इंदौर का 21 सदस्यीय श्रद्धालु दल सम्मेद शिखर की तीर्थयात्रा कर लौटा
27 किलोमीटर की पैदल वंदना कर पार्श्वनाथ भगवान की टोंक पर की सामूहिक पूजा, विश्व शांति और अमन-चैन की कामना
इंदौर। इंदौर से शाश्वत तीर्थ सम्मेद शिखर की धार्मिक यात्रा पर गया 21 सदस्यीय श्रद्धालु दल नौ दिवसीय यात्रा पूर्ण कर सकुशल वापस लौट आया। यह धार्मिक यात्रा 1 सितंबर से 9 सितंबर तक आयोजित की गई। यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं ने सम्मेद शिखर पर्वत की करीब 27 किलोमीटर की कठिन पैदल वंदना की और विभिन्न टोंकों के दर्शन कर पुण्य लाभ प्राप्त किया।
यात्रा में शामिल श्रद्धालुओं ने पर्वत पर स्थित भगवान पार्श्वनाथ की टोंक पर सामूहिक पूजा-अर्चना की। इस अवसर पर विश्व शांति, सद्भावना, भाईचारे और अमन-चैन की कामना की गई। श्रद्धालुओं ने सभी जीवों के कल्याण तथा समाज और देश में सुख-समृद्धि की प्रार्थना भी की।
27 किलोमीटर की पैदल वंदना की
मीडिया प्रभारी प्रवीण जैन ने बताया कि इंदौर से रवाना हुए 21 सदस्यीय दल ने अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ सम्मेद शिखर पर्वत की पैदल वंदना पूरी की। लगभग 27 किलोमीटर की यह धार्मिक यात्रा शारीरिक परिश्रम के साथ आत्मसंयम, श्रद्धा और दृढ़ संकल्प की भी परीक्षा मानी जाती है।
दल के सदस्यों ने पर्वत पर विराजमान पवित्र टोंकों के दर्शन किए। यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं ने भगवान के जयकारे लगाते हुए भक्ति और उत्साह के साथ आगे बढ़कर वंदना पूर्ण की। पैदल यात्रा के दौरान प्रत्येक सदस्य के मन में तीर्थंकर भगवान के प्रति अगाध श्रद्धा दिखाई दी।
श्रद्धालुओं ने कहा कि सम्मेद शिखर की वंदना केवल एक धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि आत्मचिंतन, आत्मशुद्धि और आध्यात्मिक ऊर्जा प्राप्त करने का माध्यम है। पर्वत की कठिन यात्रा मनुष्य को धैर्य, अनुशासन, सहनशीलता और संयम का संदेश देती है।
पार्श्वनाथ भगवान की की टोंक पर सामूहिक पूजन
यात्रा के दौरान सभी श्रद्धालु भगवान पार्श्वनाथ की टोंक पर पहुंचे। यहां उन्होंने विधिपूर्वक सामूहिक पूजा-अर्चना की और विश्व में शांति स्थापित होने की प्रार्थना की। श्रद्धालुओं ने समाज में प्रेम, करुणा, अहिंसा और आपसी सद्भाव की भावना मजबूत होने की कामना की।
मीडिया प्रभारी प्रवीण जैन ने बताया कि वर्तमान समय में दुनिया के विभिन्न हिस्सों में तनाव और संघर्ष की स्थितियां बनी हुई हैं। ऐसे में श्रद्धालुओं ने भगवान पार्श्वनाथ के चरणों में प्रार्थना करते हुए संपूर्ण विश्व में शांति, अमन-चैन और भाईचारा स्थापित होने की भावना व्यक्त की।
इस अवसर पर जैन धर्म के मूल सिद्धांत अहिंसा, अनेकांतवाद, अपरिग्रह, सत्य और करुणा को जीवन में अपनाने का संकल्प भी लिया गया। श्रद्धालुओं का कहना था कि भगवान महावीर और सभी तीर्थंकरों द्वारा दिया गया अहिंसा का संदेश आज पूरी दुनिया के लिए अत्यंत प्रासंगिक है।
20 तीर्थंकरों की निर्वाण भूमि है सम्मेद शिखर
सम्मेद शिखर जैन धर्म के सबसे पवित्र एवं शाश्वत तीर्थ क्षेत्रों में से एक माना जाता है। जैन मान्यता के अनुसार वर्तमान चौबीसी के 24 तीर्थंकरों में से 20 तीर्थंकरों ने इसी पवित्र पर्वत से निर्वाण प्राप्त किया था। इसी कारण यह तीर्थ जैन समाज की आस्था का प्रमुख केंद्र है।
देश-विदेश से बड़ी संख्या में जैन श्रद्धालु सम्मेद शिखर पहुंचकर पर्वत की वंदना करते हैं। यहां स्थित प्रत्येक टोंक किसी न किसी तीर्थंकर की निर्वाण स्थली से जुड़ी मानी जाती है। पर्वत की वंदना के दौरान श्रद्धालु तीर्थंकरों के त्याग, तपस्या, साधना और मोक्ष मार्ग का स्मरण करते हैं।
दल के सदस्यों ने कहा कि सम्मेद शिखर की वंदना करने से मन को अद्भुत शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा प्राप्त होती है। पर्वत का शांत वातावरण और पवित्रता मनुष्य को सांसारिक चिंताओं से दूर कर आत्मकल्याण की दिशा में चिंतन करने के लिए प्रेरित करती है।
तलहटी के मंदिरों में की पूजा-अर्चना
सम्मेद शिखर पर्वत की वंदना के साथ श्रद्धालुओं ने तलहटी में स्थित विभिन्न जैन मंदिरों के दर्शन किए। सभी मंदिरों में भगवान की पूजा-अर्चना कर परिवार, समाज और राष्ट्र की खुशहाली की प्रार्थना की गई। श्रद्धालुओं ने मंदिरों की धार्मिक एवं आध्यात्मिक व्यवस्था की सराहना की।
यात्रा के दौरान दल के सदस्यों ने मुनिश्री 108 श्रमसागर जी महाराज के दर्शन किए और उनसे मंगल आशीर्वाद प्राप्त किया। मुनिश्री के सान्निध्य में श्रद्धालुओं ने धर्म आराधना करते हुए संयम, अहिंसा और सदाचार के मार्ग पर चलने की प्रेरणा प्राप्त की।
श्रद्धालुओं ने कहा कि संतों के दर्शन और आशीर्वाद से तीर्थयात्रा की सार्थकता बढ़ जाती है। मुनिश्री द्वारा दिए गए धर्म संदेश से सभी यात्रियों को अपने जीवन में धार्मिक एवं नैतिक मूल्यों को अपनाने की प्रेरणा मिली।
श्रद्धा और भक्तिभाव के साथ यात्रा संपन्न
नौ दिवसीय धार्मिक यात्रा के दौरान दल के सदस्यों ने आपसी सहयोग, अनुशासन और भक्तिभाव का परिचय दिया। सभी श्रद्धालुओं ने एक-दूसरे का सहयोग करते हुए पर्वत की कठिन वंदना पूर्ण की। यात्रा संपन्न होने के बाद इंदौर लौटे श्रद्धालुओं ने अपने अनुभव साझा करते हुए इसे जीवन का अविस्मरणीय और आध्यात्मिक अवसर बताया।
तीर्थयात्रा में मनोज-हेमा जैन, अमित-रश्मि जैन, अमन-मेघना जैन, संगीता जैन, सुनील-नीता जैन, अभय-निशा जैन तथा अक्षत-सिद्धि जैन सहित 21 श्रद्धालु शामिल हुए। सभी ने भगवान पार्श्वनाथ एवं तीर्थंकर परमात्माओं के चरणों में विश्व शांति और सर्व जीव कल्याण की कामना की।
