मंडलेश्वर में भव्य धार्मिक आयोजनों के साथ मनाया जाएगा दश लक्षण महापर्व
आर्यिका श्री 105 लक्ष्मी भूषण माताजी ससंघ के मंगल सानिध्य और ब्रह्मचारिणी रिम्पी दीदी के नेतृत्व में होगी आत्मशुद्धि की आराधना
स्वराज वाणी संवाददाता: गौतम साल्वे, मंडलेश्वर
मंडलेश्वर। परम पूज्य आर्यिका श्री 105 लक्ष्मी भूषण माताजी ससंघ, ब्रह्मचारिणी रिम्पी दीदी एवं ब्रह्मचारिणी डॉ. ऊषा दीदी के पावन सानिध्य में वर्षायोग 2026 के अंतर्गत नगर में दश लक्षण महापर्व श्रद्धा, भक्ति और धार्मिक उल्लास के साथ मनाया जाएगा। महापर्व के दौरान प्रतिदिन धार्मिक एवं आध्यात्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। सभी कार्यक्रम श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन बड़ा मंदिर जी, मंडलेश्वर में सामूहिक रूप से संपन्न होंगे।
दश लक्षण महापर्व को लेकर दिगंबर जैन समाज के लोगों में विशेष उत्साह है। मंदिर परिसर में कार्यक्रमों की तैयारियां की जा रही हैं। समाज के महिला-पुरुष, युवा और बच्चे धार्मिक आयोजनों में शामिल होकर आत्मशुद्धि, तप, त्याग एवं संयम की आराधना करेंगे।
अभिषेक और शांतिधारा से होगा कार्यक्रमों का शुभारंभ
समाज मंत्री मनोज कुमार जैन ने बताया कि दश लक्षण महापर्व के दौरान प्रतिदिन प्रातःकाल भगवान जिनेंद्र देव के अभिषेक एवं शांतिधारा के साथ धार्मिक कार्यक्रमों का शुभारंभ होगा। इसके पश्चात दश धर्म पर आधारित महामंडल विधान एवं पूजन का आयोजन किया जाएगा।
संगीत और भक्ति के साथ होने वाले विधान एवं पूजन में बड़ी संख्या में समाजजन और धर्मप्रेमी श्रद्धालु शामिल होंगे। श्रद्धालु भगवान जिनेंद्र देव की आराधना कर अपने जीवन में संयम, अहिंसा, सत्य और सदाचार अपनाने का संकल्प लेंगे।
धार्मिक कार्यक्रमों के दौरान मंदिर परिसर को विशेष रूप से सजाया जाएगा। प्रातःकालीन अभिषेक, शांतिधारा और सामूहिक पूजन के कारण पूरे नगर में भक्तिमय वातावरण बना रहेगा।
आर्यिका माताजी की प्रतिदिन होगी मंगल देशना
परम पूज्य आर्यिका श्री 105 लक्ष्मी भूषण माताजी के मंगल सानिध्य में श्रद्धालुओं को प्रतिदिन धर्म और आत्मकल्याण से संबंधित मंगल प्रवचन एवं देशना प्राप्त होगी। माताजी अपने प्रवचनों के माध्यम से दश धर्म के वास्तविक स्वरूप, आत्मा के स्वभाव और मनुष्य के जीवन में धर्म के महत्व को सरल एवं प्रभावी भाषा में समझाएंगी।
आर्यिका माताजी श्रद्धालुओं को बताएंगी कि धार्मिक अनुष्ठानों का वास्तविक उद्देश्य केवल बाहरी क्रियाएं करना नहीं, बल्कि अपने भीतर के विकारों को दूर कर आत्मा को निर्मल बनाना है। जीवन में क्षमा, विनय, सरलता, सत्य, संयम और त्याग जैसे गुणों को धारण करना ही धर्म की सार्थकता है।
शाम को होगी आरती और विशेष प्रवचन
प्रतिदिन सायंकाल मंदिर परिसर में भगवान की आरती और भक्ति का आयोजन किया जाएगा। आरती के बाद ब्रह्मचारिणी रिम्पी दीदी द्वारा दश धर्म के विभिन्न स्वरूपों और उनके आध्यात्मिक महत्व पर विशेष प्रवचन दिए जाएंगे।
उनके नेतृत्व एवं मार्गदर्शन में महापर्व की आराधना को व्यवस्थित और भक्तिमय स्वरूप प्रदान किया जाएगा। ब्रह्मचारिणी डॉ. ऊषा दीदी भी धार्मिक कार्यक्रमों में उपस्थित रहकर श्रद्धालुओं को साधना एवं आत्मकल्याण की दिशा में प्रेरित करेंगी।
संध्याकालीन कार्यक्रमों में भजन, आरती और धार्मिक चर्चा के माध्यम से श्रद्धालुओं को दश धर्म के सिद्धांतों को दैनिक जीवन में अपनाने की प्रेरणा दी जाएगी।
दस दिनों तक होगी दश धर्म की आराधना
दश लक्षण महापर्व में क्रमशः उत्तम क्षमा, उत्तम मार्दव, उत्तम आर्जव, उत्तम शौच, उत्तम सत्य, उत्तम संयम, उत्तम तप, उत्तम त्याग, उत्तम आकिंचन्य और उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म की आराधना की जाएगी।
इन दस धर्मों के माध्यम से मनुष्य को क्रोध, अहंकार, कपट और लोभ जैसे आंतरिक विकारों को दूर करने का संदेश मिलता है। प्रत्येक दिन एक धर्म के स्वरूप, उसकी उपयोगिता और जीवन में उसके व्यावहारिक महत्व पर चर्चा की जाएगी। श्रद्धालु पूजन, स्वाध्याय, ध्यान, उपवास और तपस्या के माध्यम से धर्म साधना करेंगे।
‘दश धर्म आत्मा के वास्तविक स्वभाव’
परम पूज्य आर्यिका श्री 105 लक्ष्मी भूषण माताजी ने पर्यूषण एवं दश लक्षण महापर्व की महिमा बताते हुए कहा कि यह आत्मशुद्धि की ओर अग्रसर होने का पर्व है। इसे केवल बाहरी धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं रखना चाहिए। यह अपनी आत्मा को भीतर से निर्मल और पवित्र बनाने का अवसर प्रदान करता है।
माताजी ने कहा कि इन पावन दिनों में प्रत्येक श्रावक को त्याग, संयम, उपवास, स्वाध्याय, ध्यान एवं धार्मिक आराधना के माध्यम से अपने जीवन को धर्ममय बनाने का प्रयास करना चाहिए। मनुष्य को हिंसा, झूठ, चोरी, कुशील और परिग्रह रूपी पांच पापों से बचने का प्रयास करना चाहिए। इसके साथ ही क्रोध, मान, माया और लोभ रूपी चार कषायों पर नियंत्रण प्राप्त करना आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि दश धर्म वास्तव में आत्मा के स्वभाव हैं। उत्तम क्षमा से लेकर उत्तम ब्रह्मचर्य तक प्रत्येक धर्म मनुष्य को अपनी आत्मा के निकट ले जाता है। इन गुणों को जीवन में अपनाने से शांति, संयम, सद्भावना और आत्मिक आनंद की प्राप्ति होती है।
श्रद्धालुओं से सामूहिक सहभागिता का आह्वान
दश लक्षण महापर्व के सभी धार्मिक कार्यक्रम श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन बड़ा मंदिर जी में सामूहिक रूप से आयोजित किए जाएंगे। समाज ने धर्मप्रेमी बंधुओं, माताओं-बहनों, युवाओं और बच्चों से अधिक से अधिक संख्या में कार्यक्रमों में सहभागी बनने का आह्वान किया है।
महापर्व के दौरान मंडलेश्वर का वातावरण धार्मिक एवं आध्यात्मिक रहेगा। सामूहिक आराधना के माध्यम से समाज में क्षमा, सरलता, सत्य, संयम, तप, त्याग, आकिंचन्य और ब्रह्मचर्य जैसे आत्मिक गुणों को जीवन में उतारने का संदेश दिया जाएगा।
