तंबोलिया में श्मशान घाट तक पहुंचने का रास्ता बदहाल, बारिश में पैदल चलना भी मुश्किल
विधायक को आवेदन देने के बाद भी नहीं हुआ समाधान, ग्रामीणों ने मार्ग पर तत्काल मुरम डलवाने की मांग की
देवी सिंह, ताल तहसील रिपोर्टर
दैनिक स्वराज वाणी
तंबोलिया। ताल तहसील के ग्राम तंबोलिया में श्मशान घाट तक जाने के लिए सुगम रास्ता नहीं होने से ग्रामीणों को गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। बारिश के कारण मार्ग पर कीचड़ और जलभराव की स्थिति बन गई है। कई स्थानों पर रास्ता इतना खराब हो चुका है कि ग्रामीणों के लिए पैदल निकलना भी मुश्किल हो रहा है। ऐसे में शव वाहन अथवा अन्य चार पहिया वाहन का श्मशान घाट तक पहुंच पाना लगभग असंभव हो गया है।
ग्रामीणों का कहना है कि यह समस्या लंबे समय से बनी हुई है। बारिश शुरू होते ही रास्ते की स्थिति और अधिक खराब हो जाती है। श्मशान घाट तक पहुंचने के लिए लोगों को कीचड़, पानी और फिसलन भरे रास्ते से गुजरना पड़ता है। किसी ग्रामीण की मृत्यु होने पर अंतिम संस्कार के लिए शव को श्मशान घाट तक ले जाने में परिजनों और ग्रामीणों को कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है।
विधायक को दिया था आवेदन
ग्रामीणों ने बताया कि श्मशान घाट मार्ग की समस्या को लेकर क्षेत्रीय विधायक डॉ. राजेंद्र पांडेय को आवेदन दिया गया था। आवेदन में रास्ते की वास्तविक स्थिति से अवगत कराते हुए आवश्यक सुधार कराने की मांग की गई थी। ग्रामीणों का आरोप है कि आवेदन देने के बाद भी अब तक मार्ग पर कोई सुधार कार्य प्रारंभ नहीं हुआ।
ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने जनप्रतिनिधियों और संबंधित अधिकारियों के सामने कई बार समस्या रखी, लेकिन स्थिति जस की तस बनी हुई है। बारिश के दिनों में समस्या अधिक गंभीर हो जाने के बावजूद मार्ग को आवागमन योग्य बनाने के लिए कोई अस्थायी व्यवस्था भी नहीं की गई।
स्थानीय लोगों ने कहा कि श्मशान घाट गांव की आवश्यक सार्वजनिक सुविधाओं में शामिल है। वहां तक सुरक्षित एवं सुगम रास्ता उपलब्ध कराना प्रशासन और पंचायत की जिम्मेदारी है। इसके बावजूद ग्रामीणों को वर्षों से खराब मार्ग से होकर गुजरना पड़ रहा है।
सीसी रोड नहीं, फिलहाल मुरम की मांग
ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि वे फिलहाल मार्ग पर सीसी रोड निर्माण की मांग नहीं कर रहे हैं। उनका कहना है कि स्थायी सड़क निर्माण में यदि समय लग रहा है तो बारिश के दौरान तत्काल राहत देने के लिए मार्ग पर मुरम डलवाई जा सकती है।
मुरम डालकर मार्ग को समतल करने से जलभराव, कीचड़ और गहरे गड्ढों की समस्या कुछ हद तक कम हो सकती है। इससे ग्रामीणों के साथ शव वाहन और अन्य आवश्यक वाहनों को श्मशान घाट तक पहुंचने में सुविधा मिलेगी।
स्थानीय लोगों का कहना है कि मुरम डलवाने में बहुत अधिक समय या बड़ी राशि की आवश्यकता नहीं होगी। जनप्रतिनिधि अथवा संबंधित विभाग पहल करे तो कुछ ही समय में अस्थायी रास्ता तैयार किया जा सकता है। इसके बावजूद इस छोटी लेकिन अत्यंत जरूरी मांग पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
अंतिम संस्कार के समय बढ़ जाती है परेशानी
ग्रामीणों के अनुसार, सामान्य दिनों में भी श्मशान घाट तक पहुंचने में परेशानी होती है, लेकिन बारिश के मौसम में स्थिति बेहद चिंताजनक हो जाती है। रास्ते पर कीचड़ और पानी होने के कारण अंतिम यात्रा में शामिल लोगों के फिसलकर गिरने का खतरा बना रहता है।
वाहन नहीं पहुंच पाने की स्थिति में शव को कठिन रास्ते से कंधे पर ले जाना पड़ सकता है। इससे मृतक के परिजनों और अंतिम यात्रा में शामिल ग्रामीणों को अतिरिक्त परेशानी उठानी पड़ती है। बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों के लिए ऐसे मार्ग से गुजरना ज्यादा जोखिमपूर्ण है।
ग्रामीणों का कहना है कि अंतिम संस्कार जैसी संवेदनशील परिस्थिति में परिवार पहले ही दुख में होता है। ऐसे समय खराब रास्ता उनकी परेशानी और बढ़ा देता है। इसलिए प्रशासन को इसे सामान्य सड़क समस्या के रूप में नहीं, बल्कि मानवीय और आवश्यक सुविधा से जुड़े विषय के रूप में देखना चाहिए।
कीचड़ और जलभराव से हादसे का खतरा
मार्ग पर पानी की निकासी की उचित व्यवस्था नहीं होने से बारिश का पानी कई स्थानों पर जमा हो जाता है। लगातार आवाजाही और वाहनों के पहियों के कारण मिट्टी कीचड़ में बदल जाती है। फिसलन की वजह से दोपहिया वाहन चालक और पैदल राहगीर हादसे का शिकार हो सकते हैं।
रास्ते में पानी भरा होने के कारण गड्ढों का सही अंदाजा भी नहीं लग पाता। ग्रामीणों को डर है कि यदि जल्द ही मार्ग की मरम्मत नहीं कराई गई तो कोई दुर्घटना हो सकती है। उन्होंने मांग की है कि मुरम डालने के साथ पानी की निकासी की अस्थायी व्यवस्था भी की जाए।
पंचायत और प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग
ग्रामीणों ने ग्राम पंचायत, जनपद पंचायत, तहसील प्रशासन और क्षेत्रीय विधायक से मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग की है। उनका कहना है कि जिम्मेदार अधिकारी मौके पर पहुंचकर मार्ग की स्थिति का निरीक्षण करें और बारिश को देखते हुए शीघ्र राहत कार्य प्रारंभ कराएं।
ग्रामीणों ने यह भी मांग की कि अस्थायी तौर पर मुरम डलवाने के बाद श्मशान घाट तक स्थायी सड़क निर्माण का प्रस्ताव तैयार किया जाए। सड़क के साथ जल निकासी की व्यवस्था बनाई जाए, ताकि भविष्य में बारिश के दौरान दोबारा ऐसी स्थिति उत्पन्न न हो।
समाधान के इंतजार में ग्रामीण
ग्राम तंबोलिया के लोग अब भी इस समस्या के समाधान की प्रतीक्षा कर रहे हैं। उनका कहना है कि उन्होंने आवेदन देकर अपनी जिम्मेदारी पूरी कर दी, अब जनप्रतिनिधियों और प्रशासन को संवेदनशीलता दिखाते हुए कार्रवाई करनी चाहिए।
ग्रामीणों ने चेतावनी नहीं, बल्कि मानवीय आधार पर तत्काल सहायता की मांग की है। उनका कहना है कि श्मशान घाट तक पहुंचने योग्य रास्ता किसी सुविधा से अधिक गांव की मूलभूत आवश्यकता है। बारिश के मौसम को देखते हुए मार्ग पर शीघ्र मुरम डलवाकर आवागमन योग्य बनाया जाना चाहिए, ताकि अंतिम संस्कार के समय ग्रामीणों को कठिनाई और जोखिम का सामना न करना पड़े।
