पर्यूषण महापर्व के दूसरे दिवस धर्मसभा में गूंजा धर्म का संदेश
सौरभ जी नारेलिया ने दिया प्रेरणादायी प्रवचन
शाजापुर। जैन धर्म के पावन पर्यूषण महापर्व के दूसरे दिवस शाजापुर में प्रातःकाल धर्मसभा का आयोजन किया गया। धार्मिक एवं आध्यात्मिक वातावरण में आयोजित धर्मसभा में बड़ी संख्या में जैन समाज के श्रद्धालुओं ने उपस्थित होकर धर्मलाभ लिया। इस अवसर पर जैन समाज के गौरव श्री सौरभ जी नारेलिया ने श्रद्धालुओं को जैन धर्म, संयम, आत्मशुद्धि और आध्यात्मिक जीवन के महत्व पर प्रेरणादायी मार्गदर्शन दिया।
धर्मसभा के दौरान श्रद्धालुओं ने शांतिपूर्वक प्रवचन सुने और धर्म के बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया। पर्यूषण महापर्व के अवसर पर शाजापुर में धार्मिक गतिविधियों का विशेष आयोजन किया जा रहा है, जिससे पूरे नगर में आध्यात्मिक वातावरण बना हुआ है।
आत्मचिंतन और आत्मशुद्धि का पर्व है पर्यूषण
अपने प्रवचन में श्री सौरभ जी नारेलिया ने कहा कि पर्यूषण महापर्व केवल पूजा-पाठ और धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं है। यह स्वयं के भीतर झांकने, अपनी गलतियों का आत्मचिंतन करने, संयम अपनाने और जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का अवसर है।
उन्होंने श्रद्धालुओं को धर्म के वास्तविक स्वरूप को अपने व्यवहार और जीवनशैली में उतारने की प्रेरणा दी। उनके अनुसार मनुष्य को बाहरी आडंबरों के बजाय अपनी आत्मा की शुद्धि और सद्गुणों के विकास पर ध्यान देना चाहिए।
उन्होंने कहा कि जैन धर्म का मूल संदेश अहिंसा, संयम, तप, त्याग और आत्मकल्याण से जुड़ा है। पर्यूषण के दिनों में इन सिद्धांतों को समझने और अपने जीवन में अपनाने का विशेष अवसर मिलता है।
धार्मिक विषयों पर लगातार हो रहा मार्गदर्शन
श्री सौरभ जी नारेलिया शाजापुर श्वेतांबर जैन समाज के अध्यक्ष श्री लोकेंद्र जी नारेलिया के सुपुत्र हैं। वे समाज में धार्मिक जागृति और आध्यात्मिक चेतना के लिए सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।
पर्यूषण महापर्व के दौरान उनके द्वारा श्रद्धालुओं को विभिन्न धार्मिक एवं आध्यात्मिक विषयों पर मार्गदर्शन दिया जा रहा है। इनमें कल्पसूत्र वाचन, प्रतिक्रमण, आगम ज्ञान, केवल ज्ञान और शासन के गौरव सहित अनेक विषय शामिल हैं।

धार्मिक विषयों की सरल एवं प्रेरणादायी व्याख्या के माध्यम से श्रद्धालुओं को जैन धर्म के सिद्धांतों को समझने और उन्हें अपने दैनिक जीवन में अपनाने का संदेश दिया जा रहा है।
धार्मिक वातावरण में डूबा शाजापुर
पर्यूषण महापर्व को लेकर शाजापुर का जैन समाज पूरी तरह धार्मिक वातावरण में डूबा हुआ है। सुबह से ही धार्मिक स्थलों पर श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी हुई है। विभिन्न धार्मिक आयोजनों, प्रवचनों और साधना कार्यक्रमों के माध्यम से समाज में आध्यात्मिक जागृति लाने का प्रयास किया जा रहा है।
पर्यूषण के दौरान श्रद्धालु संयम, तप, स्वाध्याय, प्रतिक्रमण और आत्मचिंतन के माध्यम से अपने जीवन को धर्ममय बनाने का प्रयास कर रहे हैं। समाजजनों का मानना है कि ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को भी जैन धर्म की मूल शिक्षाओं और संस्कारों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
संयम और अहिंसा का संदेश
धर्मसभा में यह संदेश भी दिया गया कि पर्यूषण महापर्व का उद्देश्य व्यक्ति को भीतर से बेहतर बनाना है। अहिंसा, क्षमा, संयम और आत्मशुद्धि जैसे मूल्यों को व्यवहार में उतारकर ही पर्व की वास्तविक सार्थकता प्राप्त की जा सकती है।
धर्मसभा में उपस्थित श्रद्धालुओं ने प्रवचन को श्रद्धापूर्वक सुना और धर्म के मार्ग पर आगे बढ़ने का संकल्प लिया। आयोजन के दौरान जैन समाज के अनेक वरिष्ठजन एवं समाजजन उपस्थित रहे।
पर्यूषण महापर्व के आगामी दिनों में भी शाजापुर में विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम जारी रहेंगे। इन आयोजनों के माध्यम से श्रद्धालुओं को आत्मचिंतन, धर्म, तप और आध्यात्मिक जीवन की ओर प्रेरित किया जाएगा।
चंद्रेश जैन | ब्यूरो चीफ | स्वराज वाणी | शाजापुर
स्थान – शाजापुर, मध्यप्रदेश
