शासकीय भूमि पर अवैध खनन का आरोप, ग्रामीणों ने कलेक्टर से की कार्रवाई की मांग
अमनकुआ में पत्थर और मुरम के कथित उत्खनन की ईटीएस मशीन से जांच कराने तथा उच्चस्तरीय समिति गठित करने की मांग
दैनिक स्वराज वाणी ब्यूरो रिपोर्ट: खलील मंसूरी
अलीराजपुर। विकासखंड चंद्रशेखर आजाद नगर के ग्राम अमनकुआ के ग्रामीणों ने शासकीय भूमि पर लंबे समय से कथित रूप से किए जा रहे पत्थर और मुरम के उत्खनन का मामला जनसुनवाई में उठाया है। ग्रामीणों ने कलेक्टर अलीराजपुर को आवेदन सौंपकर खनन क्षेत्र का स्थल निरीक्षण कराने, ईटीएस मशीन से सर्वे करवाने और पूरे मामले की जांच के लिए उच्चस्तरीय समिति गठित करने की मांग की है।
ग्रामीणों ने आवेदन के माध्यम से ग्राम अमनकुआ स्थित शासकीय सर्वे नंबर 260 और 620 की भूमि पर खनन गतिविधियां संचालित होने का आरोप लगाया है। आवेदन में दावा किया गया है कि सर्वे नंबर 260 की भूमि पर करीब आठ वर्षों से पत्थर एवं मुरम का उत्खनन कर उसका परिवहन किया जा रहा है। हालांकि इन आरोपों की पुष्टि प्रशासनिक जांच के बाद ही हो सकेगी।
खनन से गहरे गड्ढे होने का आरोप
ग्रामीणों का कहना है कि लगातार उत्खनन के कारण संबंधित क्षेत्र में कई स्थानों पर गहरे गड्ढे बन गए हैं। बारिश के दौरान इन गड्ढों में बड़ी मात्रा में पानी भर जाता है, जिससे आसपास रहने वाले लोगों, बच्चों और मवेशियों के साथ दुर्घटना होने की आशंका बनी रहती है।
आवेदन में कहा गया है कि खनन के कारण भूमि के प्राकृतिक स्वरूप में भी बदलाव आया है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि अधिकारियों की टीम मौके पर पहुंचकर गड्ढों की गहराई, क्षेत्रफल और खनन की वास्तविक स्थिति का निरीक्षण करे। इससे यह स्पष्ट किया जा सकेगा कि संबंधित भूमि से कितना पत्थर और मुरम निकाला गया तथा खनन नियमों का पालन हुआ या नहीं।
धूल और ब्लास्टिंग से परेशानी का दावा
आवेदन में ग्रामीणों ने खनन गतिविधियों के दौरान उड़ने वाली धूल, भारी मशीनों के संचालन और कथित ब्लास्टिंग से परेशानी होने की शिकायत भी की है। ग्रामीणों का दावा है कि खनन क्षेत्र में मशीनें चलने एवं ब्लास्टिंग के दौरान आसपास के मकानों में कंपन महसूस होता है। इससे मकानों को नुकसान पहुंचने की आशंका बनी रहती है।
ग्रामीणों के अनुसार पत्थर और मुरम के परिवहन के दौरान सड़कों पर भी धूल उड़ती है, जिससे आसपास रहने वाले लोगों और मार्ग से गुजरने वाले वाहन चालकों को परेशानी होती है। उन्होंने प्रदूषण और सुरक्षा से संबंधित निर्धारित नियमों के पालन की भी जांच कराने की मांग की है।
कृषि भूमि और जलस्तर पर असर की शिकायत
ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि खनन गतिविधियों का प्रभाव आसपास की कृषि भूमि पर भी पड़ रहा है। आवेदन में कहा गया है कि लगातार गहराई तक उत्खनन किए जाने से क्षेत्र के बोरवेल और नलकूपों के जलस्तर पर असर पड़ने की आशंका है। इस विषय में तकनीकी विशेषज्ञों से जांच कराने की मांग की गई है।
ग्रामीणों का कहना है कि कृषि भूमि और भूजल ग्रामीण जीवन के प्रमुख आधार हैं। यदि खनन के कारण इन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है तो समय रहते प्रभावी कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने प्रशासन से खनिज विभाग, राजस्व विभाग और पर्यावरण से जुड़े अधिकारियों की संयुक्त टीम बनाकर जांच कराने का अनुरोध किया है।
ईटीएस मशीन से सर्वे और वीडियोग्राफी की मांग
आवेदन में ग्रामीणों ने विशेष रूप से ईटीएस मशीन के माध्यम से खनन क्षेत्र का तकनीकी सर्वे कराने की मांग की है। ग्रामीणों का मानना है कि आधुनिक सर्वेक्षण मशीन के माध्यम से उत्खनन किए गए क्षेत्र की लंबाई, चौड़ाई और गहराई का सटीक आकलन किया जा सकता है।
इसके साथ ही संपूर्ण जांच प्रक्रिया और खनन क्षेत्र की वीडियोग्राफी कराने की मांग भी की गई है। ग्रामीणों ने कहा कि तकनीकी सर्वे एवं वीडियोग्राफी से वास्तविक स्थिति सामने आएगी और खनन की मात्रा का निष्पक्ष आकलन किया जा सकेगा।
अनुमति और संबंधित दस्तावेजों की हो जांच
ग्रामीणों ने प्रशासन से संबंधित भूमि पर खनन की अनुमति, लीज, रॉयल्टी और परिवहन से जुड़े सभी दस्तावेजों की जांच करने का अनुरोध किया है। उन्होंने पूछा है कि शासकीय भूमि पर खनन के लिए किस विभाग से अनुमति जारी की गई और अनुमति में निर्धारित शर्तों का पालन किया गया अथवा नहीं।
आवेदन में मांग की गई है कि राजस्व रिकॉर्ड के माध्यम से सर्वे नंबर 260 और 620 की वर्तमान स्थिति स्पष्ट की जाए। इसके अतिरिक्त खनिज परिवहन में उपयोग किए गए वाहनों, रॉयल्टी पर्चियों और अन्य अभिलेखों की भी जांच की जाए।
नियम विरुद्ध खनन मिलने पर वसूली की मांग
ग्रामीणों ने कहा कि यदि प्रशासनिक जांच में अवैध अथवा नियम विरुद्ध उत्खनन पाया जाता है तो जिम्मेदार व्यक्तियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। इसके साथ ही शासन को देय राजस्व, रॉयल्टी और जुर्माने की राशि का निर्धारण कर उसकी वसूली सुनिश्चित करने की मांग की गई है।
आवेदन पर बड़ी संख्या में ग्रामीणों के हस्ताक्षर बताए गए हैं। ग्रामीणों ने कलेक्टर से मामले की गंभीरता को देखते हुए शीघ्र स्थल निरीक्षण कराने और जांच के निष्कर्षों के आधार पर उचित कार्रवाई करने का अनुरोध किया है। अब प्रशासनिक जांच के बाद ही खनन की अनुमति, वास्तविक मात्रा और ग्रामीणों द्वारा लगाए गए आरोपों की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
