नागदा पर्युषण पर्व अंगरचना में नन्हे-मुन्नों और युवाओं ने आठ दिनों तक अद्भुत प्रतिभा दिखाई। जन्मवाचन के दिन दोनों जिनालयों की टीमें तड़के 3 बजे से प्रभु सेवा में जुटीं।
नागदा पर्युषण पर्व अंगरचना: 8 दिनों तक नन्हे-मुन्नों और युवाओं ने दिखाई अद्भुत प्रतिभा
भक्ति, कला और समर्पण का अद्भुत संगम, जन्मवाचन के दिन तड़के 3 बजे से प्रभु सेवा में जुटे कलाकार
नागदा (ब्रजेश बोहरा)। नागदा पर्युषण पर्व अंगरचना के दौरान राजा जन्मेजय की धर्मनगरी नागदा में श्वेताम्बर मूर्तिपूजक जैन श्रीसंघ के जिनालयों में धर्म, भक्ति, कला और सेवा का अद्भुत संगम देखने को मिला। जिनेन्द्र प्रभु की भक्ति में डूबे नन्हे-मुन्ने एवं युवा कलाकारों ने पर्युषण पर्व के सभी आठ दिनों में आकर्षक एवं मनमोहक अंगरचनाएं कर अपनी रचनात्मक प्रतिभा को प्रभु चरणों में समर्पित किया।
इन अंगरचनाओं के पीछे केवल कला नहीं, बल्कि घंटों की मेहनत, लगन और गहरी आस्था भी रही। विशेष रूप से भगवान महावीर स्वामी के जन्मवाचन के दिन दोनों जिनालयों की अंगरचना टीमों के कलाकार तड़के करीब 3 बजे से ही जिनालय पहुंचकर तैयारियों में जुट गए।
जब अधिकांश लोग नींद में थे, तब इन नन्हे एवं युवा कलाकारों के हाथ प्रभु की अंगरचना को भव्य स्वरूप देने में जुटे थे। आंखों में नींद थी, लेकिन मन में प्रभु भक्ति का उजास और चेहरे पर उत्साह था।
कई घंटों की मेहनत के बाद जब अंगरचना पूर्ण हुई और श्रद्धालुओं ने प्रभु के मनोहारी स्वरूप के दर्शन किए, तो जिनालयों का वातावरण भक्तिभाव से भर उठा। श्रद्धालुओं ने कलाकारों की इस निस्वार्थ सेवा और अद्भुत कला की सराहना की।
नागदा पर्युषण पर्व अंगरचना: चन्द्रप्रभु जिनालय में भक्ति से सजी प्रभु की अंगरचना
पर्युषण पर्व के पंचम दिवस श्री चन्द्रप्रभु जिनालय एवं पार्श्व प्रधान पाठशाला भवन में दोनों ट्रस्ट मंडलों एवं चातुर्मास समिति के संयुक्त तत्वावधान में भगवान महावीर स्वामी के जन्मवाचन कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
जन्मवाचन के इस विशेष अवसर को यादगार बनाने के लिए अंगरचना कलाकारों ने तड़के करीब 3 बजे से ही तैयारियां प्रारंभ कर दी थीं।
प्रभु के प्रति अपार श्रद्धा और सेवा भाव से तैयार की गई भव्य अंगरचना ने जिनालय की शोभा में चार चांद लगा दिए। ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो कलाकारों ने फूलों, रंगों और सजावटी सामग्री के साथ अपनी भावनाएं भी प्रभु चरणों में अर्पित कर दी हों।
शांतिनाथ जिनालय में भी गूंजा भक्ति और उल्लास
पर्युषण पर्व के छठे दिवस रविवार को जैन कॉलोनी स्थित श्री शांतिनाथ जिनालय में श्री राजेन्द्र सूरि जैन ज्ञान मंदिर ट्रस्ट द्वारा भगवान महावीर स्वामी का जन्मवाचन कार्यक्रम श्रद्धा, भक्ति एवं उल्लास के साथ आयोजित किया गया।
चातुर्मास के लिए विराजित पूज्य साध्वीश्री अहर्मव्रता श्रीजी म.सा. एवं साध्वीश्री की पावन निश्रा में आयोजित वीर जन्मवाचन समारोह में बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाओं ने सहभागिता की। जन्मवाचन के दौरान जिनालय का वातावरण भक्ति और उत्साह से भर उठा।
तड़के 3 बजे से प्रभु सेवा में जुटे युवा और नन्हे कलाकार
श्री शांतिनाथ जिनालय में पर्युषण पर्व के दौरान आठों दिन अंगरचना करने वाले युवा एवं नन्हे प्रभुभक्त कलाकारों तथा श्री महावीर संगीत मंडल के संगीतकारों ने पूरे उत्साह एवं निस्वार्थ भाव से अपनी सेवाएं दीं। विशेष रूप से जन्मवाचन के दिन कलाकार सुबह करीब 3 बजे से ही अंगरचना की तैयारियों में जुट गए।
टीम का कुशल संचालन राजेश गेलड़ा एवं यश गेलड़ा ने किया।
टीम में हिमांशु गादिया, आदित्य मेहता, आयुष बोहरा, ऋषभ वागरेचा, तन्वी लोढ़ा, कार्तिक वागरेचा, पीयूष बोहरा, निशित ओरा, विपुल कोठारी, पार्श्व गेलड़ा, अर्हम गेलड़ा, आदिश कोठारी, तनिष कोठारी, मनन गेलड़ा, नक्ष गादिया एवं सिद्धार्थ बोहरा शामिल रहे।
‘शृंगार ए जिनेन्द्र ग्रुप’ ने दिखाई कलात्मक प्रतिभा
श्री चन्द्रप्रभु जिनालय में पर्युषण पर्व के दौरान प्रतिदिन आकर्षक अंगरचना करने वाली ‘शृंगार ए जिनेन्द्र ग्रुप’ की टीम ने भी अपनी कलात्मक प्रतिभा एवं जिनेन्द्र भक्ति का सुंदर परिचय दिया।
जन्मवाचन के विशेष दिन टीम के सदस्य भी तड़के करीब 3 बजे से ही प्रभु की अंगरचना को भव्य स्वरूप देने में जुट गए।
टीम का कुशल संचालन सुजय कांकरीया एवं अमन छोरिया ने किया।
टीम में पर्व नागदा, भव्य चौधरी, मयंक कांकरीया, सुमित बाबेल, भावेश शेखावत, मोहित शेखावत, दिव्यांश छोरिया, वर्धन बोहरा, जेमिश कोचर, मीत कोचर, महिमा छाजेड़, विधि संचेती, प्रियांशी भंसाली, लिचिका गूगलिया, मोक्षा गूगलिया, चहेती कोठारी एवं आशी छोरिया शामिल रहे।
कला नहीं, प्रभु के प्रति समर्पण था हर रचना में
पर्युषण पर्व के दौरान दोनों जिनालयों में सजी अंगरचनाएं श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहीं। इन रचनाओं में फूलों और सजावटी सामग्री की खूबसूरती के साथ बच्चों और युवाओं की श्रद्धा, मेहनत और समर्पण भी स्पष्ट दिखाई दिया।
सुबह 3 बजे से प्रभु सेवा में जुटना इस बात का भावपूर्ण उदाहरण रहा कि जहां भक्ति सच्ची हो, वहां समय और थकान का कोई महत्व नहीं रह जाता। नन्हे हाथों और युवा ऊर्जा से सजी इन अंगरचनाओं ने न केवल जिनालयों की शोभा बढ़ाई, बल्कि समाज में धार्मिक संस्कार, सेवा, रचनात्मकता, एकता और जिनेन्द्र भक्ति की भावना को भी मजबूत किया।
इन कलाकारों ने यह संदेश दिया कि धर्म केवल पूजा-अर्चना तक सीमित नहीं, बल्कि अपनी प्रतिभा, समय और श्रम को प्रभु चरणों में समर्पित करना भी भक्ति का सुंदर स्वरूप है।
युवा प्रतिभाओं की सेवा प्रेरणादायी : ब्रजेश बोहरा
अखिल भारतीय श्री राजेन्द्र जैन नवयुवक परिषद परिवार की ओर से राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी ब्रजेश बोहरा ने सभी आयोजकों, अंगरचना करने वाले नन्हे एवं युवा कलाकारों तथा संगीतकारों की अनुमोदना करते हुए कहा कि जैन समाज के बच्चों और युवाओं का धर्म के प्रति यह समर्पण, सेवा भावना और रचनात्मक सहभागिता समाज के लिए प्रेरणादायी है।
उन्होंने कहा कि ऐसी धार्मिक गतिविधियां नई पीढ़ी को संस्कारों से जोड़ने के साथ-साथ उनमें सेवा, समर्पण और एकता की भावना को भी मजबूत करती हैं।
रिपोर्ट : जीवनलाल जैन, नागदा
दैनिक स्वराज वाणी

