उज्जैन में खड़े हनुमान प्रतिमा की शिफ्टिंग पर बढ़ा विवाद, संतों और हिंदू संगठनों ने किया विरोध
सड़क चौड़ीकरण के लिए प्रतिमा हटाने की कोशिश का दावा, श्रद्धालुओं ने किया हनुमान चालीसा का पाठ; प्रशासन से आस्था का सम्मान करने की मांग
उज्जैन। उज्जैन के सती गेट क्षेत्र स्थित खड़े हनुमान मंदिर की प्रतिमा को स्थानांतरित करने का मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। शहर के मास्टर प्लान और सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के अंतर्गत प्रस्तावित सड़क चौड़ीकरण के लिए मंदिर एवं प्रतिमा को दूसरी जगह शिफ्ट करने की कार्रवाई का साधु-संतों, हिंदू संगठनों और स्थानीय श्रद्धालुओं ने विरोध किया है।
प्रतिमा स्थल पर बड़ी संख्या में पहुंचे श्रद्धालुओं ने सामूहिक रूप से हनुमान चालीसा का पाठ और भजन-कीर्तन किया। प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन से धार्मिक भावनाओं एवं प्रतिमा के कथित ऐतिहासिक महत्व को ध्यान में रखते हुए कोई भी निर्णय लेने की मांग की है।
प्रतिमा नहीं हिलने का किया जा रहा दावा
स्थानीय श्रद्धालुओं का दावा है कि मंदिर का निर्माण हटाए जाने के बाद खड़े हनुमान की प्रतिमा को स्थानांतरित करने की कोशिश की गई, लेकिन वह अपने स्थान से नहीं हिली। प्रतिमा को लगभग आठ फीट ऊंचा बताया जा रहा है। इस घटनाक्रम के बाद बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौके पर पहुंच रहे हैं और कई लोग इसे अपनी आस्था से जोड़कर देख रहे हैं। के अनुसार, प्रतिमा को हटाने के प्रयास सफल नहीं होने के बाद स्थल पर भजन-कीर्तन किया गया।
हालांकि प्रतिमा क्यों नहीं हट सकी, इसे लेकर तकनीकी और आधिकारिक जानकारी स्पष्ट रूप से सामने आना बाकी है। विशेषज्ञ जांच के बिना इसे किसी चमत्कार अथवा दैवीय घटना के रूप में प्रमाणित नहीं किया जा सकता। इसके बावजूद श्रद्धालुओं के बीच प्रतिमा को लेकर आस्था और उत्सुकता लगातार बढ़ रही है।
हनुमान चालीसा का पाठ कर जताया विरोध
प्रशासन और नगर निगम की प्रस्तावित कार्रवाई के विरोध में संतों तथा हिंदू संगठनों से जुड़े कार्यकर्ता मंदिर स्थल पर एकत्रित हुए। उन्होंने हनुमान चालीसा का सामूहिक पाठ करते हुए प्रतिमा को मूल स्थान पर ही रहने देने की मांग की।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि विकास कार्य आवश्यक हैं, लेकिन उनके लिए धार्मिक स्थलों की प्राचीनता और स्थानीय लोगों की आस्था को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। प्रशासन को संत समाज, मंदिर से जुड़े प्रतिनिधियों, स्थानीय नागरिकों और तकनीकी विशेषज्ञों के साथ बातचीत कर सर्वमान्य समाधान निकालना चाहिए।
स्थानीय लोगों ने मांग की कि प्रतिमा के संबंध में कोई भी कार्रवाई जल्दबाजी या बलपूर्वक नहीं होनी चाहिए। यदि सड़क चौड़ीकरण जरूरी है तो वैकल्पिक डिजाइन और मार्ग के विकल्पों पर भी विचार किया जाए।
सड़क चौड़ीकरण से जुड़ा है मामला
उज्जैन में आगामी सिंहस्थ और शहर की यातायात व्यवस्था को देखते हुए कई सड़कों के चौड़ीकरण एवं आधारभूत संरचना से जुड़े कार्य प्रस्तावित हैं। सती गेट और आसपास का क्षेत्र घनी आबादी एवं व्यावसायिक गतिविधियों वाला इलाका है। प्रशासन सड़क को चौड़ा करके यातायात व्यवस्था बेहतर बनाने की दिशा में काम कर रहा है।
इसी परियोजना के दायरे में खड़े हनुमान मंदिर का हिस्सा आने की बात कही जा रही है। बताया गया कि मंदिर को दूसरी जगह व्यवस्थित करने तथा प्रतिमा को सुरक्षित तरीके से स्थानांतरित करने की योजना बनाई गई थी। लेकिन कार्रवाई के दौरान हुए विरोध के बाद विवाद अधिक गहरा गया।
श्रद्धालुओं का कहना है कि वे विकास के विरोधी नहीं हैं, लेकिन विकास और आस्था के बीच संतुलन बनाया जाना चाहिए। दूसरी ओर प्रशासन के सामने सड़क चौड़ीकरण, यातायात सुविधा और धार्मिक भावनाओं के बीच समन्वय स्थापित करने की चुनौती है।
प्रतिमा की प्राचीनता को लेकर अलग-अलग दावे
खड़े हनुमान की प्रतिमा और मंदिर कितने पुराने हैं, इसे लेकर अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं। कुछ रिपोर्टों में मंदिर को करीब 170 वर्ष पुराना बताया गया है। वहीं एक पुरातत्व विशेषज्ञ के हवाले से प्रतिमा के राजा भोज के काल से संबंधित और लगभग एक हजार वर्ष पुरानी होने की संभावना जताई गई है। विशेषज्ञ ने इसकी वास्तविक ऐतिहासिकता जानने के लिए वैज्ञानिक परीक्षण एवं विस्तृत अध्ययन की जरूरत बताई है। में भी इन दावों को अंतिम निष्कर्ष के बजाय जांच का विषय बताया गया है।
ऐसे में आवश्यक है कि पुरातत्व, इतिहास और संरचना से जुड़े विशेषज्ञों की टीम प्रतिमा का अध्ययन करे। यदि प्रतिमा ऐतिहासिक या पुरातात्विक महत्व की पाई जाती है तो उसके संरक्षण के लिए निर्धारित नियमों के अनुसार कदम उठाए जाने चाहिए।
जबरन स्थानांतरण के आरोप से बढ़ा तनाव
विरोध कर रहे संगठनों ने प्रतिमा को कथित रूप से जबरन स्थानांतरित करने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि बिना पर्याप्त संवाद के की गई कार्रवाई से श्रद्धालुओं की भावनाएं आहत हुई हैं। उन्होंने प्रशासन से प्रतिमा स्थल पर किसी भी प्रकार की कार्रवाई रोकने और सभी पक्षों के साथ बैठक आयोजित करने की मांग की।
प्रदर्शन के दौरान धार्मिक नारे लगाए गए और श्रद्धालुओं ने प्रतिमा के समक्ष पूजा-अर्चना की। स्थिति की संवेदनशीलता को देखते हुए प्रशासन एवं पुलिस द्वारा घटनास्थल की निगरानी किए जाने की बात सामने आई है।
संतों ने मांगा सर्वमान्य समाधान
संत समाज से जुड़े लोगों ने कहा कि धार्मिक प्रतिमा को हटाना अत्यंत संवेदनशील विषय है। इसके लिए धार्मिक परंपराओं, विधि-विधान और विशेषज्ञों की सलाह का पालन किया जाना चाहिए। उन्होंने प्रतिमा को मूल स्थान पर सुरक्षित रखने की मांग करते हुए कहा कि सड़क चौड़ीकरण की योजना में आवश्यक संशोधन संभव हो तो उस विकल्प को प्राथमिकता दी जाए।
संतों एवं संगठनों ने प्रशासन को चेतावनी दी कि यदि धार्मिक भावनाओं की अनदेखी कर कार्रवाई की गई तो विरोध तेज किया जा सकता है। साथ ही उन्होंने लोगों से शांतिपूर्ण और संवैधानिक तरीके से अपनी बात रखने की अपील भी की।
प्रशासन के निर्णय पर टिकी नजर
फिलहाल सभी की निगाहें प्रशासन के अगले निर्णय पर टिकी हैं। प्रतिमा उसी स्थान पर रहेगी या धार्मिक विधि एवं तकनीकी विशेषज्ञों की देखरेख में दूसरी जगह स्थानांतरित की जाएगी, इसे लेकर आधिकारिक स्थिति स्पष्ट होना बाकी है।
यह मामला अब केवल सड़क चौड़ीकरण तक सीमित नहीं रह गया है। इसमें शहर के विकास, धार्मिक आस्था, ऐतिहासिक धरोहर और प्रशासनिक प्रक्रिया से जुड़े कई सवाल शामिल हो गए हैं। स्थानीय लोगों की मांग है कि अंतिम निर्णय लेने से पहले प्रतिमा की प्राचीनता की जांच, तकनीकी सर्वेक्षण और सभी संबंधित पक्षों से व्यापक संवाद किया जाए।
