50 एकड़ जमीन दूसरे के नाम दर्ज होने का आरोप, किसान ने की शिकायत
केसली क्षेत्र के पठानगढ़-बहिनी गांव का मामला; राजस्व रिकॉर्ड में कथित गड़बड़ी की जांच और रिकॉर्ड दुरुस्त कराने की मांग
संवाददाता — दीपक अहिरवार
केसली/सागर। केसली जनपद पंचायत क्षेत्र के पठानगढ़-बहिनी गांव से राजस्व रिकॉर्ड में कथित गड़बड़ी का मामला सामने आया है। एक किसान ने आरोप लगाया है कि उसकी करीब 50 एकड़ जमीन राजस्व रिकॉर्ड में किसी दूसरे व्यक्ति के नाम दर्ज हो गई है। मामले की जानकारी मिलने के बाद किसान ने संबंधित कार्यालय में शिकायत दर्ज कराते हुए पूरे मामले की जांच कराने और रिकॉर्ड को दुरुस्त करने की मांग की है।
शिकायत सामने आने के बाद राजस्व विभाग की ऑनलाइन रिकॉर्ड व्यवस्था और उसमें होने वाली प्रविष्टियों की निगरानी को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। हालांकि जमीन का नाम किस परिस्थिति में बदला और रिकॉर्ड में यह प्रविष्टि किस प्रक्रिया के तहत हुई, इसकी आधिकारिक पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।
दूसरे व्यक्ति के नाम जमीन दर्ज होने का आरोप
प्राप्त जानकारी के अनुसार, संबंधित हल्का क्षेत्र के किसान को अपनी जमीन के राजस्व रिकॉर्ड की स्थिति देखने के दौरान कथित तौर पर जानकारी मिली कि करीब 50 एकड़ जमीन किसी अन्य व्यक्ति के नाम दर्ज है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि यह जमीन बृजेंद्र भगवान सिंह, निवासी पड़ा खुर्द के नाम दर्ज हो गई है।
किसान का कहना है कि जमीन के रिकॉर्ड में इस तरह का बदलाव गंभीर मामला है और इसकी निष्पक्ष जांच होना जरूरी है। किसान ने संबंधित अधिकारियों से मांग की है कि रिकॉर्ड में हुए बदलाव की जांच की जाए और यदि प्रविष्टि गलत तरीके से हुई है तो जमीन का रिकॉर्ड वास्तविक स्थिति के अनुसार ठीक किया जाए।
पटवारी की कंप्यूटर दक्षता पर उठे सवाल
मामले में संबंधित हल्का पटवारी धीरज सिंह की कंप्यूटर संबंधी कार्यप्रणाली को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार, कंप्यूटर से जुड़े कार्यों के लिए पटवारी द्वारा अन्य कंप्यूटर ऑपरेटर की सहायता लिए जाने की बात सामने आई है।
इसी बिंदु को लेकर यह सवाल उठाया जा रहा है कि यदि महत्वपूर्ण राजस्व रिकॉर्ड से संबंधित ऑनलाइन कार्य किसी अन्य व्यक्ति की सहायता से किए जाते हैं, तो रिकॉर्ड में दर्ज होने वाली जानकारी की निगरानी और अंतिम सत्यापन की व्यवस्था किस स्तर पर होती है।
हालांकि, केवल किसी अन्य व्यक्ति से कंप्यूटर संबंधी सहायता लिए जाने के आधार पर रिकॉर्ड में कथित बदलाव के लिए किसी व्यक्ति को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं होगा। यह स्पष्ट करने के लिए विभागीय जांच और तकनीकी रिकॉर्ड की जांच आवश्यक है।
भर्ती के समय कंप्यूटर दक्षता को लेकर भी चर्चा
मामले को लेकर पटवारी धीरज सिंह का कथित तौर पर कहना है कि जिस समय उनकी भर्ती हुई थी, उस समय कंप्यूटर ज्ञान या कंप्यूटर दक्षता से संबंधित दस्तावेज अनिवार्य नहीं था।
इसके बाद राजस्व विभाग के ऑनलाइन कार्यों को लेकर सवाल उठ रहे हैं। वर्तमान समय में भूमि रिकॉर्ड सहित कई राजस्व सेवाएं कंप्यूटर और ऑनलाइन सिस्टम के माध्यम से संचालित होती हैं। ऐसे में रिकॉर्ड में किसी भी तरह की गलत प्रविष्टि से किसानों को गंभीर परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
हालांकि यह भी जांच का विषय है कि संबंधित रिकॉर्ड में बदलाव किस यूजर आईडी या लॉगिन से हुआ, किस तारीख को प्रविष्टि की गई और उसे किस स्तर से सत्यापित किया गया।

किसान ने अधिकारियों से की जांच की मांग
जमीन के रिकॉर्ड में कथित बदलाव की जानकारी मिलने के बाद किसान ने संबंधित कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत में किसान ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
किसान की मांग है कि राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज जानकारी का मूल दस्तावेजों से मिलान कराया जाए। साथ ही यह भी पता लगाया जाए कि करीब 50 एकड़ जमीन का नाम दूसरे व्यक्ति के नाम किस प्रक्रिया के तहत दर्ज हुआ।
किसान ने रिकॉर्ड में यदि किसी तरह की गलती या अनियमितता सामने आती है तो उसे तत्काल सुधारने और जिम्मेदारी तय करने की मांग भी की है।
ऑनलाइन राजस्व रिकॉर्ड की निगरानी पर सवाल
यह मामला सामने आने के बाद भूमि रिकॉर्ड में ऑनलाइन प्रविष्टियों की सुरक्षा और निगरानी को लेकर भी सवाल खड़े हो गए हैं। किसानों की जमीन से जुड़े रिकॉर्ड बेहद संवेदनशील होते हैं। नाम, खसरा, रकबा और अन्य विवरणों में किसी भी तरह की गलती होने पर भूमि स्वामित्व और अन्य राजस्व कार्य प्रभावित हो सकते हैं।
ऐसे मामलों में डिजिटल रिकॉर्ड के साथ-साथ मूल दस्तावेजों का सत्यापन भी महत्वपूर्ण हो जाता है। यदि किसी रिकॉर्ड में बदलाव हुआ है तो यह पता लगाना जरूरी है कि बदलाव किस आदेश, दस्तावेज या प्रक्रिया के आधार पर किया गया।
जांच के बाद ही साफ होगी वास्तविक स्थिति
फिलहाल किसान की शिकायत में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र और आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है। यह भी स्पष्ट नहीं है कि रिकॉर्ड में कथित बदलाव तकनीकी त्रुटि के कारण हुआ, मानवीय गलती से हुआ या इसके पीछे कोई अन्य कारण था।
जांच के दौरान राजस्व रिकॉर्ड, मूल दस्तावेज, ऑनलाइन एंट्री का विवरण और संबंधित अधिकारियों की प्रक्रिया की जांच की जा सकती है। इसके बाद ही यह स्पष्ट होगा कि करीब 50 एकड़ जमीन दूसरे व्यक्ति के नाम कैसे दर्ज हुई और इसके लिए कौन जिम्मेदार है।
मामले में किसान ने जल्द जांच पूरी कर वास्तविक रिकॉर्ड सामने लाने और यदि रिकॉर्ड में गलती है तो उसे सुधारने की मांग की है। जब तक जांच पूरी नहीं होती, शिकायत में लगाए गए आरोपों को आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
