MP में CM के फर्जी लेटरहेड से डॉक्टर के ट्रांसफर की कोशिश, सीहोर से आरोपी गिरफ्तार; इंदौर कनेक्शन की जांच
MP CM Fake Letterhead Case: मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री के कथित फर्जी लेटरहेड का इस्तेमाल कर एक संविदा आयुष अधिकारी का ट्रांसफर कराने की कोशिश का मामला सामने आया है। आलीराजपुर पुलिस ने मामले में आरोपी मुकेश राम सिंह भोसले को सीहोर जिले से गिरफ्तार किया है। पुलिस जांच में दावा किया गया है कि फर्जी लेटरहेड इंदौर से तैयार कराया गया था। अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि आरोपी ने इससे पहले भी इस तरह के फर्जी दस्तावेज बनवाए थे या नहीं और मामले में अन्य लोगों की क्या भूमिका है।
मुख्यमंत्री के नाम पर फर्जी लेटरहेड का मामला
आलीराजपुर। मध्यप्रदेश में सरकारी अधिकारी के ट्रांसफर के लिए मुख्यमंत्री के कथित फर्जी लेटरहेड के इस्तेमाल का मामला सामने आने के बाद पुलिस ने जांच तेज कर दी है। आलीराजपुर पुलिस ने इस मामले में मुकेश राम सिंह भोसले नाम के आरोपी को गिरफ्तार किया है।
पुलिस के मुताबिक आरोपी से शुरुआती पूछताछ में फर्जी लेटरहेड के इंदौर से तैयार कराए जाने की जानकारी सामने आई है। पुलिस अब इस कड़ी की जांच कर रही है और यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि इंदौर में दस्तावेज कहां और किसकी मदद से तैयार किया गया।
आरोपी को सोमवार को कोर्ट में पेश किए जाने की जानकारी है। पुलिस आगे की पूछताछ के लिए रिमांड लेकर मामले से जुड़े अन्य तथ्यों और संभावित लोगों की भूमिका का पता लगाने की तैयारी में है।
संविदा आयुष अधिकारी के ट्रांसफर से जुड़ा है मामला
मामला आलीराजपुर जिले में पदस्थ संविदा आयुष अधिकारी डॉ. निर्मला निंगवाल के ट्रांसफर से जुड़ा बताया जा रहा है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक डॉ. निंगवाल उदयगढ़ से सोंडवा स्थानांतरण चाहती थीं।
इसी दौरान डॉक्टर के ड्राइवर नवल सिंह सस्तिया का संपर्क मुकेश भोसले से हुआ। आरोप है कि मुकेश ने ट्रांसफर कराने का भरोसा दिया और इसके लिए पैसे की मांग की।
पुलिस जांच में सामने आए दावे के अनुसार ट्रांसफर कराने के नाम पर करीब 40 हजार रुपये एडवांस लिए गए। हालांकि इस लेन-देन और संबंधित लोगों की भूमिका की जांच अभी जारी है।
12 जुलाई की तारीख का कथित फर्जी पत्र तैयार
मामले में आरोप है कि मुकेश भोसले ने मुख्यमंत्री के नाम से 12 जुलाई 2026 की तारीख वाला एक फर्जी लेटरहेड तैयार कराया। इसके जरिए डॉक्टर के ट्रांसफर से संबंधित संदेश देने का प्रयास किया गया।
इस कथित लेटरहेड पर मुख्यमंत्री की तस्वीर होने की बात भी सामने आई है। दस्तावेज देखने के बाद स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को इसकी प्रामाणिकता पर संदेह हुआ।
जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा अब यह पता लगाना है कि दस्तावेज किस तकनीक से बनाया गया, इसे किस स्थान पर तैयार कराया गया और इसमें किसी अन्य व्यक्ति या प्रतिष्ठान की भूमिका थी या नहीं।
CMHO को WhatsApp पर भेजा गया था पत्र
आरोप है कि कथित फर्जी लेटरहेड को मुकेश ने अपने मोबाइल नंबर से आलीराजपुर के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. राजेश अतुलकर को WhatsApp के माध्यम से भेजा था।
पत्र मिलने के बाद CMHO को उसके प्रारूप और उसमें इस्तेमाल की गई सामग्री को लेकर संदेह हुआ। इसके बाद उन्होंने मामले की जानकारी वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंचाई।
बताया गया है कि जिस WhatsApp नंबर से कथित फर्जी पत्र भेजा गया था, उसकी प्रोफाइल फोटो पर मध्यप्रदेश शासन का लोगो लगा हुआ था। पुलिस इस नंबर और उससे संबंधित डिजिटल रिकॉर्ड की भी जांच कर सकती है।
CMHO को हुआ शक तो शुरू हुई जांच
CMHO डॉ. राजेश अतुलकर ने पत्र की सत्यता की पुष्टि के लिए इसे वरिष्ठ अधिकारियों के पास भेजा। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक वहां से स्पष्ट किया गया कि इस तरह से संबंधित पत्र जारी नहीं किया जाता।
इसके बाद संदेह और गहरा गया। CMHO स्तर पर संबंधित डॉक्टर और उनके ड्राइवर से भी मामले की जानकारी ली गई। प्रारंभिक जांच और सत्यापन के बाद आलीराजपुर कोतवाली में शिकायत दर्ज कराई गई।
शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने मोबाइल नंबर, संबंधित व्यक्तियों और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर जांच शुरू की।
सीहोर के श्यामपुर से जुड़ा आरोपी
पुलिस जांच में आरोपी मुकेश भोसले के सीहोर जिले के श्यामपुर क्षेत्र का निवासी होने की जानकारी सामने आई। इसके बाद पुलिस ने उसकी तलाश शुरू की और उसे गिरफ्तार कर लिया।
गिरफ्तारी के बाद पुलिस अब यह जानने का प्रयास कर रही है कि आरोपी का सरकारी कार्यालयों या अधिकारियों से कोई वास्तविक संपर्क था या वह केवल सरकारी पहचान और मुख्यमंत्री के नाम का इस्तेमाल कर लोगों को प्रभावित करने की कोशिश कर रहा था।
पुलिस यह भी जांच रही है कि ट्रांसफर के नाम पर लिए गए कथित 40 हजार रुपये का भुगतान किस माध्यम से हुआ और रकम का आगे क्या किया गया।
इंदौर कनेक्शन की जांच करेगी पुलिस
पूछताछ में कथित फर्जी लेटरहेड इंदौर से बनवाए जाने की बात सामने आने के बाद मामले में इंदौर कनेक्शन महत्वपूर्ण हो गया है। पुलिस उस स्थान की पहचान करने का प्रयास कर रही है, जहां दस्तावेज तैयार कराया गया था।
यदि कोई प्रिंटिंग, डिजाइनिंग या अन्य प्रतिष्ठान इस प्रक्रिया में शामिल पाया जाता है तो पुलिस वहां उपलब्ध रिकॉर्ड, डिजिटल फाइल और अन्य साक्ष्यों की जांच कर सकती है।
साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि क्या आरोपी ने केवल एक ही लेटरहेड बनवाया था या उसके पास इसी तरह के अन्य कथित फर्जी सरकारी दस्तावेज भी थे।
कितने फर्जी लेटरहेड बने? पुलिस कर रही पड़ताल
जांच का एक बड़ा सवाल यह है कि आरोपी ने मुख्यमंत्री के नाम पर कितने फर्जी लेटरहेड बनवाए और क्या उनका इस्तेमाल किसी अन्य सरकारी काम, नियुक्ति, ट्रांसफर या अनुशंसा के लिए किया गया।
पुलिस आरोपी के मोबाइल फोन, संपर्कों और डिजिटल गतिविधियों से जुड़े साक्ष्यों की जांच के जरिए पूरे नेटवर्क तक पहुंचने की कोशिश कर रही है। पूछताछ के बाद मामले में और नाम सामने आने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
हालांकि किसी अन्य व्यक्ति की संलिप्तता की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।
डॉक्टर और ड्राइवर की भूमिका की भी होगी जांच
मामले में संबंधित संविदा आयुष अधिकारी और उनके ड्राइवर की भूमिका भी जांच के दायरे में बताई जा रही है। स्वास्थ्य विभाग यह पता लगाएगा कि दोनों को कथित फर्जी दस्तावेज के बारे में कितनी जानकारी थी और ट्रांसफर के लिए आरोपी से संपर्क किन परिस्थितियों में हुआ।
ड्राइवर और आरोपी के बीच कथित बातचीत, पैसों के लेन-देन और डॉक्टर तक जानकारी पहुंचने की पूरी कड़ी की जांच की जा सकती है।
जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक संबंधित डॉक्टर या ड्राइवर की किसी आपराधिक भूमिका को लेकर निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।
कोर्ट में पेश किया गया आरोपी, आगे खुल सकते हैं नए राज
गिरफ्तार आरोपी को सोमवार को अदालत में पेश किए जाने की जानकारी है। पुलिस रिमांड के दौरान उससे फर्जी लेटरहेड तैयार कराने, ट्रांसफर का भरोसा देने, कथित रकम लेने और अन्य संभावित मामलों के संबंध में पूछताछ कर सकती है।
इस मामले में इंदौर से लेकर सीहोर और आलीराजपुर तक अलग-अलग कड़ियां सामने आई हैं। पुलिस की आगे की जांच से यह स्पष्ट होगा कि यह केवल एक ट्रांसफर से जुड़ी घटना थी या इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क सक्रिय था।
