हिंदी दिवस पर ‘Hastinapur Ke Veer’ के कलाकारों ने भाषा की समृद्धि को किया सलाम
कलाकारों ने साझा किए हिंदी से जुड़े अनुभव
मुंबई, सितंबर 2026। हिंदी केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि भावनाओं और विचारों को प्रभावी ढंग से व्यक्त करने वाली भाषा भी है। हिंदी दिवस के अवसर पर सोनी सब के शो ‘Hastinapur Ke Veer’ के कलाकारों ने हिंदी की समृद्धि, गहराई और आकर्षण का सम्मान करते हुए अपने अनुभव साझा किए।
शो में भीष्म पितामह, गांधारी, कुंती और दुर्योधन जैसे महत्वपूर्ण किरदार निभा रहे कलाकारों ने बताया कि ऐतिहासिक पृष्ठभूमि वाले इस शो में भाषा उनके अभिनय का अहम हिस्सा है। कलाकारों के लिए संवादों का सही उच्चारण, शब्दों का अर्थ और उनकी भावनाओं को समझना किरदारों को प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
भीष्म के लिए हिंदी में गरिमा जरूरी
भीष्म पितामह की भूमिका निभा रहे मनीष वाधवा ने कहा कि भारत की भाषाई विविधता देश की खूबसूरती है और जिस भाषा का हम रोजाना इस्तेमाल करते हैं, उसे सही तरीके से जानना जरूरी है।
उन्होंने बताया कि स्पष्ट शब्दावली और भाषा की अच्छी समझ संवादों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने में मदद करती है। भीष्म पितामह जैसे गंभीर और गरिमामय किरदार के लिए समृद्ध हिंदी बोलना उनके लिए सीखने का विशेष अनुभव रहा है। उनके अनुसार हिंदी में मौजूद गहराई और गरिमा भीष्म के व्यक्तित्व के अनुरूप है।

दुर्योधन के किरदार में भाषा की भूमिका
दुर्योधन का किरदार निभा रहे आयुध भानुशाली ने बताया कि वह छह साल की उम्र से हिंदी टेलीविजन शो का हिस्सा रहे हैं। वर्षों से हिंदी में काम करने के कारण यह भाषा उनके अभिनय और सीखने की प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गई है।
उन्होंने बताया कि ‘हस्तिनापुर के वीर’ के लिए आयोजित वर्कशॉप्स से उनके उच्चारण और भाषा की समझ में सुधार हुआ। इन वर्कशॉप्स ने उन्हें संवादों को बेहतर तरीके से समझने और प्रस्तुत करने में मदद की। उनका मानना है कि भाषा पर किया गया यह अभ्यास शो के साथ-साथ उनके व्यक्तिगत भाषा कौशल को भी मजबूत कर रहा है।
गांधारी के लिए शुद्ध हिंदी सीखना खास अनुभव
गांधारी की भूमिका निभा रहीं विवाना सिंह ने कहा कि हिंदी को उसके शुद्ध रूप में बोलना उनके लिए शानदार सीखने का अनुभव रहा है। नियमित अभ्यास, मार्गदर्शन और उच्चारण सहायक की मदद से उन्होंने अपनी संवाद प्रस्तुति में सुधार किया।
विवाना के अनुसार, इस प्रक्रिया ने उन्हें हिंदी की समृद्धि को समझने और शक्तिशाली शब्दों के माध्यम से अपने किरदार की भावनाओं को व्यक्त करने का अवसर दिया। उनके लिए भाषा केवल संवाद बोलने का माध्यम नहीं, बल्कि किरदार को गहराई से समझने का जरिया भी बनी है।

कुंती के किरदार में शब्दों की बारीकियां
कुंती की भूमिका निभा रहीं तोरल रसपुत्रा ने बताया कि शो के सेट पर हिंदी ट्यूटर कलाकारों की मदद करते हैं। वे संवादों, उच्चारण और कठिन शब्दों के अर्थ को समझने में सहयोग करते हैं।
तोरल ने कहा कि शो में इस्तेमाल होने वाली हिंदी रोजमर्रा की बातचीत से काफी अलग है। इसी वजह से संवादों को सही संदर्भ और उच्चारण के साथ प्रस्तुत करने के लिए विशेष अभ्यास की जरूरत पड़ती है।
उन्होंने बताया कि हिंदी सीखने की यह प्रक्रिया केवल शूटिंग तक सीमित नहीं रही। अब वह सेट के बाहर भी अपनी भाषा और शब्दों के इस्तेमाल को लेकर पहले से अधिक सजग हो गई हैं।
भाषा बनी किरदारों को जीवंत करने का माध्यम
‘हस्तिनापुर के वीर’ जैसे ऐतिहासिक शो में भाषा की भूमिका महत्वपूर्ण है। संवादों की शैली, शब्दों का चयन और उच्चारण किरदारों के व्यक्तित्व को दर्शकों तक पहुंचाने में मदद करते हैं।
कलाकारों के अनुभव बताते हैं कि हिंदी की समृद्ध शब्दावली ने उन्हें अपने-अपने किरदारों को बेहतर तरीके से समझने और प्रस्तुत करने में मदद की है। भीष्म के संवादों में गंभीरता, दुर्योधन के व्यक्तित्व में प्रभाव, गांधारी के संवादों में भावनात्मक गहराई और कुंती के किरदार में संवेदनशीलता को भाषा के माध्यम से प्रभावी बनाया जा रहा है।

सोमवार से शनिवार रात 9 बजे प्रसारण
हिंदी दिवस पर कलाकारों ने भाषा की खूबसूरती और महत्व को रेखांकित करते हुए बताया कि हिंदी उनके लिए केवल काम का हिस्सा नहीं, बल्कि सीखने और अभिव्यक्ति का माध्यम भी है।
सोनी सब का ‘हस्तिनापुर के वीर’ दर्शकों को सोमवार से शनिवार रात 9 बजे देखने को मिलेगा। शो के कलाकारों का मानना है कि भाषा की समृद्धि को समझना और उसका सम्मान करना हर कलाकार के लिए महत्वपूर्ण है।
