीमित किया गया है।
इसका मतलब है कि जिन वाहन मालिकों या कारोबारियों को एक साथ बड़ी मात्रा में डीजल की जरूरत होती है, उन्हें निजी आउटलेट्स पर अतिरिक्त मात्रा में ईंधन लेने में परेशानी हो सकती है। हालांकि, यह सीमा सभी पेट्रोल पंपों पर लागू नहीं है।
Nayara Energy के पंपों पर भी अलग-अलग सीमा
निजी ईंधन कंपनी Nayara Energy ने भी अपने कुछ आउटलेट्स पर डीजल की बिक्री के लिए सीमा तय की है। रिपोर्ट के मुताबिक इन पंपों पर ग्राहक के लिए डीजल की सीमा 70 से 200 लीटर के बीच रखी गई है।
अलग-अलग आउटलेट्स पर लागू सीमा में अंतर होने की वजह से ग्राहकों को डीजल भरवाने से पहले संबंधित पेट्रोल पंप पर उपलब्धता और बिक्री सीमा की जानकारी लेना उपयोगी हो सकता है।
सरकारी तेल कंपनियों के पंपों पर फिलहाल कोई सीमा नहीं
वहीं, Indian Oil Corporation (IOCL), Hindustan Petroleum (HPCL) और Bharat Petroleum (BPCL) जैसी सरकारी तेल विपणन कंपनियों ने अपने पेट्रोल पंपों पर इस तरह की डीजल बिक्री सीमा लागू नहीं की है।
देश में एक लाख से अधिक फ्यूल स्टेशन हैं और इनमें बड़ी संख्या में आउटलेट सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों द्वारा संचालित किए जाते हैं। इसलिए निजी कंपनियों द्वारा कुछ आउटलेट्स पर बिक्री सीमित किए जाने का असर पूरे देश के ईंधन बाजार पर समान रूप से पड़ना जरूरी नहीं है।
ट्रक और कमर्शियल वाहनों पर पड़ सकता है असर
डीजल की सीमित बिक्री का असर खास तौर पर लंबी दूरी तय करने वाले कमर्शियल वाहनों पर पड़ सकता है। ट्रक, बस और अन्य भारी वाहनों को एक बार में बड़ी मात्रा में डीजल की जरूरत होती है।
दूरदराज के क्षेत्रों और कुछ हाईवे रूट्स पर निजी कंपनियों के पेट्रोल पंप महत्वपूर्ण ईंधन विकल्प होते हैं। ऐसे स्थानों पर यदि डीजल की बिक्री सीमित रहती है, तो बड़े कमर्शियल वाहनों को वैकल्पिक पेट्रोल पंप तलाशने पड़ सकते हैं।
मिडिल ईस्ट संकट से सप्लाई पर दबाव
डीजल की बिक्री सीमित करने का फैसला अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बने ईंधन आपूर्ति संबंधी दबाव के बीच सामने आया है। मिडिल ईस्ट में जारी संकट के कारण कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की वैश्विक सप्लाई को लेकर चिंताएं बढ़ी हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों में उतार-चढ़ाव का असर ईंधन कंपनियों की खरीद और सप्लाई व्यवस्था पर भी पड़ सकता है।
फिलहाल उपलब्ध जानकारी के अनुसार डीजल की यह सीमा मुख्य रूप से कुछ निजी ईंधन रिटेल आउटलेट्स तक सीमित है। सरकारी तेल कंपनियों के पेट्रोल पंपों पर सामान्य बिक्री व्यवस्था जारी है। इसलिए वाहन चालकों को घबराने के बजाय अपने नजदीकी पंप पर डीजल की उपलब्धता और लागू बिक्री सीमा की जानकारी लेना बेहतर होगा।
