ऋषि पंचमी पर महिलाओं ने रखा निर्जला व्रत, मंदिरों में श्रद्धापूर्वक सुनी धार्मिक कथा
पारंपरिक विधि से की सप्तऋषियों की पूजा, मोरधन का सेवन कर निभाई पर्व की परंपरा
रिपोर्टर: मनोज कुमार पुष्पद
पड़ाना। नगर में ऋषि पंचमी का पर्व मंगलवार को श्रद्धा, भक्ति और पारंपरिक धार्मिक मान्यताओं के साथ मनाया गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में महिलाओं ने निर्जला व्रत रखकर सप्तऋषियों की पूजा-अर्चना की और मंदिरों में आयोजित ऋषि पंचमी की कथा का श्रवण किया। सुबह से ही नगर के विभिन्न मंदिरों में महिलाओं का पहुंचना शुरू हो गया था। श्रद्धालुओं ने विधि-विधान से पूजन कर परिवार की सुख-समृद्धि और मंगल की कामना की।
ऋषि पंचमी को लेकर महिलाओं ने एक दिन पहले ही पूजन सामग्री की व्यवस्था कर ली थी। मंगलवार सुबह स्नान और दैनिक धार्मिक क्रियाओं के बाद व्रती महिलाओं ने मंदिरों एवं घरों में सप्तऋषियों का स्मरण किया। पूजा के दौरान दीप प्रज्ज्वलित कर पुष्प, फल और अन्य धार्मिक सामग्री अर्पित की गई। मंदिरों में सामूहिक रूप से कथा सुनने के बाद महिलाओं ने आरती की।
गुजराती दर्जी समाज के पटेल मोहल्ले में कथा
ऋषि पंचमी के अवसर पर गुजराती दर्जी समाज के पटेल मोहल्ले में विशेष धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किया गया। यहां राधा शर्मा ने उपस्थित महिलाओं को ऋषि पंचमी की कथा सुनाई और पर्व से जुड़ी धार्मिक मान्यताओं की जानकारी दी।
कथा के दौरान महिलाओं ने पूरे भक्तिभाव से सप्तऋषियों का स्मरण किया। राधा शर्मा ने परंपरागत विधि के अनुसार पूजन करवाया। कथा सुनने के लिए पटेल मोहल्ले सहित आसपास के क्षेत्रों से महिलाएं पहुंचीं। धार्मिक आयोजन के कारण पूरे मोहल्ले में सुबह से ही भक्तिमय वातावरण बना रहा।
महिलाओं ने सामूहिक रूप से पूजा-अर्चना करते हुए जाने-अनजाने में हुई त्रुटियों के लिए क्षमा मांगी। पूजा के बाद श्रद्धालुओं ने परिवार की खुशहाली, उत्तम स्वास्थ्य और सुख-शांति की प्रार्थना की।
श्री राम नर्वदेश्वर महादेव मंदिर में हुआ कथा वाचन
नगर के गांधी चौक बस स्टैंड स्थित श्री राम नर्वदेश्वर महादेव मंदिर में भी ऋषि पंचमी के अवसर पर धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किया गया। यहां सावित्री व्यास ने महिलाओं को ऋषि पंचमी की कथा का वाचन कर पर्व के धार्मिक महत्व के बारे में बताया। उनके मार्गदर्शन में महिलाओं ने पारंपरिक विधि से पूजा-पाठ किया।
मंदिर में दिनभर व्रती महिलाओं का आना-जाना लगा रहा। महिलाओं ने भगवान शिव के दर्शन करने के साथ सप्तऋषियों का स्मरण किया और कथा सुनी। मंदिर परिसर में पूजा-अर्चना, भजन और धार्मिक चर्चा का क्रम चलता रहा। कथा के दौरान महिलाओं ने श्रद्धापूर्वक बैठकर पर्व की मान्यताओं को समझा।
सप्तऋषियों की आराधना से जुड़ा है पर्व
हिंदू धर्म में ऋषि पंचमी का विशेष धार्मिक महत्व माना गया है। यह पर्व सप्तऋषियों के प्रति श्रद्धा और सम्मान प्रकट करने के लिए मनाया जाता है। इस दिन कश्यप, अत्रि, भारद्वाज, विश्वामित्र, गौतम, जमदग्नि और वशिष्ठ ऋषि का स्मरण एवं पूजन करने की परंपरा है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार ऋषि पंचमी का व्रत आत्मशुद्धि, संयम और प्रायश्चित से जुड़ा है। महिलाएं जाने-अनजाने में हुई धार्मिक त्रुटियों के निवारण की भावना से यह व्रत करती हैं। व्रत के माध्यम से जीवन में शुद्धता, अनुशासन और सदाचार अपनाने का संकल्प लिया जाता है।
पर्व पर महिलाओं ने पारंपरिक नियमों का पालन करते हुए दिनभर उपवास किया। कई महिलाओं ने निर्जला व्रत रखा, जबकि कुछ व्रती महिलाओं ने पूजन और कथा के बाद निर्धारित धार्मिक परंपरा के अनुसार आहार ग्रहण किया।
हल से बिना जोते गए मोरधन का किया सेवन
ऋषि पंचमी पर सामान्य अनाज का सेवन नहीं करने की परंपरा भी निभाई गई। महिलाओं ने हल से बिना जोते उत्पन्न होने वाले मोरधन का सेवन किया। कई घरों में मोरधन से व्रत के अनुकूल व्यंजन तैयार किए गए। व्रती महिलाओं ने पूजा और कथा के बाद धार्मिक नियमों के अनुसार इनका सेवन किया।
श्रद्धालुओं ने बताया कि ऋषि पंचमी के व्रत में शुद्धता और सात्विकता का विशेष ध्यान रखा जाता है। व्रत के दौरान मन, वचन और कर्म से संयम रखने तथा धार्मिक चिंतन करने का प्रयास किया जाता है। महिलाओं ने अपना अधिकांश समय पूजा, कथा, भजन और भगवान के स्मरण में बिताया।
दिनभर मंदिरों में रहा भक्तिमय वातावरण
पर्व के कारण नगर के मंदिरों में सुबह से शाम तक महिलाओं की उपस्थिति बनी रही। अलग-अलग समूहों में महिलाएं कथा सुनने और पूजन करने के लिए पहुंचती रहीं। पूजा स्थलों को फूलों और धार्मिक सामग्री से सजाया गया था। महिलाओं ने सामूहिक आरती में भाग लेकर परिवार और समाज की खुशहाली की कामना की।
ऋषि पंचमी के आयोजन ने नगर में धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक सहभागिता का भी संदेश दिया। महिलाओं ने एक-दूसरे को पर्व की शुभकामनाएं दीं और धार्मिक परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का संकल्प व्यक्त किया।
