सीएम राइज स्कूल निगवानी में ‘माटी गणेश–सिद्ध गणेश’ प्रशिक्षण कार्यक्रम संपन्न
90 विद्यार्थियों ने प्राकृतिक मिट्टी से बनाईं भगवान गणेश की प्रतिमाएं, ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत पौधारोपण कर दिया पर्यावरण संरक्षण का संदेश
संवाददाता: सुनील रैदास, संभागीय ब्यूरो चीफ
अनूपपुर। मध्यप्रदेश जन अभियान परिषद अनूपपुर के नेतृत्व में शनिवार, 12 सितंबर 2026 को विकासखंड कोतमा के सेक्टर क्रमांक-1 स्थित सीएम राइज स्कूल निगवानी में सेक्टर स्तरीय ‘माटी गणेश–सिद्ध गणेश’ प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। पर्यावरण संरक्षण और भारतीय संस्कृति को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आयोजित इस कार्यशाला में विद्यार्थियों को प्राकृतिक मिट्टी से भगवान गणेश की प्रतिमाएं बनाने का प्रशिक्षण दिया गया। कार्यक्रम के दौरान ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के अंतर्गत पौधारोपण भी किया गया।
कार्यक्रम विकासखंड समन्वयक सरिमन साकेत की उपस्थिति और संस्था के अध्यक्ष हीरेंद्र तिवारी के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ। नवांकुर संस्था भगता ग्राम विकास समिति कोतमा ने आयोजन में सहयोग प्रदान किया। प्रशिक्षण कार्यक्रम में विद्यालय के विद्यार्थियों, शिक्षकों, नवांकुर सखियों, ग्राम विकास प्रस्फुटन समितियों के सदस्यों और सीएमसीएलडीपी के छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
प्रतिमा निर्माण की चरणबद्ध प्रक्रिया बताई
कार्यशाला में प्रशिक्षक रूपा रावत और ज्ञानू वर्मा ने प्रतिभागियों को प्राकृतिक मिट्टी से भगवान गणेश की प्रतिमा बनाने की सरल एवं चरणबद्ध प्रक्रिया समझाई। प्रशिक्षण के दौरान मिट्टी को तैयार करने, उसे उचित आकार देने और प्रतिमा के विभिन्न अंगों को सावधानीपूर्वक बनाने की जानकारी दी गई।
प्रशिक्षकों के मार्गदर्शन में विद्यार्थियों ने अपने हाथों से भगवान गणेश की आकर्षक प्रतिमाएं बनाईं। इस दौरान विद्यार्थियों में विशेष उत्साह दिखाई दिया। कार्यक्रम में सीएम राइज स्कूल निगवानी के लगभग 90 विद्यार्थियों ने सहभागिता की। प्रशिक्षण का उद्देश्य केवल प्रतिमा बनाना सिखाना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों को पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार बनाना भी रहा।
प्राकृतिक प्रतिमाएं अपनाने का दिया संदेश
कार्यक्रम के माध्यम से बताया गया कि प्राकृतिक मिट्टी से निर्मित गणेश प्रतिमाएं विसर्जन के बाद पानी में आसानी से घुल जाती हैं। इससे जलस्रोतों को नुकसान नहीं पहुंचता और मिट्टी की प्राकृतिक संरचना भी प्रभावित नहीं होती। इसके विपरीत प्लास्टर ऑफ पेरिस और रासायनिक रंगों से बनी प्रतिमाएं पानी में शीघ्र नहीं घुलतीं। इनके कारण नदियों, तालाबों और अन्य जलस्रोतों में प्रदूषण बढ़ने की आशंका रहती है।
प्रतिभागियों को आगामी गणेशोत्सव के दौरान प्राकृतिक मिट्टी से बनी प्रतिमाओं का उपयोग करने तथा परिवार और आसपास के लोगों को भी इसके लिए जागरूक करने के लिए प्रेरित किया गया। प्रशिक्षण कार्यशाला के माध्यम से पर्यावरण के अनुकूल तरीके से धार्मिक त्योहार मनाने का संदेश दिया गया।
‘माटी से सृजन, माटी में विलय’ का समझाया महत्व
कार्यक्रम में ‘माटी से सृजन, माटी में विलय’ के संदेश का महत्व भी समझाया गया। बताया गया कि मनुष्य और प्रकृति का संबंध अत्यंत गहरा है। जिस मिट्टी से जीवन की शुरुआत होती है, अंततः सब कुछ उसी में विलीन हो जाता है। प्राकृतिक मिट्टी से भगवान गणेश की प्रतिमा बनाना इसी जीवन दर्शन और प्रकृति के प्रति सम्मान का प्रतीक है।
‘सिद्ध गणेश’ की अवधारणा को भगवान गणेश की पूजा के साथ संकल्प की सिद्धि से जोड़कर समझाया गया। विद्यार्थियों और उपस्थित लोगों को बताया गया कि गणेशोत्सव के अवसर पर पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लेना तभी सार्थक होगा, जब उसे दैनिक जीवन और व्यवहार में भी उतारा जाए।
पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का लिया संकल्प
कार्यक्रम के दौरान ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के अंतर्गत विद्यालय परिसर में पौधारोपण किया गया। उपस्थित लोगों ने लगाए गए पौधों की सुरक्षा और नियमित देखभाल करने का संकल्प लिया। पौधारोपण के माध्यम से विद्यार्थियों को पेड़-पौधों के महत्व और पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में उनकी भूमिका की जानकारी दी गई।
इस अवसर पर सीएम राइज स्कूल के प्राचार्य एसपी प्रजापति, प्रधानाध्यापक इंद्रमणि पांडे, विद्यालय के शिक्षकगण, नवांकुर सखियां और प्रस्फुटन समितियों के सदस्य उपस्थित रहे। ग्राम विकास प्रस्फुटन समिति उरतान, सिलपुर और निगवानी के सदस्यों के साथ नीरज द्विवेदी तथा सीएमसीएलडीपी के छात्र-छात्राओं ने भी सक्रिय सहभागिता निभाई।
कार्यक्रम का समापन “माटी के गणेश—प्रकृति का सम्मान, स्वच्छ जल—स्वस्थ जीवन और पर्यावरण संरक्षण हमारा संकल्प” के संदेश के साथ हुआ। उपस्थित प्रतिभागियों ने प्राकृतिक गणेश प्रतिमाओं को अपनाने, जल प्रदूषण रोकने और पर्यावरण संरक्षण के प्रति समाज को जागरूक करने का संकल्प लिया।
