MP Weather Update: मध्यप्रदेश में कमजोर पड़ा मानसून, नए सिस्टम से फिर बारिश के आसार
अरब सागर और सौराष्ट्र के आसपास बने कम दबाव के क्षेत्र से बदलेगा मौसम, कई जिलों में गरज-चमक के साथ बारिश की संभावना
भोपाल। मध्यप्रदेश में मानसून अब अपने अंतिम चरण की ओर बढ़ रहा है। पिछले कुछ दिनों से प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में बारिश की गतिविधियां कमजोर पड़ी हैं। कई जिलों में दिनभर धूप निकलने के कारण तापमान में बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है, जबकि उमस ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। हालांकि, मानसून की विदाई से पहले प्रदेश में एक बार फिर बारिश का नया दौर शुरू होने के संकेत मिल रहे हैं।
मौसम विभाग के अनुसार अरब सागर और सौराष्ट्र क्षेत्र के आसपास बना कम दबाव का क्षेत्र मध्यप्रदेश के मौसम को प्रभावित कर सकता है। इस मौसमी प्रणाली के प्रभाव से प्रदेश के कुछ हिस्सों में बादल छाने के साथ गरज-चमक और बारिश की गतिविधियां बढ़ने की संभावना है। सिस्टम के मजबूत होने और आगे बढ़ने की स्थिति में बारिश का दायरा भी बढ़ सकता है।
फिलहाल कमजोर है मानसून की गतिविधि
मध्यप्रदेश में वर्तमान समय में मानसून की सक्रियता पहले की तुलना में काफी कम हो गई है। प्रदेश के अधिकतर जिलों में लगातार या भारी बारिश का दौर थम चुका है। कहीं-कहीं स्थानीय बादलों के कारण हल्की बारिश अथवा बूंदाबांदी देखने को मिल रही है, लेकिन अधिकांश क्षेत्रों में मौसम शुष्क बना हुआ है।
दिन में तेज धूप निकलने से अधिकतम तापमान में बढ़ोतरी हो रही है। वातावरण में नमी बने रहने के कारण धूप के साथ उमस भी महसूस की जा रही है। दोपहर के समय गर्मी का असर अधिक दिखाई दे रहा है, जबकि शाम और रात के दौरान कुछ इलाकों में मौसम अपेक्षाकृत सामान्य बना हुआ है।
नए सिस्टम से बदल सकता है प्रदेश का मौसम
मौसम विभाग की जानकारी के अनुसार अरब सागर और सौराष्ट्र क्षेत्र के आसपास बने कम दबाव के क्षेत्र पर मौसम वैज्ञानिक लगातार नजर बनाए हुए हैं। यह प्रणाली आगे किस दिशा में बढ़ती है और कितनी मजबूत होती है, उसी के आधार पर मध्यप्रदेश में बारिश की तीव्रता और क्षेत्र तय होंगे।
यदि इस सिस्टम को पर्याप्त नमी मिली और यह मध्य भारत की ओर प्रभावी हुआ, तो मध्यप्रदेश के पश्चिमी और दक्षिण-पश्चिमी क्षेत्रों में सबसे पहले मौसम बदल सकता है। इसके बाद प्रदेश के मध्य और अन्य हिस्सों में भी बादल छाने तथा हल्की से मध्यम बारिश की स्थिति बन सकती है।
फिलहाल प्रदेशभर में एक साथ भारी बारिश की स्थिति नहीं बताई गई है। स्थानीय मौसमी परिस्थितियों के कारण कुछ स्थानों पर अचानक तेज बारिश हो सकती है, जबकि आसपास के क्षेत्रों में मौसम साफ बना रह सकता है।
गरज-चमक के साथ पड़ सकती हैं बौछारें
मानसून की सक्रियता कमजोर होने के बावजूद वातावरण में नमी मौजूद है। दिन के तापमान में बढ़ोतरी और नमी के मेल से दोपहर बाद स्थानीय बादल विकसित हो सकते हैं। इसके चलते कुछ जिलों में गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ने की संभावना बनी हुई है।
कुछ स्थानों पर तेज हवा और बिजली चमकने की घटनाएं भी हो सकती हैं। ऐसे में लोगों को खराब मौसम के दौरान सुरक्षित स्थान पर रहने की सलाह दी गई है। बिजली चमकने या बादल गरजने की स्थिति में पेड़ों, बिजली के खंभों, खुले मैदानों और जलाशयों के आसपास खड़े होने से बचना चाहिए।
किसानों के लिए महत्वपूर्ण है आगामी बारिश
मानसून के अंतिम चरण में होने वाली बारिश किसानों के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। जहां खेतों में नमी कम हो रही है, वहां हल्की से मध्यम बारिश फसलों के लिए लाभकारी रह सकती है। हालांकि, जिन क्षेत्रों में फसलें पकने की अवस्था में पहुंच चुकी हैं या कटाई की तैयारी चल रही है, वहां तेज बारिश से नुकसान की आशंका भी बनी रहती है।
किसानों को सलाह दी जाती है कि वे स्थानीय मौसम पूर्वानुमान को ध्यान में रखकर ही सिंचाई, कीटनाशक के छिड़काव और कटाई से जुड़े निर्णय लें। खुले में रखी कृषि उपज को सुरक्षित स्थान पर रखने की व्यवस्था भी समय रहते कर लेनी चाहिए। तेज हवा की आशंका वाले क्षेत्रों में खेतों और खलिहानों में विशेष सावधानी बरतना जरूरी है।
मानसून की विदाई में अभी लगेगा समय
मानसून का अंतिम चरण शुरू होने का अर्थ यह नहीं है कि प्रदेश से बारिश पूरी तरह समाप्त हो गई है। मानसून की वापसी एक क्रमिक प्रक्रिया होती है। इसके दौरान हवा की दिशा, वातावरण में नमी, तापमान और अन्य मौसमी प्रणालियों की स्थिति महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
मध्यप्रदेश से मानसून की औपचारिक वापसी से पहले अलग-अलग क्षेत्रों में बारिश के छोटे दौर देखने को मिल सकते हैं। बंगाल की खाड़ी अथवा अरब सागर में बनने वाली नई प्रणालियां इस प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती हैं। यदि कोई प्रभावी सिस्टम सक्रिय होता है, तो मानसून की विदाई में देरी होने के साथ बारिश का एक और दौर भी सामने आ सकता है।
तापमान और उमस में हो सकता है बदलाव
बारिश की गतिविधियां कम रहने पर दिन के तापमान में बढ़ोतरी हो सकती है। वहीं, बादल छाने और बारिश होने के बाद तापमान में कुछ गिरावट दर्ज की जा सकती है। फिलहाल प्रदेश में मौसम का मिला-जुला असर दिखाई देने की संभावना है। कहीं तेज धूप और उमस परेशान करेगी तो कहीं अचानक बादल छाने के बाद बारिश राहत दे सकती है।
मौसम विभाग ने नागरिकों को नियमित पूर्वानुमान और चेतावनियों पर नजर रखने की सलाह दी है। विशेष रूप से गरज-चमक और तेज हवा की स्थिति में सावधानी बरतना जरूरी है। आने वाले दिनों में कम दबाव क्षेत्र की दिशा और उसकी तीव्रता स्पष्ट होने के बाद मध्यप्रदेश में बारिश को लेकर स्थिति और साफ हो सकेगी।
